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केरल सरकार के मजहबी समारोह पुनः शुरू करने से बढ़े कोविड-19 मामले- केंद्रीय पैनल

केरल में कोविड-19 मामलों की हुई वृद्धि से बचा जा सकता था, यदि राज्य सरकार ने मजहबी समारोहों को पुनः शुरू नहीं किया होता। यह कहना केंद्र सरकार की जीनोम अनुक्रमण निगरानी करने वाली एजेंसी सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स के निदेशकों में से एक अनुराग अग्रवाल का है।

इंडिया टुडे को अनुराग अग्रवाल ने बताया, “मजहबी समारोहों की अनुमति देना एक गलत विचार था। केरल सरकार को केवल आवश्यक सेवाओं को ही पुनः खोलना चाहिए था। यदि केरल मजहबी समारोहों के लिए नहीं खुलता तो 13,000 से 20,000 मामले नहीं होते।”

उन्होंने बताया, “राज्य में कोविड-19 के नए प्रकार की पहचान नहीं की गई है। राज्य के नमूनों के जीनोम अनुक्रमण से पता चला कि कम से कम 90 प्रतिशत मामले कोरोना के डेल्टा प्रकार के थे। कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल से मई के दौरान केरल में कोरोना के डेल्टा प्रकार के मामले सामने आए थे।

अनुराग अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 की तीसरी लहर सितंबर या अक्टूबर में आ सकती है। हालाँकि, अभी दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में अब भी अधिक मामले ही आ रहे हैं। भविष्य में संक्रमण की वृद्धि से बचने का एकमात्र उपाय टीकाकरण अभियान में तेज़ी लाना ही है। वैक्सीन संक्रमण से करीब 60 प्रतिशत तक सुरक्षा दे सकते हैं।