संस्कृति
अयोध्या आर्ट फेस्टिवल: शहरी नवीकरण को विरासत संरक्षण में सम्मिलित करना

प्रसंग

  • भारत के किसी भी शहर को विरासत संरक्षण पर जोर देते हुए विकसित करना चाहिए
  • मध्य-अक्तूबर में समाप्त हुए अयोध्या आर्ट फेस्टिवल में यह नवीन विचार संज्ञान में आया

श्री राम का शहर अयोध्या का जिक्र आते ही भावनाएं उमड़ पड़ती हैंI यह हमें उस समय में वापस ले जाता है जब हमने पहली बार रामायण को पढ़ा या सुना था, जिसमें पहले के कुछ पाठों में शहर की भव्यता के बारे में विस्तार से बताया गया है Iराम की कथा अयोध्या शहर की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके लोगों के बिना अधूरी है I स्वाभाविक रूप से तीर्थ स्थल के नाम पर राम का शहर करोड़ों भारतीयों के लिए उच्च स्थान पर होना चाहिए Iफिर भी,धर्मनिष्ठ को रोकते हुए, यह शहर दूसरे मंदिरों वाले शहरों जैसे मथुरा और वृन्दावन की तरह देश-विदेश से बड़ी संख्या में तीर्थ यात्रियों को आकर्षित नहीं करता है I दिवाली पर भी नहीं, जो त्यौहार राम, सीता और लक्ष्मण के घरवापसी के जश्न का होता है, यहाँ कभी भी उतनी भव्यता से कभी नहीं मनाया गया जिसके यह लायक है I लेकिन जब 2017 की दिवाली की तस्वीरें घूमीं, तो देखने वालों ने यह देखा कि इस बार एक नयी पहल शुरू की गयी है Iराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर जब भी बने, ऐसा लगता है कि अयोध्या में निर्विवाद रूप से समृद्ध विरासत पर आधारित एक शहरी नवीनीकरण मिशन की शुरुआत हो चुकी हैI

अयोध्या में दीपावली मनाने की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महत्वकांक्षी पहल को अमली जामा पहनाने के लिए महत्वपूर्ण लोगों का समूह, जिसमें मेयर ऋषिकेश उपाध्याय का व्यक्तिगत समर्थन है, ने इस शहर में नए विचार को लागू करवाया। 14 अक्तूबर को समाप्त हुई अयोध्या आर्ट फेस्टिवल जनता के लिए आयोजित कला प्रतियोगिता थी जिसमे राज्य भर के कला विध्यार्थियों ने मिलकर शहर भर की 100 दीवारों पर रामायण के चित्र उकेरे। यह पहले इस बात को ध्यान में रखकर शुरू की गयी थी कि इतिहास और विरासत सिर्फ संग्रहलयों तक ही सिमट कर नहीं रह जाए; इनको दूसरी जगहों पर भी भेजना चाहिए। हमारे शहरों में, जहां आबादी और उससे जुड़ी समस्याएँ हमेशा ही बनी रहतीं हैं, सार्वजनिक जगहों पर संस्कृति और विरासत का जश्न मनाने के लिए कोई असर नहीं डालतीं। सार्वजनिक कला, विशेषकर समृद्ध इतिहास और विरासत शहरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि शहरी नवीनीकरण के लिए भी विशेष रूप से प्रभावकारी रही है । इसने हमें शहरी नवीनीकरण की फिर से कल्पना करने में मदद की, न सिर्फ शहर का फिर से स्थायी रूप से पुनर्निर्माण करने में बल्कि लोगों को शहर से जोड़ने का भी एक प्रयास है। इस दिशा में अयोध्या आर्ट फेस्टिवल ऐसे शहर में सांस लेने के लिए शहरी नवीनीकरण में वासत्व में निवेश करने की इस दिशा में मत्वपूर्ण कदम हो सकता है जिसमें किसी अन्य आय के विपरीत सांस्कृतिक इतिहास है।

शांतनु गुप्ता और पुष्कर शर्मा, फेस्टिवल को गढ़ने वालों में से एक, ने फेस्टिवल की भव्य सफलता को न सिर्फ 200 विध्यार्थियों को आकर्षित करके और उनकी मदद से शहर की दीवारों को राम से रंग दिया है बल्कि शेहरवासियों के उनके प्रिय शहर में दिलचस्पी को बचाने और सहेजने में भी बदोतरी की है।

“चित्रकार और आयोजक निवासियों के समर्थन से गदगद हैं। वे हमारे पास आए और हमसे इन दीवारों की देखभाल करने का वादा किया। देर रात भी जब भित्ति चित्र बनाने का कम चल रहा था तो कुछ अयोध्या के निवासियों नें चित्रकारों के साथ सेल्फी ली और अपने भय को दर्शाया। यह हमें ऐसी पहल के महत्व में नवीनीकृत आशा देता है जो विरासत, संस्कृति और इतिहास को शहर के दैनिक आचारों का एक हिस्सा बनाने के लिए सार्वजनिक कला का उपयोग करने पर केन्द्रित है”। निवासियों और प्रतिभागियों द्वारा अयोध्या आर्ट फेस्टिवल का स्वागत यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक विरासत पर नज़र रखने के साथ शहरी नवीनीकरण को आगे बढ़ाने में बहुत संभावनाएँ हैं। चित्रकारियों को संरक्षित करने में निवासियों द्वारा प्रदर्शित दिलचस्पी इस बात को दोहराती है कि ऐसी पहल एक शहर और उसके इतिहास के बारे में स्वामित्व और गर्व की मजबूत भावना बनाने में लंबा समय लेती है।

विरासत आधारित शहरी नवीकरण को अपनाने का एक और लाभ पर्यटन पर प्रभाव है जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। भारत के कई शहर इतिहास, धर्म, अध्यातम और विरासत के मामले में समृद्ध केंद्र हैं। उन शहरों में जो पहले से ही भीड़ वाले पर्यटन स्थलों में हैं, शहरी नवीनीकरण को स्थानीय समुदायों को पर्यटन के लाभों को स्थायी रूप से प्राप्त करते हुए अपनी विरासत की रक्षा करने के लिए सशक्त बनाना चाहिए। वहीं, कम लोकप्रिय शहरों में सांस्कृतिक विरासत को सहेजना, अपनाना और बचाना पर्यटन को बढ़ावा देने में सकारात्मक कदम हो सकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान होगा।

फेस्टिवल की सफलता के बारे में बोलते हुए अयोध्या के सबसे पहले मेयर (यह शहर 2017 में नगर निगम का हिस्सा बना) ने कहा: यह त्योहार तो केवल एक शुरुआत है जिसमें हमने अयोध्या को वास्तव में अपनाने और अपने प्रतीक भगवान राम का जश्न मनाने के लिए योजना बनाई है। त्योहार के एक हिस्से के रूप में, प्रतिभागियों को शहर की संस्कृति में लंबा अनुभव भी दिया गया है। स्थानीय धर्मशालाओं में गाए जाने वाले राम भजनों और राम लीला के पारंपरिक प्रदर्शन को देखना जश्न था। मुख्यमंत्री की पहल को धन्यवाद जिसमें हम 2019 की दीपावली को सरयू नदी के घाटों पर भव्य रूप में देखेंगे और इंतज़ार करेंगे कि इस समय हमें और ज़्यादा मेहमानों की मेजबानी करने का मौका मिलेगा”।

एक देश के रूप में, शहर के अस्तित्व के एक विभिन्न अंग के रूप में संस्कृति और विरासत को सक्रिय रूप से संरक्षित करने की हमारी यात्रा शुरू हो गयी है। दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे मेट्रोपॉलिटन शहरों, जहां ऐतिहासिक स्मारक बड़े पैमाने पर स्थित हैं, सक्रिय रूप से संरक्षण करने में निवेश करते हैं। अहमदाबाद ने 2017 में यूनेस्को के विश्व विरासत शहर का खिताब पा लिया है। शहरी नवीनीकरण के लिए, विशेष रूप से अयोध्या जैसे शहरों में, हमारी विरासत का उपयोग कर, हमें दुनिया के अन्य शहरी केन्द्रों से अलग कर सकती है। नीति निर्माता भविष्य के विकसित, टिकाऊ शहरों के निर्माण के दौरान अपनी सांस्कृतिक विरासत को न केवल संरक्षित करने के लिए बल्कि अपनाने के बारे में सोच सकते हैं। जैसा कि राम के शहर ने हमे दर्शाया है, शहरी नवीकरण हमारे समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ एक अतिरिक्त ज़िम्मेदारी नहीं है, यह अवसर बदल भी सकता है, क्योंकि इसमें जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने की क्षमता है।

 

सुरभि होडिगेरे पॉलिटिकल कुओटीएंट कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड की सीईओ हैं। वह राजनीति, उद्यमिता, अर्थशास्त्र और आध्यात्मिक से जुड़ी चीजों के लिए उत्साही हैं।