रक्षा
‘छंब के फाल्कन्स’ को मिलेगा रफाल, हाशिमारा एयर बेस पर पुनर्जीवित होगा 101 स्क्वाड्रन

भारतीय वायुसेना (आईएएफ) का स्क्वाड्रन नंबर 101 इस माह पश्चिम बंगाल के हाशिमारा वायुसेना स्टेशन पर पुनर्जीवित होने के लिए तैयार है। इसका क्रम अंकित होने के लगभग एक दशक बाद, इन लड़ाकू विमानों (फाल्कन) को इस माह आने वाले चार रफाल विमानों के साथ पुनर्जीवित किया जाएगा।

1949 में दिल्ली के पालम वायुसेना स्टेशन पर एक स्क्वाड्रन बनाया गया था जिसका उद्देश्य था फोटो के माध्यम से सैन्य परीक्षण करना। इसे हारवर्ड्स और स्पिटफायर्स से भी लैस किया गया था। 1957 में इस स्क्वाड्रन को ब्रिटिश मूल का वैम्पायर विमान मिला।

उसके बाद इस स्क्वाड्रन को कश्मीर घाटी में आदमपुर वायुसेना स्टेशन पर स्थानांतरित कर दिया गया। एक दशक बाद जुलाई 1968 में सुपरसोनिक श्रेणी में इस स्क्वाड्रन ने प्रवेश किया जब सोवियत संघ से खरीदे गए सु-7एस इसे प्राप्त हुए।

1971 में आदमपुर बेस पर रहते हुए ही भारतीय वायुसेना के 101 स्क्वाड्रन ने पश्चिमी सेक्टर में चल रहे 1971 के युद्ध में भाग लिया जहाँ इसने हवाई सहायता मिशन एवं उड़ते हुए भूमि पर हमले किए। इस युद्ध के दौरान सु-7 लड़ाकू विमानों ने कुल 210 उड़ानें भरीं।

इस स्क्वाड्रन ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में निशाना दागकर उनके हथियारों के ढेर और आपूर्ति ट्रेनों को ध्वस्त किया। छंब-अखनूर सेक्टर की रक्षा में इस स्क्वाड्रन ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जहाँ पाकिस्तान ने कश्मीर से भारतीय सेना की पहुँच को काटने के लिए एक पूर्ण हथियारबंद और पैदल सैनिकों द्वारा हमला करवाया था।

आदमपुर एयरबेस से उड़ान भरते हुए सुखोई सु-7 फाइटरों ने छंब में पूरे घनत्व के साथ स्थित पाकिस्तानी हथियारों और सैनिकों पर भारी बमबारी तथा हवाई हमले किए। भारी विमान-घातक बारूद और छोटे हथियारों के वातावरण के बीच स्क्वाड्रन के पायलट पाकिस्तानी सैनिकों और टैंकों के ऊपर से गुज़रे व उनपर हमला किया।

1971 के युद्ध के दौरान सु-7

जब-जब भूमि से भारी गोलाबारी की जाती, तब-तब वे वापस लौट आते। ग्रुप कैप्टन हरजिंदर कुमार बजाज (सेवानिवृत्त), जो 1971 में उधमपुर पर तैनात फॉरवर्ड एयर कंट्रोलर की तरह काम करने वाले युवा पायलट अधिकारी थे, बताते हैं कि

छंब में फाल्कनों ने “69 टैंक, 20 भारी तोपों और 57 वाहनों” को ध्वस्त किया जिससे पाकिस्तान का हथियारबंद हमला थम गया।

इस युद्ध में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद ही भारतीय वायुसेना के नंबर 101 स्क्वाड्रन को ‘छंब के फाल्कन्स’ कहा जाने लगा। इस स्क्वाड्रन को  अन्य सम्मानों के साथ 1971 युद्ध में अपनी सेवा देने के लिए एक महावीर चक्र, एक अति विशिष्ट सेवा मेडल,आठ वीर चक्र, एक विशिष्ट सेवा मेडल और छह वायु सेना मेडलों से सम्मानित किया गया था।

इस स्क्वाड्रन के एक पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेन्ट जगदीश भट्टाचार्य को मिशन के दौरान भूमि से आने वाला एक गोला लग गया और वे पाकिस्तानी भूभाग पर गिर गए। पाकिस्तान ने भट्टाचार्य को पकड़ने के लिए सैनिक भेजे। उनकी रीढ़ की हड्डी चोटिल हो गई थी लेकिन वे दुश्मनों के चंगुल से भागने में सफल हुए।

उन्हें वीरता के लिए वायुसेना मेडल से सम्मानित किया गया। 1971 युद्ध के प्रारंभिक सप्ताहों में छंब-जौरियन सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों और उनकी टैंक घेराबंदी पर निशाना साधने वाले कम से कम 14 मिशनों का नेतृत्व करने वाले स्क्वाड्रन लीडर माधवेंद्र बनर्जी को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

1971 युद्ध में मिला सम्मान

“इन मिशनों के दौरान स्क्वाड्रन लीडर बनर्जी ने दो शत्रु टैंकों और दो तोपों को ध्वस्त किया। इन घटनाओं के दौरान भारी गोलाबारी के बीच शत्रुओं पर हमला करके हमारे अपने सैनिकों को राहत प्रदान करने में स्क्वाड्रन लीडर बनर्जी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी रहे।”, महावीर चक्र मिलने पर उद्धरण दिया गया था।

बनर्जी 1990 में भारतीय वायुसेना से एयर वाइस मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए। 1971 के युद्ध में 101 स्क्वाड्रन द्वारा भरी गई 75 प्रतिशत उड़ानें छंब सेक्टर में थी और इनमें से अधिकांश का नेतृत्व बनर्जी ने किया था।

“फाल्कन (101) स्क्वाड्रन के सुखोई और लाइटनिंग (20) स्क्वाड्र्न के हंटर जिनमें 500 किलोग्राम यानी 1,000 पाउंडर के बम, 64×57 मिमी रॉकेट/68 मिमी एसएनईबी रॉकेट पॉड जिसमें हर पॉड में 19 रॉकेट थे और 30 मिमी की बंदूकों के साथ भारतीय वायुसेना ने भारी विध्वंस मचाया।”

“इससे न सिर्फ शत्रु के वार को कुंद किया गया बल्कि मनवर तवी के पूर्व से शत्रु को लौटने के लिए विवश भी कर दिया गया।”, युद्ध के संस्मरण के रूप में ग्रुप कैप्टन बजाज ने लिखा। 1981 में स्क्वाड्रन को मिग-21 से लैस किया गया और हरियाणा के सिरसा वायुसेना स्टेशन पर स्थानांतरित कर दिया गया।

दो दशक बाद 2002 में स्क्वाड्रन को आदमपुर वायुसेना स्टेशन पर वापस लाया गया जहाँ यह 2011 तक रहा। इस समय स्क्वाड्रन के सोवियत काल के मिग-21 सेवानिवृत्त हो गए और इसका क्रम अंकित किया गया। क्रम अंकित होने से पूर्व लगभग पाँच दशकों तक यह स्क्वाड्रन पश्चिमी एयर कमांड को अपनी सेवाएँ देता रहा।

अब यह स्क्वाड्रन शिलॉन्ग में मुख्यालय वाले पूर्वी एयर कमांड को अपनी सेवाएँ देना आरंभ करेगा जहाँ पीपल्स लिबरेशन आर्मी की वायुसेना के खतरे से यह निपटेगा जो तिब्बत में अपनी उपस्थिति बढ़ाती जा रही है।