रक्षा
डोभाल की श्रीलंका यात्रा चीन को चुनौती देकर समुद्री सुरक्षा को कैसे करेगी सुनिश्चित

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल 27 और 28 नवंबर को श्रीलंका दौरे पर गए थे जिस दौरान कम से कम तीन चीज़ों पर उन्होंने काम पूरा किया है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति के मीडिया विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे और डोभाल के बीच हुई चर्चाएँ “काफी फलदायक” रहीं।

राजपक्षे और डोभाल की इस बात पर सहमति बन गई कि भारत की सहायता से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास परियोजनाएँ चलेंगी। यह बात महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि श्रीलंका के आर्थिक निर्णयों में चीन के हस्तक्षेप की बातें सामने आ रही थीं लेकिन डोभाल की यात्रा से भारत कुछ हद तक आश्वस्त हो सकता है।

द सिटिज़न  वेबसाइट के अनुसार डोभाल की कोलंबो यात्रा कोलंबो बंदरगाह पर पूर्वी कंटेनर टर्मिनल को साथ मिलकर विकसित और परिचालित करने में भारत, श्रीलंका और जापान की सहायता करेगी। पूर्वी कंटेनर टर्मिनल को लेकर योजनाओं की घोषणा अगस्त 2016 में ही श्रीलंकाई बंदरगाह मंत्री अर्जुन रानातुंगा ने की थी।

उस समय रानातुंगा ने कहा था कि भू-राजनीतिक कारणों से एक भारतीय कंपनी को कोलंबो बंदरगाद का एक टर्मिनल विकसित करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। तत्कालीन श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे भी भारत के साथ की योजनाओं के प्रति तत्पर थे।

रानिल विक्रमसिंघे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ

एक भारतीय कंपनी ने प्रस्ताव भी रखा था लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने निवेश को वापस ले लिया था यह कहकर कि बंदरगाहों जैसी राष्ट्रीय संपत्तियाँ विदेशी इकाइयों को नहीं सौंपी जा सकतीं। लेकिन पिछले वर्ष मई में भारत, श्रीलंका और जापान ने पूर्वी कंटेनर टर्मिनल के विकास और परिचालन हेतु सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किया जिसका सम्मान श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने रखा।

समझौते के अनुसार सभी कार्यों के लिए एक टर्मिनल परिचालन कंपनी गठित की जाएगी जिसमें 51 प्रतिशत भागीदारी श्रीलंका की होगी, 15 प्रतिशत भारत की और शेष भागीदारी अन्य संयुक्त उद्यम साझेदारों की। जापान की भूमिका होगी कि 0.1 प्रतिशत की ब्याज दर पर 40 वर्षों तक के ऋण के माध्यम से परियोजना को वित्तपोषित करे।

बीजिंग का समर्थन प्राप्त एक चीनी कंपनी कोलंबो बंदरगाह पर एक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल का परिचालन कर रही है और यह पूर्वी कंटेनर टर्मिनल के बगल में ही है।

चीनी कंपनी द्वारा वित्तपोषित कोलंबो पोर्ट सिटी परियोजना

भारत चाहता है कि कोलंबो बंदरगाह पर इसकी भी उपस्थिति हो क्योंकि इस बंदरगाह के तीन-चौथाई व्यापार में भारतीय कारगो का ही योगदान होता है। ऐसे में पूर्वी कंटेनर टर्मिनल का मामला सुलझाकर डोभाल ने भारत के लिए बड़ा काम किया है।

टर्मिनल में भारत की भागीदारी से श्रीलंका को चीन से बढ़े संबंधों को संतुलित करने का अवसर मिलेगा। भारत को श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में चीन की बढ़ती भूमिका को लेकर चिंता थी और यूएस ने भी इसपर भारत से कई बार चर्चा की थी।

पूर्वी कंटेनर टर्मिनल का मुद्दा 15 संयुक्त उद्यम परियोजनाओं में से एक है जो 2017 में भारत और श्रीलंका के हस्ताक्षर के बाद से लंबित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से भी परियोजनाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई थी।

डोभाल की यात्रा से दूसरा लाभ यह हुआ कि भारत, श्रीलंका और मालदीव्स कोलंबो में समुद्री सुरक्षा सचिवालय की स्थापना के लिए तैयार हो गए जिससे समुद्री सुरक्षा कार्यक्रमों का समन्वय हो सकेगा। भारतीय महासागर और दक्षिण एशिया की भूमि, विशेषकर पाकिस्तान जहाँ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा निर्माणाधीन है, में चीन की बढ़ती पैठ के संदर्भ में यह सचिवालय महत्त्वपूर्ण है।

तीनों देशों के बीच छह वर्षों के अंतराल के बाद त्रिपक्षीय वार्ता हुई जिसमें भारत की ओर से अजीत डोभाल, श्रीलंका के रक्षा सचिव मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) कमल गुनारत्ने और मालदीव की रक्षा मंत्री मारिया दीदी थीं।

समुद्री सुरक्षा पर त्रिपक्षीय समझौता

चीन श्रीलंका और मालदीव्स के माध्यम से समुद्री सिल्क मार्ग परियोजना को पूरा करना चाहता है। यह श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को पहले ही लंबे समय के लिए लीज़ पर ले चुका है लेकिन अब तीनों देशों ने निर्णय लिया है कि समन्वय को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यकारी समूहों की बैठक वर्ष में दो बार होगी।

त्रिपक्षीय बैठकों से समुद्री सुरक्षा पर साथ मिलकर काम करने के तहत समुद्री क्षेत्र के प्रति जागरूकता, कानूनी अधिकार, प्रशिक्षित खोज एवं बचाव, समुद्री प्रदूषण पर नियंत्रण, सूचना साझाकरण जैसे आदि काम भी होंगे। भारतीय उच्च आयोग ने दोनों देशों के बीच “बढ़ती सुरक्षा साझेदारी” की बात की।

तीसरा बड़ा काम जो डोभाल ने दौरे पर किया वह थी श्रीलंका की संसद में 10 सीट रखने वाली तमिल राष्ट्रीय गठबंधन के नेता आर संपंथन से भेंट। द हिंदू के अनुसार संपंथन ने श्रीलंका के विकास और उत्तरी एवं पूर्वी क्षेत्रों पर चर्चा की। संभवतः दोनों की चर्चा लंबे समय से अटके हुए तमिलों के मुद्दे या किसी प्रकार की संवैधानिक भरपाई पर हुई होगी।

इसके अलावा डोभाल ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति से यह भी कहा कि वे श्रीलंका में भारतीय निवेश लेकर आएँगे क्योंकि वर्तमान में कोलंबो ऋण से अधिक निवेश आकर्षित करने पर ध्यान दे रहा है। डोभाल ने व्यक्ति किया कि श्रीलंका के आर्थिक विकास में सहायक सिद्ध होने वाले नए क्षेत्रों में भी भारत निवेश के लिए तैयार है।

स्वराज्य के कार्यकारी संपादक एमआर सुब्रमणि  @mrsubramani के माध्यम से ट्वीट करते हैं।