रक्षा
एयरो शो में दिखने वाले ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर और वॉरियर ड्रोन क्या हैं

भारतीय नौसेना के लिए वर्तमान और भावी एयरक्राफ्ट कैरियर के रूप में डिज़ाइन किए गए भारत के विकासशील ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर (टीईडीबीएफ) को बेंगलुरु में हुए एयरो इंडिया शो 2021 में प्रदर्शित किया गया। एयरो शो में इसकी जो विशेषताएँ दर्शाई गई थीं, उसके अनुसार इस 26 टन के अधितकतम टेक ऑफ वजन के लिए डिज़ाइन किया गया है।

खुले होने पर इस लड़ाकू विमान के पंख 11.7 मीटर लंबे हैं और बंद होने पर वे 7.6 मीटर के हो जाते हैं। टीईडीबीएफ एक मध्यम वजन वाला विमान है जिसकी लंबाई 16.3 मीटर के लगभग है। इसे आईएनएस विक्रमादित्य और भारत के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत (या आईएसी-1) के लिए डिज़ाइन किया गया है और संभवतः इसी वर्ष नौसेना को सौंप दिया जाएगा।

छोटा टेक ऑफ परंतु अवरुद्ध रिकवरी (स्टोबार) प्रणाली के लिए इस विमान को तैयार किया गया है जिसकी सहायता से आईएनएस विक्रमादित्य (या आईएसी-1) के डेक से इसका लॉन्च और रिकवरी हो सके। टीईडीबीएफ कार्यक्रम के परियोजना निदेशक विनोद कुमार ने पिछले माह एक साक्षात्कार में कहा था कि फाइटर कार्यक्रम पर काम सही मार्ग पर चल रहा है।

उन्होंने यह भी बताया था कि एयरोनॉटिकल विकास एजेंसी (एडीए) को नौसेना से इनपुट मिल गए थे जिसके आधार पर दो कन्फिगरेशन बनाए गए जो अधिकांश आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। टीईडीबीएफ का विकास ऐसे किया गया है कि वे रूसी मूल के मिग-29के का स्थान ले सकें।

कुमार ने कहा था कि “2020 की शुरुआत में ही अनौपचारिक रूप से” नौसेना ने एडीए को टीईडीबीएफ की आवश्यकताएँ बता दी थीं। औपचारिक रूप से परिचालन आवश्यकताएँ भारतीय नौसेना ने मई में बताईं जिसके बाद से एडीए ने टीईडीबीएफ के दो कन्फिगरेशन बनाए- “डेल्टा-कनार्ड और पूँछ के साथ ट्रेपेज़ॉइडल।”

“हमें इन कन्फिगरेशन पर विश्वास है। हम भारतीय नौसेना के पास जाएँगे जो इसके उपभोक्ता हैं और उनके विचार सुनेंगे कि कन्फिगरेशन को निश्चित करने के लिए आगे कैसे बढ़ा जाए तथा भारतीय नौसेना द्वारा जारी प्राथमिकि कर्मचारी गुणवत्ता आवश्यकता (पीएसक्यूआर) के अनुसार ढाला जाएगा।”, कुमार ने कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि डेल्टा-कनार्ड कन्फिगरेशन को शीघ्र ही कम गति वाले विंड टनल परीक्षणों से गुज़ारा जाएगा। “इस कन्फिगरेशन के लिए उन बातों पर ध्यान दिया गया है कि कैरियर उपयोगिता और प्रदर्शन के मामले में नौसेना की आवश्यकताओं पर खरा उतरे।”, कुमार ने कहा।

टीईडीबीएफ

एडीए ने दो इंजन वाले (अब टीईडीबीएफ) डिज़ाइन पर काम तब शुरू किया जब नौसेना ने स्पष्ट कर दिया कि एक इंजन वाले फाइटर में उसकी रुचि नहीं है। इससे एक इंजन वाले नौसैनिक हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के मार्क 2 संस्करण पर काम थम गया।

“एलसीए नेवी मार्क 2 के स्थान पर भारतीय नौसेना दो इंजन वाले डेक आधारिक फाइटर चाह रही है। एएमसीए डिज़ाइन से हमें विश्वास आया है, हमने दो इंजन के लिए योग्यता विकसित कर ली है।”, पहले अपने बयान में एडीए ने कहा था। हालाँकि उन्होंने एलसीए नेवी मार्क 2 को न छोड़ने की बात कही थी।

“नौसेना ने तय कर लिया है कि उन्हें एक इंजन वाला फाइटर नहीं चाहिए। इसलिए हमें पुनः कन्फिगर करना होगा। हमारे ऊपर यह निर्णय थोपा गया है। इसकी डिज़ाइन में हमें काफी परिश्रम करना होगा और इससे बचा जा सकता था यदि हम एक इंजन वाले एलसीए नेवी मार्क 2 के साथ आगे बढ़ते।”, एडीए के एक अधिकारी ने लाइवफिस्ट को कहा था।

कुमार ने कहा कि एलसीए को नौसेना के योग्य बनाने में जो अनुभव प्राप्त हुआ और जो तकनीक एडीए ने विकसित की, उसका उपयोग टीईडीबीएफ कार्यक्रम में हुआ है। पिछले वर्ष 12 जनवरी को एलसीए के नौसैनिक संस्करण ने पहली बार आईएनएस विक्रमादित्य से सफल स्की जम्प टेक ऑफ और अवरुद्ध लैन्डिंग की थी।

टीईडीबीएफ को बहुत सारे स्वदेशी सेन्सर और हथियारों से लैस किया जाएगा। एडीए के अनुसार लड़ाकू विमान पर घरेलू रूप से विकसित ‘उत्तम’ सक्रिय इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार का उन्नत संस्करण लगाया जाएगा जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास केंद्र (डीआरडीओ) के इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास अनुष्ठान ने विकसित किया था।

टीईडीबीएफ

इसके अलावा भारत की पहली वायु-से-वायु में मार करने वाली मिसाइल ‘अस्त्र’ (एस्ट्रा) के उन्नत संस्करण को भी टीईडीबीएफ में एकीकृत किया जाएगा। दिसंबर 2020 में नौसेना दिवस से पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने प्रेस से कहा था कि 2026 तक टीईडीबीएफ तैयार हो जाएगा।

“गुणवत्ता आवश्यकताएँ (क्यूआर) बनाई जा रही हैं। उनका कहना है कि वे 2026 तक इसे तैयार कर सकते हैं। यदि वे हमारी समय और गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करते हैं तो हम अवश्य ही ये लड़ाकू विमान उनसे लेंगे।”, नौसेना प्रमुख सिंह ने कहा था।

इसके अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकासशील कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (कैट्स) का एक भाग- भारत के नए ‘वॉरियर’ ड्रोन को भी एयरो इंडिया 2021 में प्रदर्शित किया गया। एचएएल का वॉरियर इस तरह से विकसित किया जा रहा है कि वह युद्ध में एलसीए तेजस और रफाल जैसे मानव लड़ाकू जेट के साथ एक विश्वसनीय विंगमैन ड्रोन की तरह जा सके और वायुसेना की कुशलता बढ़ाए।

सेन्सर पैकेजों से एकीकृत यह ड्रोन मानव फाइटरों की ताकत बढ़ाने का काम करेगा जो निगरानी, पूर्व-परीक्षण और पूर्व चेतावनी (अर्ली वॉर्निंग) मिशनों से मिशन में सहायता करेगा। एयरो इंडिया शो में कैट्स की कई प्रणालियों से एलसीए तेजस को लैस किया गया था जिसमें से 2019 में आए भारत के पहले सेमी-स्टील्थ ड्रोन भी एक था।

एयरो शो में प्रदर्शित

कैट्स मानव और अमानव मंचों का ऐसा समग्र मिश्रण है जिसमें भारी रक्षा घेरे में स्थित शत्रु वायुक्षेत्र में घुसने के लिए सभी मंच साथ मिलकर काम करते हैं। एयरो इंडिया 2021 में एलसीए प्रतिमूर्ति पर कैट्स के कुछ और भाग भी लगाए गए थे- कैट्स हन्टर के नाम से जानी जाने वाली क्रूज़ मिसाइल और कैट्स अल्फा-एस स्विचब्लेड स्वार्म ड्रोन।

भारत में मानव और अमानव मंचों को एक दल के रूप में विकसित करना अभी भी विकास के प्राथमिक चरणों  में है जिसे निजी खिलाड़ियों के साथ मिलकर एचएएल विकसित कर रहा है। कैट्स हन्टर पर काम चल रहा है जो 200 किलोमीटर तक की दूरी भेदने में सक्षम होगा और बेंगलुरु स्थित एक स्टार्ट-अप न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज़ अल्फा-एस पर काम कर रहा है।

2019 में पहली बार अल्फा-एस का अनावरण जैग्वार मैक्स के उन्नत पैकेज के भाग के रूप में किया गया था। यह एक स्वार्म ड्रोन प्रणाली है जो अनेक निशानों पर सान लगा सकता है। इस प्रणाली में ड्रोन एक कैरियर में होते हैं। कैरियर को फाइटर पर बांधा जाता है जो ड्रोन तैनात करने से पहले 100 किलोमीटर तक की यात्रा करने की क्षमता रखता है।

कैट्स के विभिन्न भाग

ये ड्रोन सतह से वायु में मार करने वाले स्थलों या ज़मीन पर तैनात विमानों जैसे शत्रु निशानों को साधने में सक्षम हैं। वॉरियर ड्रोन को भी एक निजी खिलाड़ी के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है। इन विंगमैन पर वायु-से-वायु या वायु-से-भूमि मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं।

वॉरियर ड्रोन में स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (एसएएडब्ल्यू) है जो कि डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित लंबी दूरी क्षमता वाला सटीक स्टैंड ऑफ युद्ध सामग्री है। कुछ रिपोर्ट का दावा है कि भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट को उन्नत करके अमानव यु्द्ध मंचों को संचालित करने के लिए तैयार किया जाएगा।

एलसीए तेजस को उन्नत करके कैट मैक्स बनाया गया है जो अनेक वॉरियर ड्रोन को संचालित कर सकता है और कैट्स के विभिन्न भागों को लेकर चल सकता है। अमानव मंचों के उपयोग से बल तो बढ़ेगा ही, साथी ही हवाई युद्ध के दौरान जान का खतरा भी टलेगा।

ऐसे कॉम्बैट टीमिंग सिस्टम यूएस, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम में भी विकसित किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में बोइंग एयरपावर टीमिंग सिस्टम पर काम कर रहा है जिसे वोइंग लॉयल विंगमैन परियोजना के नाम से जाना जाता है। यूएस में वाल्कायरी नामक विश्वसनीय विंगमैन विमान पर क्रैटोस ढिपेन्स एंड सेक्यॉरिटी सॉल्यूशन्स काम कर रहा है।