संस्कृति
राफेल, परेड स्थल से लेकर अयोध्या झाँकी तक 72वें गणतंत्र दिवस की 10 प्रमुख बातें

आज भारत 72वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है, जो कई कारणों से पिछले वर्षों से अलग है।

गणतंत्र दिवस उस तिथि का सम्मान करता है, जिस दिन 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था। इस तिथि को इसलिए चुना गया था क्योंकि इसी दिन 1929 में लाहौर में पूर्ण स्वतंत्रता (पूर्ण स्वराज) की घोषणा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पारित की गई थी।

तब से गणतंत्र दिवस धूमधाम और कार्यक्रमों के आयोजन के साथ मनाया जाता है, जो कि देश की राजधानी दिल्ली में राजपथ पर होने वाली परेड है। लेकिन इस गणतंज्ञ दिवस में अलग क्या है-

यह 50 वर्षों में पहला गणतंत्र दिवस समारोह था, जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा कोविड-19 महामारी के कारण अपनी भारत यात्रा रद्द करने के बाद इसमें कोई मुख्य अतिथि सम्मिलित नहीं हुआ।

1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगाँठ को चिह्नित करने के लिए पहली बार बांग्लादेश से एक सेना की टुकड़ी ने परेड में हिस्सा लिया। इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल मोहतसिम हैदर चौधरी ने किया।

टुकड़ी की पहली छह पंक्तियों में सेना रही। इसके बाद नौसेना और वायुसेना में से प्रत्येक की दो पंक्तियाँ बनीं। रक्षा मंत्रालय ने कहा, “बांग्लादेश की टुकड़ी ने ऐतिहासिक मुक्तिजोद्धाओं की गाथा को दिखाया, जिन्होंने 1971 में बांग्लादेश को स्वतंत्र कराया था।”

तीसरी बात यह कि पहली बार नवगठित केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की झाँकी, जिसमें प्रतिष्ठित थिकसे मठ और सांस्कृतिक विरासत प्रदर्शित की गई, ने परेड में हिस्सा लिया। साथ ही उत्तर प्रदेश की झाँकी में अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का एक मॉडल भी दिखाया गया।

चौथा, 1955 के बाद जब राजपथ स्थाई स्थल बन गया है। ऐसे में पहली बार परेड लाल किले तक जाने की बजाय नेशनल स्टेडियम तक गई। महामारी की वजह से छोटे मार्ग के रूप में इसे लिया गया।

पाँचवाँ, पहली बार एक लड़ाकू जेट विमान में युद्ध अभियान के लिए अर्हता प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला लेफ्टिनेंट भावना कंठ ने फ्लाईपास्ट में भाग लिया। वह भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की झाँकी का हिस्सा रहीं, जिसमें स्वदेशी रूप से विकसित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर रुद्र, रोहिणी राडार और ब्रह्मोस का प्रदर्शन हुआ।

छठा, फ्रांस से खरीदे गए राफेल लड़ाकू विमानों ने आईएएफ फ्लाईपास्ट में हिस्सा लिया। उन्होंने समारोह के दौरान बेहतरीन वर्टिकल चार्ली गठन को पूरा करके फ्लाईपास्ट का समापन किया। इसमें विमान कम ऊँचाई पर उड़ान भरता है, लंबवत ऊपर जाता है और उच्च ऊँचाई पर स्थिर होने से पहले कई बार रोल करता है।

COVID-19 महामारी के कारण कुछ अन्य परिवर्तन भी हुए।

सातवाँ, सभी सेना के सैनिकों को जैव-बुलबुले में रखा गया- किसी को भी बिना किसी अपवाद के प्रवेश करने या बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी।

आठवें, सैन्य दल के आकार को 144 से घटाकर 96 कर दिया गया, जबकि दर्शकों की संख्या को 1.25 लाख से घटाकर 25,000 कर दी गई, ताकि सामाजिक दूरी बनी रहे। परेड में शामिल होने वालों के लिए फेस मास्क पहनना अनिवार्य किया गया था।

नौवाँ, मोटरसाइकिल स्टंट को परेड में सम्मिलित नहीं किया गया क्योंकि टीम स्टंट करते समय सामाजिक दूरी को बनाए रखने में सक्षम नहीं होती।

दसवाँ, वीरता पुरस्कार विजेताओं और इस वर्ष बहादुरी पुरस्कार जीतने वाले बच्चों की कोई परेड नहीं हुई। 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिली थी।