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डसॉ एविएशन नौसेना को रफाल बेचने के लिए नौसैनिक संस्करण प्रदर्शित करेगा – रिपोर्ट

भारतीय नौसेना को नए लड़ाकू विमान की आपूर्ति करने की दौड़ में रहने वाला डसॉ एविएशन 2022 में भारत में रफाल विमान के नौसैनिक संस्करण को उड़ान भरने के लिए ला सकता है, ताकि भारतीय विमान वाहक पोतों के पास स्की-जंप मंच से उनकी क्षमता प्रदर्शित हो सके।

एक समाचार रिपोर्ट कहती है कि डसॉ रफाल एम पहले से ही फ्रांसीसी नौसेना के साथ सेवा में है, जो इसका उपयोग अपने परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल से करता है। भारत के दो वाहकों के विपरीत, जो विमान को अपने डेक से उड़ान भरने में सहायता के लिए स्की-जंप मंच (स्टोबार) का उपयोग करते हैं। फ्रांस का चार्ल्स डी गॉल उड़ाने भरने के लिए कैटोबार का उपयोग करता है।

स्टोबार प्रणाली में अपनी क्षमता का उपयोग करके विमान पोत से उड़ान भरता है जिसमें पोत की चाप पर स्की-जम्प रैम्प उड़ान भरने में सहायता करता है। वहीं, कैटोबार प्रणाली में पोत के फ्लाइट डेक पर बना कैटापुल्ट विमान को उड़ान भरने में यांत्रिकी सहायता भी प्रदान करता है। दोनों ही प्रणालियों में अरेस्टर तार होते हैं जो शीघ्रता से लेकिन शांति से विमान को धीमा करते हैं जब वह वापसी कर डेक पर उतरता है।

भारतीय नौसेना द्वारा अपने मिग-29के बेड़े के प्रतिस्थापन के विचार को देखते हुए रफाल एम को स्टोबार व्यवस्था में उड़ान भरने की क्षमता का प्रदर्शन करना ही होगा। परीक्षण भारतीय विमानवाहक पोतों पर नहीं बल्कि गोवा में आईएनएस हंसा स्थित तट-आधारित परीक्षण सुविधा पर किए जाएँगे।

बोइंग का एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट, जो भारतीय नौसेना सौदे की दौड़ में सम्मिलित अन्य लड़ाकू विमान है, पहले ही भारतीय नौसेना के स्टोबार विमान वाहकों से संचालन करने की क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है।

अपने मिग-29के के प्रदर्शन से असंतुष्ट भारतीय नौसेना ने अपने वाहकों के लिए नए लड़ाकू विमान खरीदने में रुचि व्यक्त की है।