रक्षा
भारत से समझौते के बाद चीन ने पूर्वी लद्दाख से दो दिन में हटाए 200 से अधिक युद्धक टैंक

भारत और चीन के बीच समझौते के बाद बुधवार (10 फरवरी) से ही दोनों देशों के सैनिकों ने पीछे हटना शुरू कर दिया। पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से तोपें भी पीछे हट रही हैं। पीपल्स लिब्रेशन आर्मी ने पैंगोंग त्सो के दक्षिण तट से 200 से अधिक युद्धक टैंकों को वापस कर लिया।

वहीं पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर रह रहे उसके सैनिकों को फिंगर 8 के पूर्व तक वापस ले जाने के लिए चीन ने 100 भारी वाहन तैनात किए थे। चीन की सेना वापसी की तेज़ी देखकर भारत आश्चर्यचकित है, हिंदुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट किया।

सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, “भारत और चीन के बीच समझौते के बाद बुधवार सुबह 9 बजे पैंगोंग त्सो पर सेना की वापसी शुरू हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर, अजीत डोभाल सहित शीर्ष मंत्रियों और अधिकारियों ने बीजिंग के समकक्षों के साथ कई दौर की वार्ता की, जिसके बाद समझौता हुआ। इसका परिणाम यह निकला कि भारत पूर्वी लद्दाख में अपनी स्थिति पर कायम रहा।”

मोदी सरकार में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “बुधवार से चीनी सेनाओं और टैंकों की वापसी की गति भी उनकी तैनाती की क्षमता को दर्शाती है। यह एक सैन्य कला है। भारतीय पक्ष ने भी अपनी सेना को पीछे किया लेकिन सबसे खराब स्थिति के लिए भी आकस्मिक योजनाएँ तैयार हैं।”

अधिकारियों के मुताबिक, चीनी सेना और भारतीय सेना शनिवार तक अपने सैनिकों को पीछे कर लेंगे और सहमत स्थिति से भी हट जाएँगे। समझौते में है कि सेना वापसी की कार्रवाई तीन दिनों में पूरी होगी। एक बार पैंगोंग त्सो से तोपखाने और सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब दोनों पक्ष पैंगोंग त्सो के उत्तर में गश्त बिंदु 15 (गोगरा) और 17 (हॉट स्प्रिंग्स) क्षेत्र में सेना वापसी पर बातचीत शुरू करेंगे।

राजनाथ सिंह ने गुरुवार को संसद में जानकारी दी थी कि चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तरी व दक्षिणी किनारों पर सेनाओं के पीछे हटने का समझौता हो गया है। दोनों पक्ष अग्रिम तैनाती चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से हटाएँगे।

पीछे हटने की प्रक्रिया का विवरण जानने के लिए पढ़ें