संस्कृति
पहुँच से परे देवी: एलओसी के उस पार स्थित शारदा पीठ
हर्षा भट - 2nd November 2018

प्रसंग
  • पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर स्थित मंदिर में पहुँचने के लिए देवी शारदा के अन्युयाई क्या कर रहे हैं।

नमस्ते शारदा देवी कश्मीरा पूरा वासिनी..त्वामहम प्रार्थये नित्यं विद्या दानं च देहिम

मंग्लुरू में शारदीय नवरात्री के दौरान शारदा मूर्ति कि पूजा अर्चना के दौरान जब विसर्जन हो रहा था तब मेरे दिमाग में ये जाप गूंज गयाI शारदा माता की जय और भारत माता की जय के गुन्ज्यारे के बीच जैसे-जैसे वह धीरे-धीरे नदी में विसर्जित होती जा रहीं थीं, हर कोई उनकी अपने वास की वापसी की यात्रा का गवाह बन रहा थाI

लेकिन जैसे ही ‘कश्मिरापुरा वासिनी’ ने स्थान छोड़ा, मैं सोचने लगी कि उनकी मात्रभूमि कश्मिरापुरा स्थित उनके स्थान का क्या होगाI हाल ही में कश्मीर यात्रा के दौरान ऐसे विरासत भवन, जो कभी पूजे जाते थे, की दुर्दशा देखकर मुझे दुःख हुआI लेकिन मुझे इस देवी दर्शन नहीं हुएI इसलिए नहीं कि मैं नहीं चाहती थी, बल्कि इसलिए कि हम में से जो ऐसा कर सकता था वह भी नहीं चाहता थाI क्योंकि उनकी जगह शारदा पीठ अब पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में स्थित हैI कश्मीर के एक साधू, स्वामी नन्द लाल, जिनका आश्रम पहले शारदा शहर में स्थित था, ने 1948 में आखिरी बार इस जगह की यात्रा की थीI विभाजन के बाद इन्हें अपना आश्रम शारदा से टिककर गाँव में स्थानांतरित करना पड़ा और ऐसा कहा जाता है कि ये अपने साथ कुछ मूर्तियाँ भी ले गए जो अभी भी बारामुला स्थित देविबल में रखी हुई हैंI

शारदा पीठ की विकिपीडिया गंभीर वास्तविकता के बारे में बताती हैI ‘शारदा गाँव स्थित नीलम नदी के किनारे यह त्यागा गया हिन्दू मंदिर है जो सीखने का एक पुरातन केंद्र है’I ऐसा इसलिए क्योंकि विभाजन के बाद किसी ने भी यहाँ की यात्रा नहीं कीI

हालाँकि इस यात्रा के केंद्र को पुनर्जीवित करने के प्रयास चल रहे हैंI कश्मीर के नागरिकों ने ‘सेव शारदा कमिटी कश्मीर’ के नाम से एक समूह बनाया है, जिसे रविन्द्र पंडिता ने स्थापित किया और जो नेतृत्व कर रहे हैं, पिछले तीन साल से इस मंदिर की पहुँच की मांग कर रहा हैI पिछले हफ्ते, फिर से इन्होने गृह मंत्रालय को इस मामले में संपर्क किया। वह चाहते थे कि लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल बस के द्वारा पुरातन मंदिर में जाने के लिए हिन्दू तीर्थ यात्रिओं को विशेष परमिट जारी किए जाएंI

समिति इस मंदिर तक पहुँचने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जो इसे ‘शारदा देश पुनर्स्थापना’ के अपने बड़े सपने के हिस्से के रूप में देखती है, जिसमे सिर्फ जम्मू और कश्मीर बाकी रह गया हैI

समिति ने पिछले हफ्ते राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह से मुलाकात करके अपनी मांगों से अवगत करायाI ‘हमने फिर से विशेष परमिट के लिए अनुरोध किया है, ताकि हिन्दू और सिख अपने-अपने धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए एलओसी बसों का उपयोग कर सकेंI ‘द ट्रिब्यून’ का हवाला देते हुए पंडिता ने कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय से भी समपर्क किया जाएगा ताकि वह पाकिस्तान में समकक्षों के साथ इस मामले को उठा सकेंI‘‘

समिति इस मंदिर के बारे में जागरूकता पैदा करने का प्रयास कर रही है, जो पहले कभी सीखने का महत्वपूर्ण केंद्र थाI उन्होंने शारदा दिवस के अवसर पर मंदिर में फूलों कि पेशकश करने के लिए पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर में नागरिक समाज से भी अनुरोध किया था, और उन्होंने उन फूलों को समिति को वापस भेज दिया थाI

शारदा मंदिर पर चढ़ाए गए फूल

शारदा मंदिर

यह मंदिर पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद के लगभग 207 किलोमीटर उतर में है और किशनगंगा नदी (नीलम नदी) और मधुमती नदी के एक सुरमय संगम के पास स्थित हैI यह नंगा पर्वत श्रृंखला की शारदा और नारदा पहाड़ियों की बर्फ से ढकी हुई चोटियों से घिरा हुआ हैI

सदियों से इतिहासकारों ने इस मंदिर के बारे में लिखा हुआ हैI राजतारंगिनी जो कलाना के कश्मीर पर सबसे शुरुवाती कार्यों में से एक था, शारदा के मंदिर के बारे में बताता हैI 12वीं शताब्दी में लिखा गया है कि यह प्राचीन संस्कृत साहित्यिक कार्य तारीखवार कश्मीर के पुराने इतिहास, स्थान और इसके क्षेत्र को बताता हैI पंडिता के अनुसार, विक्रमा चिरीर में इतिहासकार बेल्हाना ने अपने ज्ञान को देबी को समर्पित करते हुए लिखा है, ‘जिसका मुकुट गुरुमती नदी से सोना एकत्रित करके चमकदार बनाया गया था’I  शारदा लिपि को स्थानीय लोगों के द्वारा बोले जाने वाली भाषा से जोड़कर देखा जाता हैI ‘इन रिट्स एंड रिचुअल्स ऑफ़ कश्मीरी ब्रह्मिंस’ के लेखक ससिसेखारा तोशाखानी शारदा मंदिर का उल्लेख करते हैं, जिसमें ‘शारदा की परंपरागत हंस की बजाये शेर पर सवार की छवि हैI

यह मंदिर 18 महाशक्ति पीठों, या देवी पूजा के महत्वपूर्ण केन्द्रों में से एक माना जाता हैI शक्ति पीठ की कथा के अनुसार जब शिव सती के शरीर को उठाए हुए घूम रहे थे, तो वह स्थान पवित्र हो गये जहाँ सती के शरीर के विभिन्न अंग गिरे, ऐसा कहा जाता है कि शारदा मंदिर में उनका दाहिना हाथ गिरा थाI इसे सीखने का एक महत्वपूर्ण बौद्ध केंद्र भी कहा जाता था। कहा जाता है कि सम्राट कनिष्क ने यहां एक बौद्ध परिषद आयोजित की थी। ऐसा माना जाता है कि इस विश्वविद्यालय में शारदा लिपि शुरू हुई और इसने बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पौराणिक कथाओं या इतिहास में जो मंदिर के बारे में कहा गया है, उसे सूचीबद्ध करना इस लेख के दायरे से बाहर है। लेकिन यह निश्चित रूप से उन सभी लोगों के लिए शुरुआती बिंदु के रूप में कार्य कर सकता है जिन्होंने पिछले हफ्ते ज्ञान की देवी की पूजा की थी, जो इस मंदिर को बहाल करने और नियमित तीर्थयात्रा को फिर से शुरू करने के लिए कार्य कर रहे हैं।

समिति दोनों देशों के लोगों से समर्थन हासिल करने में कामयाब रही है। पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर के सुप्रीम कोर्ट ने पंडिता के पत्र को याचिका में बदल दिया और इस साल की शुरुआत में अपनी सरकार को मंदिर की रक्षा करने का निर्देश दिया। सीमा के इस तरफ भरत पुणुथथाना ट्रस्ट और श्रृंगेरी और द्वारका शंकरचार्य मठ जैसे संगठनों ने हाल ही में इसमें अपना समर्थन व्यक्त किया है और इस मामले में भारत सरकार के हस्तक्षेप की मांग की है। जम्मू-कश्मीर के भारत के राज्य में प्रवेश के दिन, पंडिता चाहते हैं कि सबसे पुराने मंदिरों में से एक में सीखने की देवी की पूजा करने के लिए बेहिचक पहुँच होने का उनका सपना सच हो।