रक्षा
आकार बदलने वाला ड्रोन बनाया शोधकर्ताओं ने, जानें क्या कर सकेगा यह ‘इलास्टीकॉप्टर’

हैदराबाद स्थित अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आई टी) में शोधकर्ताओं ने एक लचीले ड्रोन की एक व्यावहारिक प्रतिकृति बनाई है जो उठाए जाने वाले पैकेज के आकार के अनुरूप अपना आकार बदल सकता है।

रोबॉटिक्स शोध केंद्र (आरआरसी) के एक शोधकर्ता सूरज बोनागिरी ने आकार बदलने वाले क्वाडकॉप्टर की क्रियाविधि पर शोध करते हुए पाया कि वर्तमान के डिलिवरी ड्रोन की क्या सीमाएँ हैं और उन्हें दूर करते हुए एक नया डिज़ाइन प्रस्तावित किया।

“इस प्रकार के ड्रोन के वर्तमान डिज़ाइन केवल पार्सल के वजन पर ध्यान देते हैं और उनके आकार को अनदेखा कर देते हैं। लेकिन वास्तविकता में अलग-अलग आकार के पैकेज होते हैं और डिज़ाइन में इस कारक को लेना महत्त्वपूर्ण है।”, 24 वर्षीय रोबॉटिक्स शोधकर्ता ने बताया।

उनके अनुसार भले ही ड्रोन किसी निर्धारित वजन के लिए तैयार किया गया हो लेकिन उसमें ज़बरदस्ती किसी आकार के पेलोड को भरना और उसे उठाना ड्रोन की उड़ान को अस्थिर करेगा, कुशलता में गिरावट होगी और सुरक्षा के साथ भी समझौता हो सकता है।

अन्य सख्त ड्रोन से अलग सूरज का ड्रोन, जो अभी पेटेंट की प्रतीक्षा में है, एक गतिशील ड्रोन है जिसे वे ‘इलास्टीकॉप्टर’ कहते हैं। इसकी आधार संरचना लचीली है और एक नई क्रियाविधि है जो बढ़ती और सिकुड़ती है। यह ग्रिप बनाकर उठाएजाने वाले पार्सल के आकार अनुसार अपना आकार बदल लेती है।

इस तरह से जिस भार को ड्रोन पर लादा जाता है, उसका भार हमेशा मध्य में केंद्रित होता है जिसके कारण बैटरी ऊर्जा लंबे समय तक प्रदर्शन कर पाती है। प्रोपेलर (उड़ान भरने में सहायक पंखे) की अद्भुत स्थिति से स्थिरता के मामले में भी यह ड्रोन अच्छा प्रदर्शन करता है।

सूरज समझाते हैं कि कैसे प्रोपेलर द्वारा बनाया गया हवा का दबाव पेलोड पर पड़ता है जिससे उड़ान के मध्य में ड्रोन अस्थिरता का सामना करता है। जबकि उनके डिज़ाइन में प्रोपेलर का दबाव शून्य हस्तक्षेप करता है, चाहे पेलोड कोई भी आकार का क्यों न हो।

प्राध्यापकों स्पंदन रॉय और माधव कृष्ण के मार्गदर्शन में सूरज ने यह डिज़ाइन बनाया है और कई पैमानों पर वर्तमान ड्रोनों की अपने इलास्टीकॉप्टर से तुलना करके वे दिखा रहे हैं कि यह कैसे बेहतर है।

“हमने पाया कि वर्तमान ड्रोन यदि अलग-अलग आकार के पैकेज उठा भी पाए, तो भी उसका बैटरी काल और उड़ान अवधि कम रहती है क्योंकि यह सही तरीके से नहीं किया जाता। यह तब प्रत्यक्ष हो जाता है जब बड़ी मात्रा में डिलिवरी करनी हो।”, वे कहते हैं।

ड्रोन पर शोध का काम सूरज ने पहले आरआरसी में इंटर्न के रूप में शुरू किया और फिर वहाँ एमएस के छात्र बन गए क्योंकि उन्हें संस्थान पसंद आ गया। वे स्टार्ट-अप करना चाहते हैं जिसमें संस्थान से सहयोग की उन्हें अपेक्षा है।

“परिसर में न सिर्फ इन्क्यूबेटर हैं बल्कि प्रोडक्ट लैब्स के माध्यम से यहाँ शोध का वाणिज्यीकरण भी होता है। प्राध्यापकों से सही सलाह और शोध एवं उपकरणों तक पहुँच से मैंने अपनी थीसिस को एक उद्यम का रूप देने का सोचा है।”, सूरज कहते हैं।

अपने छात्र की निष्ठा की पुष्टि करते हुए प्राध्यापक कृष्ण कहते हैं, “वह एक असाधारण और दुर्लभ छात्र है जो उड़ने वाले वाहनों में एक नई क्रियाविधि का नवोन्मेष करना चाहता है।”

सूरज

एक उत्पाद का सृजन

प्रोडक्ट लैब्स ने सूरज को तकनीकी उत्पाद उद्यमिता पाठ्यक्रम से जुड़ने की सलाह दी। “शोध को बाज़ार तक ले जाना सरल नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र अपनी शोध से उत्पाद बनाएँ और स्टार्ट-अपों का नेतृत्व करें। गहन शोध देखकर आनंद की अनुभूति होती है।”, प्रोडक्ट लैब्स के प्रमुख प्रकाश ने कहा।

सूरज ने मेकर्स लैब का भरपूर लाभ उठाया और अब प्रोडक्ट लैब्स में काम कर रहा है। शुरुआती प्रतिकृति को संस्थान की ओर उत्पाद के रूप में बनाने के लिए 8 लाख रुपये का अनुदान मिला है। उच्च गुणवत्ता की सामग्रियों का उपयोग करके दूसरी प्रतिकृति बनाने पर काम जारी है।

अपेक्षा है कि व्यावसायिक मॉडल अगले वर्ष तक सार्वजनिक हो जाएगा। “इस ड्रोन डिज़ाइन का उपयोग मुख्य रूप से सामान डिलिवरी के लिए किया जाएगा।”, प्राध्यापक रमेश लोगनाथन कहते हैं। उनके अनुसार यह उत्पाद गोदामों और ई-कॉमर्स आपूर्ति शृंखला में काम आएगा।

इलास्टीकॉप्टर को रखने के लिए न्यूनतम जगह की आवश्यका होती है। पार्सल को जोड़ने और अलग करने के समय में यह दूसरे ड्रोन को पछाड़ देता है। शोधकर्ताओं को अपेक्षा है कि इसकी प्रासंगिकता और उपयोग सैन्य जैसे अन्य क्षेत्रों में भी हो सकता है।

“मैं इसे एक बहु-उपयोगी ड्रोन मानता हूँ। ऊर्वरकों और कीटनाशकों का हवाई छिड़काव, कोविड-19 वैक्सीन या लॉकडाउन जानकारी के लिए मेगाफोन, आदि इसके उपयोग हो सकते हैं। संभावनाओं का आकाश अनंत है।”, सूरज ने कहा।