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कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास हेतु कांग्रेस सांसद राज्यसभा में पेश करेंगे निजी सदस्य विधेयक

‘कश्मीरी पंडित अधिनियम’ घाटी में कश्मीरी पंडितों के शीघ्र पुनर्वास, उनसे अतिक्रमण की गईं संपत्तियों की बहाली और समुदाय की वापसी को प्रोत्साहित करने के लिए सुरक्षा व रोजगार प्रदान करने की दिशा में कदम उठाने की मांग करता है।

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने के प्रयास में कांग्रेस के एक सांसद एक निजी सदस्य विधेयक पेश करने को तैयार हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने उच्च सदन में कश्मीरी पंडित अधिनियम प्रस्तुत करने की योजना बनाई है। इसमें केंद्र से घाटी में कश्मीरी पंडितों का जल्द से जल्द पुनर्वास सुनिश्चित करने, उनसे अतिक्रमण की गई संपत्तियों की बहाली और समुदाय की वापसी को प्रोत्साहित करने हेतु सुरक्षा और रोजगार की छत प्रदान करने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह करती है।

इसके अतिरिक्त, विधेयक विशेषज्ञ समितियों को कश्मीरी पंडितों के अत्याचारों व दुर्दशा पर एक श्वेत पत्र जारी करने और उनके सामूहिक पलायन व नरसंहार की जाँच हेतु जाँच आयोग का गठन करने के लिए भी कहता है।

श्वेत पत्र, जिसे भारत के एक सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश द्वारा तैयार करने का प्रस्ताव है, भाजपा शासन के गत आठ वर्षों की अवधि को देखेगा और प्रस्तावित जाँच आयोग 1989 की अवधि को देखेगा।

विस्तृत इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएँ, भारी सुरक्षा, लौटने वालों के मध्य उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए निवेश, शिक्षा व रोजगार में कोटा, एक मासिक पारिवारिक समर्थन और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के तहत कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक के रूप में सूचीबद्ध करना जैसे कदम हैं, जो सांसद बिल में रखना चाहते हैं।

अतिक्रमित संपत्तियों के मामले में बिल कहता है कि 1989-90 के बाद बेची गईं ऐसी संपत्तियों को ‘संकट बिक्री’ घोषित किया जाएगा। इस प्रकार इन संपत्तियों की बिक्री को शून्य बना दिया जाएगा और उन्हें मूल मालिकों को वापस कर दिया जाएगा।