संस्कृति
अमूर फाल्कन: नागालैंड की उड़ान के संरक्षण की अनोखी कहानी

प्रसंग
  • अमूर फाल्कन को पकड़ने और बड़ी तादाद में संहार से बचाने के लिए चलायी जा रही प्रमुख संरक्षण ड्राइव ने शानदार बदलाव देखा है, नागालैंड के पंगती गाँव में नवम्बर की शुरुआत में सबसे पहला अमूर फाल्कन संरक्षण सप्ताह और त्यौहार सफल संरक्षण की कहानी से सबकुछ सम्बंधित करने का इंतज़ार कर रहे हैंI

अगला सप्ताहांत नागालैंड के पश्चिमी-मध्य के वोखा जिले के दोयंग स्थित पंगती गाँव की यात्रा करने के लिए अच्छा समय हो सकता हैI यह गाँव, इस साल नवम्बर में 8 से 10 तारीख तक आयोजित होने वाले अमूर फाल्कन संरक्षण सप्ताह और त्यौहार का स्थल है, जो शिकारियों के उत्साही संरक्षणवादियों में बदलने की आनंदायक और यादगार कहानी हैI

2012 तक सुंदर दोयंग जलाशय के आसपास के गावों और पंगती गाँव के लोग हर साल यहाँ सर्दियों में आने वाले 1.5 लाख प्रवासी अमूर फल्कोनों को मार दिया करते थेI पेड़ों और पोलों से बंधे हुए मछली के जालों में फंसी चिड़ियों को यह गोली मार देते थेI शिकारी पक्षी दक्षिणी-पूर्वी साइबेरिया और उत्तरी चीन में प्रजनन करते हैं, और मंगोलिया और साइबेरिया लौटने से पहले पक्षी प्रजाति में सबसे लम्बे 22,000 किलोमीटर के प्रवासी मार्ग को पूरा करते हुए लाखों की तादाद में भारत और फिर हिन्द महासागर से दक्षिणी अफ्रीका चले जाते हैंI

हर सर्दियों में पंगती गाँव में करीब 1.5 लाख अमूर फाल्कन उड़कर आते हैं

अक्तूबर के अंत में शिकारी दोयंग में आना शुरू कर देते हैं, जिसे पक्षी विज्ञानी सबसे बड़े अमूर फाल्कन की मंडली मानते हैंI कुछ ही हफ़्तों में क्षेत्र इन पक्षियों की चहचहाहट से गूंज उठता है जिन्हें उनका नाम अमूर नदी के नाम से मिला है, जो रूस और चीन की सीमा बनाती हैI संरक्षण की कहानी अक्तूबर 2012 से शुरू होती है जब वरिष्ठ पत्रकार बनो हरालू और संरक्षणकर्ता रोकोहेबी कुओत्सू, शशांक दलवी (बेंगलुरु के सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज में शोधकर्ता), और रमकी श्रीनिवासन (कांसेर्वेशन इंडिया) इन पक्षियों के संहार को देखने के लिए खुद इस क्षेत्र में आये थेI

नागालैंड में उनके ठहराव के दौरान प्रवासी पक्षियों को मारा जा रहा था

बनो के खुद के शब्दों में, वह हत्याओं के पैमाने और क्रूरता को देखकर स्तब्ध हैंI ऐसा अंदाजा लगाया गया कि नागालैंड में उनके ठहराव के दौरान करीब 10 से 12 प्रतिशत इन प्रवासी पक्षियों को मारा गयाI फिर बनो ने नागालैंड वाइल्डलाइफ एंड बायोडायवर्सिटी कांसेर्वेशन ट्रस्ट बनाया और इन पक्षियों की हत्याओं के दस्तावेज़ बनाने के लिए एक टीम बनाईI पक्षियों के जाल में फंसने और हत्याओं की भयावह तस्वीरों ने दुनियाभर के संरक्षणकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों को हिला कर रख दिया और इस संहार को रोकने के लिए कई संगठनों ने संपर्क कियाI बर्डलाइफ इंटरनेशनल, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, और राप्टर रिसर्च एंड कांसेर्वेशन फाउंडेशन अमूर फाल्कन को पकड़ने और हत्याओं को रोकने लिए एक व्यापक परियोजना को पोषित करने के लिए साथ में आयेI

बानो, जो नागालैंड के नामी परिवार से सम्बन्ध रखती हैं, ने नेताओं और नौकरशाहों को इन पक्षियों की हत्याओं पर रोक लगाने के लिए राजी कर लियाI इसी समय, ट्रस्ट ने स्थानीय लोगों के बीच काम करना शुरू कर दिया, और उन्हें आश्वस्त किया कि पक्षियों की हत्या नैतिक रूप से गलत है, पारितंत्र के लिए हानिकारक है, और उनका और राज्य का नाम बदनाम कर रही हैI उनके गहन प्रयास रंग लाए और 2013 में पंगती गाँव की पंचायत और पड़ोसी गाँवों, आशा और सुन्ग्रो ने अमूर फाल्कन के  शिकार को अवैध और दंडनीय बनाते हुए एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किएI संरक्षण के प्रयासों को आगे ले जाने के लिए ट्रस्ट नागालैंड सरकार और स्थानीय समुदाय को साथ लाया, इसकी वजह से ‘फ्रेंड्स ऑफ द अमूर फाल्कन’ अभियान बना जिसने स्थानीय समुदाय में संरक्षण प्रयासों के प्रति स्वामित्व की भावना जगाईI

जाल में फंसे हुए पक्षी

स्थानीय स्कूलों में बच्चों को सिखाने के लिए विशेष पाठ जिसमें अमूर फाल्कन के बारे में और इस पक्षी को बचाना क्यों ज़रूरी है, शुरू किए गएI संरक्षण प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए व्यसकों और महिलाओं के बीच जागरूक अभियान भी चलाये गएI पक्षियों के ज्ञात घोसलों की जगहों पर पहरा देने के लिए टीमें बनायीं गयीं, और जिन स्थानीय बाज़ारों में पक्षियों को बेचा जाता था उन पर नज़र रखी गयीI यह सब रंग लाया, और शानदार बदलाव के तहत, 2013 में पक्षियों का शिकार पूरी तरह से रुक गयाI और इससे ज्यादा क्या होगा कि जो पक्षियों का शिकार करते थे, उन्हें मार देते थे और स्थानीय बाजारों में बेच देते थे, अमूर फाल्कन के भावुक संरक्षकों में बदल गएI

पिछले कुछ सालों से, पंगति और दोयंग के आसपास के गाँवों ने पक्षी-संरक्षकों, संरक्षकवादियों और पर्यटकों को आकर्षित करना शुरू कर दिया हैI नागालैंड सरकार और ट्रस्ट आदि की मदद से स्थानीय लोगों ने आगंतुकों को घर में ठहराने का काम शुरू किया, पर्यटकों के लिए गाइड के रूप में प्रशिक्षित हुए, और कई छोटे-मोटे कामों जैसे नौका विहार, तम्बुओं को किराए पर देना, और आगंतुकों के लिए पाक कला की क्लास लगाना शुरू किया हैI इन सबसे इनकी आय में वृद्धि हुई है और अब इन्होने अमूर फाल्कन के संरक्षण में अपनी स्थायी हिस्सेदारी विकसित की हैI

इस साल का त्यौहार, जो नागालैंड सरकार के पर्यटन विभाग की पहल है, पर्यटकों को व्यापक पैकेज दे रहा है: चिड़ियों को देखना, प्रकृति की दुर्गम यात्रा, प्राकृतिक फोटोग्राफी, वन्यजीवन आधारित फिल्मों को दिखाना, स्थानीय सांस्कृतिक आयोजन और खेल, पारंपरिक हत्कर्घा और शिल्प की प्रदर्शनी, जोखिम भरे खेल, संगीत और खाने के त्यौहार, पहाड़ों पर चढ़ना, नौका विहार और ऐसी ही कई गतिविधियाँ शामिल हैंI

गंतव्य पंगती

दुनिया में पंगती काफी चर्चित हो गया हैI युवा फिल्मकार सेसिनो यहोशु ने 26-मिनट की एक डाक्यूमेंट्री बनायी है जिसका नाम ‘द पंगती स्टोरी’(इस डाक्यूमेंट्री को देखें) है,  ने सातवें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म फेस्टिवल में विशिष्ठ गोल्डन बीवर अवार्ड के साथ इस साल 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेस्ट एनवायरनमेंट फिल्म का पुरस्कार भी जीताI

त्यौहार को देखने और उसमें भाग लेने के लिए पंगती की यात्रा सिर्फ सफल संरक्षण की कहानी को देखने का ही मौका नहीं है, बल्कि स्थानीय पर्यटन को सहारा देने के लिए और निवासियों की जेबों में कुछ रुपए डालने का भी है, ताकि यह इस सुन्दर पक्षी के संरक्षणकर्ता बने रहेंI

जयदीप मजूमदार स्वराज्य के सह-संपादक हैं।