रक्षा
चीनी सर्वेक्षण जहाज़ भारतीय महासागर में कर क्या रहे हैं

इस वर्ष जनवरी में दो चीनी सर्वेक्षण पोत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण में भारतीय महासागर में पाए गए थे। इन चीनी जहाज़ों ने भारतीय महासागर के तल में ज्वालामुखी के कारण बनी उत्तर-दक्षिण दिशा की रेखाकार संरचना नाइन्टी ईस्ट रिज (संकरा ऊँचा भाग) के आसपास बड़े क्षेत्र का सर्वेक्षण किया।

लगता है इनमें से एक सर्वेक्षण पोत तो मलक्का जलडमरूमध्य से गुज़रकर भारतीय महासागर में आया होगा, वहीं दूसरा इंडोनेशियाई द्वीप जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा जलडमरूमध्य से आया होगा।

यह पहली बार नहीं है जब कोई चीनी सर्वेक्षण जहाज़ अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के निकट आया हो। सितंबर 2019 में भारत ने द्वीपों के आसपास अपने अनन्य आर्थिक क्षेत्र में एक चीनी शोधी पोत को पाया था और उसे बाहर निकाला था।

शी यान 1 के नाम से जाना जाने वाला यह चीनी सर्वेक्षण जहाज़ पोर्ट ब्लेयर के पश्चिम में भारतीय पानी में मिला था और भारतीय प्राधिकरणों की ओर से इसे कोई अनुमति भी नहीं थी। हालाँकि अंतर्राष्ट्रीय पानी में समुद्री वैज्ञानिक शोध करने की कोई मनाही नहीं है।

लेकिन कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेन्शन के अनुसार दूसरे देश के अनन्य आर्थिक क्षेत्र या महाद्वीपीय ताक पर समुद्री वैज्ञानिक शोध करने के लिए कम से कम छह माह पूर्व अनुमति लेनी होती है।

पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना (प्लैन) भारतीय महासागर में अपने पाँव पसार रही है और चीनी शोधी पोत क्षेत्र में कई बार देखे जा सकते हैं। महासागर के विस्तार का सर्वेक्षण करने वाले ये जहाज़ साल में कई बार चक्कर लगाते हैं।

ज़ियांग यांग हॉन्ग 03 का मार्ग

उदाहरण स्वरूप ज़ियांग यांग हॉन्ग 03 नामक सर्वेक्षण पोत जो मार्च 2016 में स्टेट ओशियनिक प्रशासन के बेड़े से जुड़ा था। पिछले कुछ वर्षों में उसने इस क्षेत्र में काफी चक्कर काटे हैं और नवंबर 2019 में सुंडा जलडमरूमध्य से भारतीय महासागर में घुस आया था।

उसके बाद इसने इंडोनेशिया के पश्चिम और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के निकट बंगाल की खाड़ी में सर्वेक्षण किया। नवंबर में यह अफ्रीकी तट के पूर्व में स्थित एक बड़े क्षेत्र का सर्वेक्षण करते हुए पश्चिमी भारतीय महासागर में पाया गया था।

एशिया मैरिटाइम ट्रान्सपैरेन्सी इनिशिएटिव के एक अध्ययन में सरकार के वैधानिक क्षेत्र से बाहर जाने वाले राज्य के स्वामित्व वाले या राज्य द्वारा संचालित सर्वेक्षण पोतों को अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक ट्रैक किया गया था।

इसमें पाया गया कि “काफी बड़े अंतर से सरकारी शोध पोतों का सबसे बड़ा बेड़ा” इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन द्वारा संचालित है। भारतीय महासाहर में चीन अंडरवॉटर ड्रोन भी तैनात कर रहा है। पिछले दो वर्षों में भारतीय और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले संकरे बिंदुओं के निकट चीन के कई अंडरवॉटर ड्रोन मिले हैं।

फरवरी 2019 में इंडोनेशिया के उत्तरी क्षेत्र में स्थित बांगका द्वीप के उत्तरी छोर के निकट एक चीनी अंडरवॉटर ड्रोन मिला था। उसी वर्ष मार्च में ‘सी विंग’ नामक एक और चीनी अंडरवाटर ड्रोन इंडोनेशिया के मछुआरे को रियाउ द्वीप के निकट मिला था जिसपर चीनी अक्षरों में ‘चाइना शेनयांग इंस्टीट्यूट ऑफ़ ऑटोमेशन’ लिखा था।

इंडोनेशिया के समुद्री क्षेत्र में दिसंबर 2020 में प्लैन का एक और अंडरवाटर डॉन सेलयार द्वीप के निकट मिला था। अपने सर्वेक्षण जहाज़ ज़ियान्ग यान्ग हॉन्ग 06 की सहायता से चीन ने 2019 में कम से कम 12 सी विंग अंडरवॉटर ड्रोन भारतीय महासागर में तैनात किए थे।

“एक निर्धारित समुद्री क्षेत्र में 12 अंडरवॉटर ग्लाइडरो ने एक सहयोगी अवलोकन किया है। कुल मिलाकर उन्होंने 12,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और 3,400 से अधिक प्रोफाइलिंग अवलोकन किए, भारी मात्रा का हाइड्रोलॉजिकल डाटा प्राप्त किया…”, मार्च 2020 में चीनी विज्ञान अकादमी ने कहा।

हाईयी के नाम से जाने जाने वाली चीन के टॉर्पीडो आकृति वाले अंरवॉटर ड्रोन को ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती। बैटरी ऊर्जा के स्थान पर वे पानी में चलने के लिए परिवर्तनशील लहरों से ऊर्जा लेते हैं। पहले सही गहराई तक डूबने और फिर ऊपर उठने से ड्रोन आगे की ओर बढ़ते हैं।

ड्रोन के अंदर दबाव में तेल से भरा एक गुब्बारा-नुमा उपकरण होता है जिसके फूलने और पिचकने से ड्रोन आगे बढ़ते हैं। अंडरवॉटर ड्रोन व सर्वेक्षण पोतों की सहायता से प्लैन समुद्री डाटा प्राप्त करता है जो इसके अंडरवॉटर मंचों के परिचालन के लिए आवश्यक है।

ये मंच समुद्री तल की रूपरेखा, पानी के खारापन, टर्बिडिटी, क्लोरोफ़िल और ऑक्सीजन स्तर जैसे डाटा इकट्ठा करते हैं। इस प्रकार के डाटा न सिर्फ विदेशी पनडुब्बी गतिविधियों को पहचानने और ट्रैक करने में चीन की सहायता कर सकते हैं बल्कि चीनी पनडुब्बियों के मार्ग निर्धारण में भी सहयोग करेंगे।

सबसे हाल में जहाँ चीनी शोधी पोत मिला, वह सुंडा और लॉम्बोक जलमरूडमध्यों के संकरे भाग के निकट है जिसका उपयोग चीनी जहाज़ और पनडुब्बियाँ भारतीय महासागर में घुसने के लिए करते हैं। इस क्षेत्र में पानी गहरा नहीं है जिससे पनडुब्बियाँ आसानी से पकड़ आ सकती हैं।

इसलिए संभावना है कि जनवरी में यहाँ मिले चीनी शोधी पोत प्लैन के पनडुब्बी परिचालन की सहायता के लिए डाटा एकत्रित कर रहे हों। पिछले कुछ वर्षों में, विशेशकर 2019 से चीनी पोत नाइन्टी ईस्ट रिज और इसके आसपास के क्षेत्र का गहन अध्ययन कर रहे हैं।

ये पोत “लॉनमोवर पैटर्न” में चल रहे हैं जिसका अर्थ हुआ कि वे समुद्री तल का बैथिमेट्रिक सर्वेक्षण कर मानचित्र बनाना चाहते हैं। 2019 से 2021 के बीच चार चीनी पोतों ने इस क्षेत्र का विस्तार से सर्वेक्षम किया है जैसा कि आप उपरोक्त मानचित्र से समझ सकते हैं।