रक्षा
कैसे सेना के लिए सहायक सिद्ध होगा भारत का सबसे लंबा सड़क-रेल पुल

चीनी पीपल्स लिब्रेशन आर्मी की चढ़ाई झेलने वाले अरुणाचल प्रदेश के इलाकों- तुतिंग, मेचुका तथा तक्सिंग में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए बदलाव का क्षण तब आया जब कल (25 दिसंबर) को प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे बड़े रेल-सड़क पुल का उद्घाटन किया।

यह 4.9 किलोमीटर पुल ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर निर्मित किया गया है। गौरतलब है कि असम में 800 किलोमीटर के मार्ग में कुछ जगहों पर ब्रह्मपुत्र 8 किलोमीटर तक चौड़ी है।

वर्ष 1985 में असम सहमति के अंतर्गत इस पुल के निर्माण का प्रावधान था। इसे वर्ष 1997 में मंज़ूरी दी गई थी तथा उसी वर्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने इसकी नींव रखी थी। लेकिन वर्ष 2002 तक इसका निर्माण कार्य आरंभ नहीं हो सका तथा उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार ने सभी ऐतिहासिक बाधाओं को मिटाकर इसके निर्माण को आरंभ किया।

लगभग 12 वर्ष बाद पुन: जब एनडीए की सरकार बनी तब तक 42 में से केवल 15 सेतुबंध निर्माणाधीन थे तथा शेष का कार्य आरंभ होना भी बाकी था। साढ़े चार सालों में कार्य तेज़ गति से हुआ और अब यातायात के लिए इसे खोल दिया गया है।

यह पुल भले ही देरी से बना हो किंतु यह अभियांत्रिकी का एक करिश्मा है। इस दो मंज़िला पुल में ऊपरी मंज़िल पर तीन लेन की सड़क और नीचे की मंजिल पर दो रेल लाइनें निर्मित की गई हैं। ये पटरियाँ 33 मीटर की दूरी पर रखे कुल 125 गर्डरों पर बनाई गई हैं। इसके निर्माण में यूरोपियन मानकों को आधार बनाया गया है।

यह पुल 60 टन का भार सहन करने में सक्षम है तथा इसी कारण यह भारी उपकरण जैसे बीएमपी-द्वितीय सैन्य वाहन और मुख्य रूसी युद्ध टैंक- टी-72 तथा टी-90 के आवागमन के लिए उपयुक्त है।

यह दो राष्ट्रीय राजमार्गों- उत्तरी किनारे पर धेमाजी में एनएच 52 तथा दक्षिणी किनारे पर डिब्रुगढ़ में एनएच-37 को जोड़ेगा। डिब्रुगढ़ भरतीय आर्मी के पर्वतीय खंड का मुख्यालय है। उल्लेखनीय है कि सेना के 12 पर्वतीय खंडों में से नौ खंड असम सहित पूर्वी क्षेत्र में तैनात हैं। युद्ध के समय में यह चौथा बोगीबील पुल सेना के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

इसके पहले अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने के लिए केवल तीन पुलों पर रेल तथा सड़क मार्ग निर्मित थे। यह तीनों असम के बोंगाईगांव जिले में जोगीघोपा, गुवाहाटी के समीप सराईघाट तथा सोनितपुर और नागांव के बीच कोलिया-भोमोरा पुल हैं।

इस पुल से भारतीय सेना को अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग, मेचुका और तुतिंग सहित अन्य आक्रमण संभावित क्षेत्रों में शांति के समय भी सैनिकों तथा उपकरणों को ले जाने में सुलभता होगी।

प्रखर स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @prakhar4991 के माध्यम से ट्वीट करते हैं।