रक्षा
सी295 विमानों का सौदा भारतीय वायुसेना और रक्षा उद्योग के लिए कैसे होगा लाभकारी

भारतीय वायुसेना के लिए 56 सी295 परिवहन विमान खरीदने के लिए अगले कुछ महीनों में रक्षा मंत्रालय एयरबस के साथ 2.5 अरब डॉलर का सौदा करेगा।

दोहरे टर्बोप्रॉप वाले इस परिवहन विमान की खरीद लंबे समय से अटकी हुई है जिसके हो जाने से न सिर्फ बड़ी यूरोपीय एयरोस्पेस कंपनी एयरबस को राहत मिलेगी, जिसके पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई लाभदायक रक्षा अनबुंध अभियान विफल हुए हैं, बल्कि भारतीय वायुसेना और घरेलू रक्षा उद्योग को भी लाभ मिलेगा।

रक्षा के क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी का कहना है, “देश में विमान-निर्माण के आधार-ढाँचे का विस्तार करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारत को जल्द से जल्द अपने यात्री विमान का विकास करना चाहिए।”

भारतीय वायुसेना के लिए सी295 एवरो एचएस-748 परिवहन विमान का स्थान लेंगे जो पुराने हो चुके हैं। इन पुराने विमानों ने पहली बार 1960 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायुसेना के साथ उड़ान भरी थी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा लाइसेंस के आधार पर उत्पादित ऐसे 50 विमान वर्तमान में सेवारत हैं।

“भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 60 रोल्स-रॉयस डार्ट इंजन वाले 60 एचएस 748एस सक्रिय हैं जो 35 से 58 वर्ष तक पुराने हैं।”, यात्रा उद्योग डाटा और विश्लेषण प्रदाता सिरिम का उद्धरण देते हुए उड्डयन समाचार वेबसाइट फ्लाइटगोल्बल ने 2019 में कहा था।

सी295 एक सामरिक परिवहन विमान है जिसमें 6 टन का भार उठाने की क्षमता है। एयरबस का दावा है कि यह पाँच कार्गो पट्टिकाएँ या 71 सैनिक या 50 पैराट्रूपर्स (वायु सैनिक) को उठा सकता है।

सी295 की भार क्षमता

यह विमान उड़ान भरने और लैंड करने के लिए छोटी, भारी परिवहन विमान का भार न उठा पाने वाली कम तैयार हवाई पट्टियों का उपयोग करने में सक्षम है। इस विशेषता के कारण यह भारत-चीन सीमा पर बने एडवान्स्ड लैंडिंग ग्राउन्ड्स का उपयोग कर सकते हैं।

पिछले कई महीनों से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध जारी है, ऐसे में भारत ने कई आपातकाल रक्षा क्रय किए हैं। आवश्यकता यह भी है कि रक्षा उपकरण भौगोलिक स्थिति के अनुकूल हों। जोशी ने इस अनुकूलता पर स्वराज्य को बताया, “सी295 छोटी हवाई पट्टी से संचालित किए जा सकते हैं। इस दृष्टि से ये पर्वतीय सीमा पर भी उपयोगी होंगे।”

एयरबस का दावा है कि सी295 670 मीटर की छोटी, 2 सीबीआर की क्षमता वाली नर्म और खुरदुरी कम तैयार हवाई पट्टी पर काम करने में सक्षम है। जिन 56 सी295 का ऑर्डर दिया जाएगा, उनमें से प्रथम 16 को एयरबस डिफेन्स एंड स्पेस की दक्षिणी स्पेन के सेविल में स्थित सुविधा पर बनाया जाएगा।

शेष 40 विमानों को भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस का संयुक्त उपक्रम बनाएगा जिमकी साझेदारी एक सौदे के तहत हुई है। एक भारतीय कंपनी का इस रक्षा सौदे से जुड़ा होना घरेलू एयरोस्पेस उद्योग के लिए बड़ी राहत की बात है, विशेषज्ञों का कहना है।

“यह (सी295 के लिए सौदा) पहली ऐसी घटना है जब किसी निजी कंपनी की भागीदारी होगी और यह हमारे रक्षा उद्योग को बल देगी।”, 2020 की समीक्षा बैठक में रक्षा मंत्रालय ने कहा।

सैन्य अधिकारियों से चर्चा करते
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

भारत में बनने वाले सी295 विमानों की संख्या भविष्य में बढ़ाई भी जा सकती है क्योंकि इंडिया कोस्ट गार्ड की योजना है कि इनका उपयोग बहु-मिशन उपयोगी समुद्री विमान के रूप में हो जिसके लिए छह विमानों की आवश्यकता का अनुमान है।

जोशी ने बताया, “रक्षा खरीद परिषद ने वायुसेना के लिए 56 विमानों की खरीद को 2015 में स्वीकृति दी थी। इसके बाद कोस्ट गार्ड के लिए छह अतिरिक्त विमानों की खरीद का आदेश 2016 में दिया गया।

यह भी हो सकता है कि निकट भविष्य में इस तट रक्षा बल की आवश्यकता बढ़कर 19 हो जाए और भारतीय वायुसेना वर्तमान में सेवारत एएन-32 परिवहन विमानों का स्थान भी सी295 को देना चाहें, तब इन विमानों की माँग और बढ़ जाएगी।

जोशी के अनुसार परिवहन और यात्री विमान के अलावा सी295 को अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, मिड-एयर रिफ्यूलिंग, समुद्री गश्त और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (पनडुब्बी-रोधी युद्ध) में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

एयरबस डिफेन्स एंड स्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डर्क होक ने फ्लाइटग्लोबल से कहा था कि अंततः हो सकता है कि भारत में सी295 की कम से कम आवश्यकता 150 हो जाए। एएन-32 के स्थान पर सी295 लाना समझदारी होगी क्योंकि वायुसेना के दस्ते में यह विमान सम्मिलित हो चुका होगा।

दूसरे प्रकार के विमानों को दस्ते से जोड़ना वायुसेना में विमानों की विविधता बढ़ाएगा जिससे किसी भी विमान का अतिरिक्त पुर्जा प्राप्त करना सरल हो जाएगा। वर्तमान में वायुसेना को आवश्यक वस्तुएँ प्राप्त करने में सबसे बड़ी चुनौती का सामना कम विविधता के कारण करना पड़ता है।

एएन-32 के स्थान पर सी295 को लाना आर्थिक दृष्टि से भी उपयुक्त है क्योंकि इससे अधिक उत्पादन की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा जो न सिर्फ विमान विनिर्माण में काम आएगी, बल्कि विमानों को भविष्य में उन्नत और बेहतर करने में भी सहायता करेगी।

“सी295 का एएन-32 का स्थान लेना नैसर्गिक होगा क्योंकि ये विमान चरणों में सेवा से बाहर हो जाएँगे।”, एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर (सेवानिवृत्त) ने हिंदुस्तान टाइम्स  को बताया था।