रक्षा
सीमा सड़कों पर चीनी आक्रमकता और कोविड-19 के बावजूद 2020 में तेज़ी से हुआ काम

पूर्वी लद्दाख में चीनी आक्रमकता, जिसके कारण चार दशकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पहली बार मौत हुई, और महामारी, जिसके कारण महत्त्वपूर्ण सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर का काम कुछ समय के लिए रुक गया था, के बावजूद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने जनवरी से नवंबर 2020 के बीच, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।

भारत की सीमाओं पर सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और रखरखाव के दायित्व का निर्वहन करने वाले बीआरओ ने 1,993 किलोमीटर कटाई का काम किया और लगभग 2,341 किलोमीटप लंबी सड़कें बिछाईं। 2,683 मीटर लंबाई के पुल बनाए गए, 2,508 किलोमीटर लंबी सड़कों का मरम्मत कार्य हुआ और इस काल में कुल 1,819 करोड़ रुपये का स्थाई काम पूरा हुआ।

रक्षा मंत्रालय की 2020 की समीक्षा बैठक में आए इन आँकड़ों के अनुसार इस संस्था ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। इसकी तुलना के लिए 2019 के आँकड़े देखें। बीआरओ ने 1,123 किलोमीटर कटाई, 2,099 किलोमीटर लंबी सड़क बिछाने, 2,557 मीटर लंबे पुल बनाने, 2,330 किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत का काम किया और जनवरी से नवंबर 2019 के बीच स्थाई काम पर 1,601 करोड़ रुपये खर्च हुए।

वहीं, वित्तीय वर्ष 2018-19 में संस्था ने 991 किलोमीटर कटाई, 1,965 किलोमीटर सड़क बिछाने, 2,817  मीटर पुल बनाने, 1,778 किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत का काम उत्तरी और पश्चिमि सीमाओं पर किया व स्थाई काम पर कुल 1,518 करोड़ रुपये खर्च हुए।

2020 में बीआरओ द्वारा किए गए काम का अधिकांश भाग भारत-चीन सीमा पर हुआ जहाँ पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने घुसपैठ का प्रयास किया था जिसके फलस्वरूप दोनों सेनाओं का कई बार आमना-सामना हुआ।

रोचक बात यह है कि बीआरओ द्वारा 2020 में पूरी की गई सभी रणनीतिक सड़कें अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पड़ती हैं- सभी भारत-चीन सीमा पर स्थित हैं।

बीआरओ द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 2020 में बनाया गया पुल

वर्षांत समीक्षा के अनुसार लद्दाख में बीआरओ ने इस अवधि में 77 किलोमीटर लंबी माहे-चुशुल सड़क का काम पूरा किया है। पैंगोंग सो झील के निकट स्थित वह स्थान चुशुल ही है जहाँ भारतीय सेना ने चीन से पहले कब्ज़ा करके सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण चोटियों को हथिया लिया था और वहाँ से पीएलए के शिविरों पर नज़र रखी जा रही है। ये चोटियाँ कैलाश पर्वत शृंखला की हैं जो कि चुशुल के पूर्व में है।

इस वर्ष अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जिन 44 पुलों का उद्घाटन किया था, उनमें से 30 एलएसी से लगे राज्यों में पड़ते हैं- आठ-आठ लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में, दो हिमाचल प्रदेश में और चार सिक्कीम में।

इस वर्ष दिसंबर के महीने में भी ट्रैफिक के लिए ज़ोजिला पास खोलकर चीन से गतिरोध के बीच बीआरओ ने संयोजकता बरकरार रखकर रिकॉर्ड बनाया है। एलएएसी पर सुरक्षा की चिंताजनक स्थिति और कोविड-19 महामारी के बीच अपेक्षा नहीं थी कि बीआरओ 2020 में अच्छा प्रदर्शन करेगा लेकिन यह पिछले कुछ वर्षों के ट्रेंड के अनुरूप ही है।

2018-19 में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में बीआरओ के काम में 12 प्रतिशत क वृद्धि देखने को मिली थी। 2019-20 में संस्था ने 2018-19 से 30 प्रतिशत अधिक काम करके दिखाया। हालाँकि बीआरओ को अच्छा प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों से ही देखने को मिला है।

2015 तक बीआरओ को अच्छे प्रदर्शन की बजाय देरी से जोड़कर देखा जाता था। 2015 से बहुत कुछ परिवर्तित हआ है। 2015 के पहले बीआरओ सड़क परिवहन मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के दोहरे नियंत्रण के अधीन काम करता था।

ऐसे में इसे कार्य रक्षा मंत्रालय सौंपता था लेकिन वित्त सड़क परिवहन मंत्रालय से मिलता था। दोहरे नियंत्रण के कारण बीआरओ का कार्य कुशल नहीं था। इसलिए 2015-16 में संगठन को पूर्ण रूप से रक्षा मंत्रालय के अधीन लाया गया।

कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर काम करने वाला बीआरओ का दल

2017 में डोकलाम गतिरोध के दौरान मोदी सरकार ने बीआरओ अधिकारियों को अधिक प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियाँ दीं जिससे निर्णय लेने में लगने वाल समय की बचत हो सके। उदाहरण स्वरूप, बीआरओ के मुख्य इंजीनियर की वित्तीय शक्ति 10 करोड़ रुपये से 10 गुना होकर 100 करोड़ रुपये कर दी गई।

इसी प्रकार सहायक महानिदेशक की शक्ति को 15 गुना करके 20 करोड़ से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया। देरी को कम करने के लिए 2017 में डोकलाम पर भारत-चीन गतिरोध के समाप्त होने के एक दिन बाद ही सरकार ने बीआरओ को अभियांत्रिकी खरीद निर्माण (ईपीसी) मोड पर काम करने की स्वीकृति दी।

रक्षा मंत्रालय की वर्षांत समीक्षा में कहा गया कि बीआरओ ने 42 सड़क भागों की पहचान की है जिसे ईपीसी मोड पर बाहरी संस्था से पूरा करवाया जाएगा। इन परिवर्तनोंके साथ ही पिछले कुछ वर्षों में बीआरओ का बजट भी काफी बढ़ाया गया है।

2008 से 2016 के बीच इसका बजट 3,300-4,600 करोड़ रुपये रहा लेकिन वित्तीय वर्ष 2019-20 में यह 8,050 करोड़ रुपये पहुँच गया। “सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में यह बजट 11,800 करोड़ रुपये रहेगा।”, रक्षा मंत्री ने जुलाई में कहा था।

“…पिछले दो वर्षों में आधुनिकतम तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों से बीआरओ ने 2,200 किलोमीटर कटाई, 4,200 किलोमीटर सड़क बिछाने और 5,800 मीटर लंबे स्थाई पुलों के निर्माण का काम किया है।”, राजनाथ सिंह ने कहा।