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नई बस बिक्री में वित्त वर्ष-25 तक ई-बसों की 8% से 10% होगी भागीदारी- आईसीआरए

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 तक इलेक्ट्रॉनिक-बसों की नई बस बिक्री में आठ से से 10 प्रतिशत की भागीदारी होगी। यह भी कहा गया कि यह विशेष खंड भारत के विद्युतीकरण आंदोलन की रोशनी का नेतृत्व करेगा और इसलिए अब इसमें आकर्षण देखा जा रहा है।

केंद्र सरकार की हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण (फेम) पहल को पहले ही 2024 तक दो वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है।

इस पहल ने मध्यम अवधि में इस खंड के व्यापक प्रचार का कार्य आरंभ कर दिया। यह वृद्धि इस तथ्य के बावजूद है कि गत डेढ़ वर्ष में सार्वजनिक परिवहन बाज़ार में दबाव नज़र आ रहा है। फिर भी आईसीआरए ने कहा कि गत कुछ माह में ई-बस के वर्ग में तेज़ी आई है।

दि इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में आईसीआरए रेटिंग्स के उपाध्यक्ष श्रीकुमार कृष्णमूर्ति के हवाले से कहा गया, “इलेक्ट्रिक बस परियोजनाओं में बस की लागत सबसे बड़ी लागत है, जो परियोजना लागत का 75 से 80 प्रतिशत है।”

उन्होंने आगे कहा, “फेम-2 योजना के अंतर्गत प्रति बस 35-55 लाख रुपये की पूंजी सब्सिडी के साथ पूंजी सब्सिडी अंश परियोजना लागत के एक बड़े हिस्से को 40 प्रतिशत तक भी निधि दे सकता है, जो इन परियोजनाओं की व्यवहार्यता के लिए अच्छा संकेत है।

एजेंसी का दावा है कि दरअसल, फेम-2 केवल सकल-लागत अनुबंध (जीसीसी) मॉडल के माध्यम से बसों के लिए पूंजी सब्सिडी देता है, यह भारत में इलेक्ट्रिक बसों को अपनाने का पसंदीदा मार्ग बन गया है।