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“महिलाओं के प्रवेश के बाद पुण्याहम के लिए बंद करना होगा सबरीमाला मंदिर”- मुख्य पुजारी परिवार

सर्वोच्च न्यायालय के सभी आयुवर्गों की स्त्रियों की सबरीमाला तीर्थस्थान में प्रवेश के निर्णय पर अयप्पा श्रद्धालुओं के विरोध के बाद अब तंत्री (पुजारी) परिवार और राजसी परिवार जो तीर्थस्थल के संरक्षक थे , उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे मंदिर को पुण्याहम के लिए अनिश्चित काल के लिए बंद करेंगे, मरुनादन टी.वी. ने बताया।

पुजारी परिवार ने बताया कि मंदिर के सभी धार्मिक अनुष्ठानों का अधिकार, उन्हीं के पास है। पुण्याहम तब किया जाता है जब मंदिर के नियमों का उल्लंघन हुआ हो। और 10 से 50 की आयु के बीच की महिलाओं के प्रवेश से यही हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय या सरकार का मंदिर में होने वाले अनुष्ठानों पर कोई अधिकार नहीं है। यदि सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश पूर्ण रूप से लागू होगा तब पुण्याहम करने की आवश्यकता बार-बार पड़ेगी जो व्यावहारिक रूप से असंभव है क्योंकि शुद्धिकरण के लिए मंदिर को बंद रखना होगा।

मंदिर उतने ही महत्तवपूर्ण हैं, जितने की देवता और मंदिर के नियमों में किसी प्रकार का विलयन मंदिर को एक आम स्थान बना देगा। “सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के कार्यान्वित होने के बाद, पुजारी और राजसी परिवार को मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए, मंदिर को बंद करना होगा”, पंडलम राजसी परिवार के प्रतिनिधि केरला वरमा राजा ने कहा।

यह निर्णय सामान्य श्रद्धालुओं को प्रभावित करेगा क्योंकि नवंबर में मंडला-मकरविलक्कु का काल शुरु होगा और इस दौरान मंदिर में लाखों श्रद्धालु आते हैं।