रक्षा
26/11 हमले के 10 साल- पुलिस ने दी अजमल कसाब की फाँसी से जुड़े ऑपरेशन की जानकारी

अजमल कसाब की फाँसी के लिए पुलिस की गोपनीय कार्यवाही पी टी आई  द्वारा रिपोर्ट की गई है।

इस कार्य में लिप्त दो पुलिस अफसरों का आखिरी कोड था ‘पार्सल रीच्ड फॉक्स’। इस ऑपरेशन में प्रयुक्त सात कोड शब्दों की जानकारी केवल गृहमंत्री आरआर पाटिल और चयनित शीर्ष अधिकारियों को थी। इस कोड का प्रयोग तब किया गया था जब कसाब को मुंबई से पुणे लाया गया था। उसे सेंट्रल मुंबई के आर्थुर कारावास के ‘अंडा कक्ष’ से पुणे के येरवडा सेंट्रल कारावास लाया गया था।

20 नवंबर 2012 की रात को जब कसाब को उसके सेल से बाहर लाया गया तब उसे बुरक़े से ढका गया था, एक अधिकारी ने बताया। उन्होंने जोड़ा कि कसाब की फाँसी से सप्ताह भर पहले ही उसके मृत्युदंड का अधिपत्र जारी किया गया था। अधिकारी ने बताया कि कसाब को पुणे ले जाना एक बड़ा कार्य था।

पुलिस का ‘फोर्स वन’ कमांडो दल कसाब के साथ वाहन में गया था। किसी भी संदेह से मुक्त रहने के लिए एक राज्य रिज़र्व पुलिस का वाहन आतंकवादी के वाहन के पीछे-पीछे चल रहा था। सभी पुलिस अधिकारियों के फोन बंद करके एक बैग में रखे गए थे, केवल दो पुलिसकर्मियों के फोन चालू थे।

पुलिस अधिकारी के अनुसार तीन घंटे के इस सफर में कसाब ने एक शब्द भी नहीं कहा। उसका यही व्यवहार तब भी था जब उसे येरवडा कारावास प्राधिकारियों को सौंपा गया।