अर्थव्यवस्था
डाटा-चालित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र कैसे बना रहा है भारत

व्यापार मॉडलों तथा परिचालन प्रक्रियाओं में डाटा-चालित डिजिटल विघटन वृद्धिशील रूप से भारतीय वित्तीय सेवाओं में नवोन्मेष का चालक बन रहा है। स्मार्टफोन का तेज़ी से बढ़ता विस्तार, सस्ता और उच्च गति का इंटरनेट एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स के मुख्यधारा में आने से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र चल पड़ा है जो ‘जेब में बैंक’ के उपभोक्ता-केंद्रित विचार का समर्थन करता है।

इस द्रुत परिवर्तन की कुंजी है सार्वजनिक नीति के माध्यम से समाज में वित्तीय समावेशन जिसके चलते ‘अनबैंक्ड जनसंख्या’ की बैंकों तथा ऋण तक पहुँच बनाई गई। इससे बैंक और वित्तीय-तकनीकी कंपनियों से सेवाओं तक, सभी उस ग्राहक तक पहुँच रहे हैं जिसे अभी तक योग्य नहीं माना जाता था।

डाटा-आधारित व्यापार मॉडल अब बैंकिंग एवं संपत्ति सेवाओं और आचरण-आधारित बीमा को अत्यधिक व्यक्ति-विशिष्ट बना रहे हैं। हालाँकि, इस तीव्र परिवर्तन के बीच आवश्यकता है एक मज़बूत संरचना की जो डाटा सुशासन, डाटा निजता और डाटा साझाकरण एवं उपयोग में अंतर्कार्यकारिता पर आधारित हो।

निजता, व्यापार मॉडल नवोन्मेष और उपभोक्ता लाभ के तीन स्तंभों के आधार पर एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करना जो डाटा का सही उपयोग करता हो, एक विकासशील प्रक्रिया है। इसके लिए सरकार, नियामकों, उद्योग संघों एवं बाज़ार इकाइयों के साझे प्रयास की आवश्यकता है जो सह-नवोन्मेष के लिए एक अनुकूल वातावरण विकसित करें।

इंडिया स्टैक

उपरोक्त संरचना सिद्धातों के आधार पर एक बहु-स्तरीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए भारत निरंतर प्रयास कर रहा है। डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं का इंडिया स्टैक एक चार स्तरीय सेट है जो वित्तीय समावेशन का दायरा बढ़ाने तथा सार्वजनिक सेवा व लाभ देने के लिए है।

डिजिटल इंडिया के ‘पावर टू एम्पावर’ (सशक्तिकरण के लिए शक्ति) सिद्धांत के तहत यह एक अद्भुत एवं ठोस प्रयास है जो सरकार, तकनीक एवं नियामक संरचनाओं के अभिसरण का साक्षी बना है। प्रेज़ेन्सलेस स्तर में अब देशव्यापी हो चुकी आधार तकनीक है जो किसी व्यक्ति की पहचान के सत्यापन के काम आती है।

नकारने वालों से आगे बढ़कर आधार अब डिजिटल बैंकिंग का मूल बन गया है। पेपरलेस सतह में अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) का इलेक्ट्रॉनिक ऐप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) है जो आधार के बायोमेट्रिक्स और अन्य जानकारियों का लाभ उठाकर ईसाइन व डिजिटल लॉकर जैसी सुविधा देता है।

यह सतह नए ग्राहकों को जोड़ने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटलीकृत एवं स्वचालित करती है जो पहले कागज़ों पर आधारित रहती थी। कैशलेस सतह में प्रमुख है यूनिफाइड पेमेन्ट्स इंटरफेस (यूपीआई) जिसने सभी बैंक खातों एवं वॉलेट के लिए एक इंटरफेस देकर भुगतानों का लोकतांत्रीकरण किया है।

2016 में ही यूपीआई को लॉन्च किया गया था लेकिन अब यह भारतीय सार्वजनिक जीवन का अपरिहार्य भाग बन दया है जिसने जुलाई 2021 में 6 लाख करोड़ रुपये से ऊपर के 3 अरब लेन-देन किए थे। इंडिया स्टैक के तहत दी जाने वाली डिजिटल सेवाओं को मज़बूत एवं बड़े डाटा विनिमय तकनीक इंफ्रास्ट्रक्चर के आसपास बनाना होगा जो सभी बाज़ार प्रतिभागियों को साथ लाए।

यहीं पर चौथी सतह की भूमिका आरंभ होती है जिसका नाम है कन्सेन्ट सतह। डाटा सशक्तिकरण एवं संरक्षण संरचना (डेपा) पर आधारित हाल में लॉन्च की गई खाता-संग्रहण की सुविधा सहमति से डाटा साझा करने के पारिस्थितिकी तंत्र का उपयोग करके डाटा को स्वतंत्र एवं सुरक्षित रखती है।

इस सुविधा के माध्यम से उपभोक्ता अपने सेवा प्रदाताओं के साथ डाटा साझा करके नई वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा पाएँगे। जब इंडिया स्टैक के कई भाग एक साथ आएँगे तो नवोन्मेष असीमित हो जाएगा। सबसे नवीनतम उदाहरण है ओपन क्रेडिट इनैबलमेंट नेटवर्क (ओसीईएन) का जिसे अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया था।

ओसीईएन का उद्देश्य लघु, छोटे एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण उपलब्धता का लोकतांत्रीकरण करना है जिन्हें पारंपरिक रूप से योग्य नहीं माना जाता है क्योंकि उनके पास वित्तीय खातों का इतिहास व गिरवी रखने की वस्तुएँ पर्याप्त नहीं होती हैं।

ओसीईएन एक एपीआई का सेट देता है जिसका डाटा ऋणदाता एमएसएमई की सहमति से देख सकता है और उन्हें संरचित एवं विशिष्ट ऋण उत्पाद दे सकता है। ओसीईएन को बल देने वाली प्रमुख इकाई है ऋण सेवा प्रदाता (एलएसपी) जो ऋण लेने वाले एमएसएमई के एजेंट के रूप में काम करता है और उनसे उसके मज़बूत व्यापार संबंध होते हैं।

बैंक, एनबीएफसी और फिनटेक जैसे ऋणदाता ओसीईएन होने के नाते एलएसपी द्वारा एकत्रित किए गए डाटा को देख सकते हैं। इसमें ऑर्डर खाते, बीजक और पूर्ति स्थिति होती है जिससे नकद प्रवाह-आधरित विभिन्न आकार और अवधि के ऋण उत्पाद दिए जा सकते हैं जो पारंपरिक गिरवी पर ऋण देने की पद्धति से एक बड़ी छलांग है।

सहाय गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के क्रियान्वयन के रूप में ओईसीएन संरचना ने प्रारंभिक सफलता चख ली है। 18 लाख को सीधी पहुँच देने वाला जेम एलएसपी की भूमिका निभाता है। सहाय जेम के माध्यम से जेम मंच पर मिले ऑर्डर के आधार पर पंजीकृत विक्रेता पैनल ऋणदाता से सहमति-आधारित बीजक वित्तपोषण प्राप्त कर सकता है।

जब ओईसीएन बाज़ारों का एक पारिस्थितिकी तंत्र बन जाएगा, तब अपने पूर्ण सामर्थ्य को प्राप्त कर सकेगा। यह संरचना एलएसपी के नए जत्थे विकसित करने में सहयोग करेगी, जैसे अमेज़ॉन और किराना-तकनीकी इकाइयों जैसे व्यापार से ग्राहक तक के ई-कॉमर्स मंच, ज़ोमाटो और स्विगी जैसे खाद्य-तकनीकी खिलाड़ी और कृषि-तकनीक प्रदाता।

डाटा-चालित डिजिटल व्यापार का एक और उदाहरण है नियो-बैंकिंग जहाँ फिन-टेक किसी व्यक्ति के बैंक और निवेश खातों के केवाईसी, यूपीआई और सहमति-आधारित संग्रहण जैसे इंडिया स्टैक के कई भागों को एकत्रित करके व्यापक व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन सेवाएँ देते हैं।

वित्तीय सेवा व्यापार मॉडल के वैश्विक डाटा-चालित विघटन में भारत प्रणेता है। इस क्षेत्र में परिवर्तन के मूल में भारत ने ओपन बैंकिंग दर्शन को रखा है जो द्रुत तकनीकी और व्यापारिक नवोन्मेष के लिए स्थान देता है। सक्रिय और तकनीक-आधारित सार्वजनिक नीति संरचना ने इस यात्रा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।