रक्षा
सीमा सड़कों के चौड़ीकरण में आड़े आया सर्वोच्च न्यायालय, सेना के लिए दो लेन आवश्यक

पिछले छह महीनों से भारत और चीन के मध्य हिमालय की पहाड़ियों पर चल रही तना-तनी का प्रभाव तीन सड़कों पर पड़ रहा है- ऋषिकेश से गंगोत्री (231 किलोमीटर), ऋषिकेश से मना (281 किलोमीटर) और टनकपुर से पिथौरागढ़ (162 किलोमीटर) जो चीन से लगी उत्तरी सीमा तक जाती हैं।

रक्षा मंत्रालय ने चारधाम परियोजना के अधीन आने वाली इन सड़कों को फीडर (मुख्य मार्ग की सहायक) सड़क कहा है और सुरक्षा की दृष्टि से इनका रणनीतिक महत्त्व बताया है। साथ ही इनके कम से कम दो लेन के होने की बात कही है।

उत्तराखंड चीन के साथ 345 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करती है। सीमा से लगा हुआ क्षेत्र ऊँचाई वाला और बर्फ से ढका रहता है। भारत-चीन सीमा से लगे हुए भारतीय सेना नलॉन्ग धुरी, मना पास, रिमकिम पास, निति पास और लिपुलेख पास पर स्थित है।

तीन राष्ट्रीय राजमार्ग इन सैन्य बिंदुओं को जोड़ते हैं- ऋषिकेश-धरासू-गंगोत्री (एनएच-94 और एनएच-108 नेलॉन्ग व नीलापानी धुरी को जोड़ते हैं), ऋषिकेश-जोशीमठ-मना (एनएच-58) मना-रिमकिम और निति पास को जोड़ता है तथा टनकपुर-पिथौरागढ़ (एनएच-125) लिपुलेख पास को जोड़ता है।

केंद्र ने भी इस बात पर ज़ोर दिया है कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनाई जाने वालीं तीन फीडर सड़कों को दो लेन का बनाया जाए जिसकी चौड़ाई 7 मीटर हो और जहाँ मेड़ बनानी हो, वहाँ 7.5 मीटर हो। सर्वोच्च न्यायालय को लिखे एक आवेदन-पत्र में केंद्र ने कहा था कि 1962 में चीन युद्ध के बाद से सेना इन सड़कों का उपयोग कर रही है।

पहले सीमा क्षेत्रों तक सिर्फ संयोजकता स्थापित करना लक्ष्य होता था इसलिए सड़कों को एक लेन का ही बनाया जाता था। लेकिन अब जब पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं ने लंबे संघर्ष के लिए डेरा डाल दिया है तो सेना को सशस्त्र तैयार रखने के लिए केंद्र चौड़ी और दो लेनों वाली सड़कों पर ज़ोर दे रहा है।

चौड़ी सड़कों से सैन्यबलों, हथियारों और विशेष रक्षा उपकरणों को भारत-चीन सीमा के महत्त्वपूर्ण बिंदुओं को शीघ्रता से ले जाया जा सकेगा। केंद्र ने बताया कि जोशीमठ से मना और ऋषिकेश से गंगोत्री तक की सड़कें भारत-चीन सीमा पर स्थित रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए सहायक हैं और इसलिए उन्हें बीआरओ के 2018-19 से 2022-23 की दीर्घ अवधि कार्य योजना में जोड़ा गया है।

इन सड़कों को रक्षा मंत्रालय की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय राजमार्ग डबल लेन विशेषताओं के अनुसार तैयार किया जाएगा। केंद्र ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 7 मीटर चौड़ी दो लेन की सड़क आवश्यक है। हालाँकि 8 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार सीमा क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कें 5.5 मीटर से अधिक चौड़ी नहीं हो सकतीं। इस आदेश का रक्षा और सुरक्षा हितों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।

रुद्रप्रयाग और जोशीमठ से गुज़रकर ऋषिकेश से नियापानी या थाग ला पास जाने वाली पूरी सड़क और टनकपुर से भारत-चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख पास तक जाने वाली सड़क का चौड़ा होना अति आवश्यक है ताकि सैन्यबलों, हथियारों, तोपों और भारी उपकरणों को लेकर जाने वाले सेना के ट्रक दोनों दिशाओं में चल सकें।

चौड़ी सड़क के कारण अबाधित सैन्य आवागमन

केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय से आदेश में परिवर्तन करने के लिए कहा है क्योंकि संकीर्ण सड़क के कारण दूसरी दिशा से आने वाले वाहनों, कई बार सैन्य वाहनों को भी रोककर रखना पड़ सकता है, यहाँ तक कि एक सैन्य काफिले को पास करवाने के लिए 6 घंटे की प्रतीक्षा भी करनी पड़ सकती है।

“शीघ्र आवागमन करने के लिए सड़क का चौड़ा होना आवश्यक है ताकि सड़क से उतरे बिना दो वाहन एक-दूसरे को पार कर सकें।”, रक्षा मंत्रालय द्वारा लिखे आवेदन में कहा गया। परिस्थितियों को समझाते हुए केंद्र ने शीर्ष न्यायालय से कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मॉर्थ) द्वारा जारी 5 अक्टूबर 2012 और 23 मार्च 2018 के परिपत्रों में उन सड़कों का उल्लेख नहीं है जो सैन्य दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

देश की रक्षा के लिए सैनिकों, हथियारों, तोपों और टैकों को सीमा तक लाने-ले जाने वाली सड़कों का उल्लेख मॉर्थ के परिपत्र में इसलिए नहीं है क्योंकि ये विशेष परिस्थितियों के लिए है और इसलिए इन्हें सामान्य नियमों के दायरे में नहीं लाना चाहिए, रक्षा मंत्रालय ने न्यायालय को तर्क दिया।

आवेदन में यह भी कहा गया कि 8 सितंबर के आदेश से पहले ही इन सहायक सड़कों को उन्नत और चौड़ा करके दो लेन का करने का काम चल रहा था। 12 मीटर की कटाई का काम भी चालू था जिससे सड़क को 7 मीटर चौड़ा बनाया जा सके।

2 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने इसके द्वारा गठित हाई पावर्ड कमिटी (एचपीसी) को रक्षा मंत्रालय के आवेदन पर विचार करने को कहा। केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले महाअधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा था कि 2018 के परिपत्र की दृष्टि से इन सड़कों को देखना एचपीसी की संकीर्णता है। न्यायालय ने एचपीसी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है जिसपर रक्षा मंत्रालय और मॉर्थ अपनी टिप्पणी कर सकें।