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पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में लाने का परिषद् ने किया विरोध- निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार (17 सितंबर) को कहा कि अधिकांश राज्य सरकारों ने पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत सम्मिलित करने का विरोध किया।

कोविड-19 के बाद से पहली बार भौतिक प्रारूप में आयोजित परिषद् की 45वीं बैठक के समापन पर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केरल उच्च न्यायालय के आदेश के बाद इसे कार्यसूची में जोड़ा गया था। बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श भी किया गया था।

सीतारमण ने कहा कि परिषद् के सदस्यों ने पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने के लिए वर्तमान स्थिति को उपयुक्त नहीं पाया है।

इकोनॉमिक टाइम्स ने सीतारमण के हवाले से कहा, “पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा या नहीं, इस पर बहुत सी अटकलें लगाई गईं। मैं बिल्कुल स्पष्ट कर देती हूँ कि यह आज की कार्यसूची में विशुद्ध रूप से केरल उच्च न्यायालय के आदेश के कारण आया, जहाँ न्यायालय ने इस मामले को जीएसटी परिषद् के समक्ष रखने का सुझाव दिया था।”

उन्होंने आगे कहा, “जीएसटी परिषद् के सदस्यों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे नहीं चाहते कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में सम्मिलित किया जाए। हम केरल उच्च न्यायालय को रिपोर्ट करेंगे कि इस मामले पर चर्चा की गई और परिषद् ने महसूस किया कि यह पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने का समय नहीं है।”

यह अनुमान लगाया गया था कि पेट्रोल और डीजल की रिकॉर्ड उच्च मूल्यों को कम करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने की पहल की जा सकती है।