अर्थव्यवस्था
कॉग्निज़ेंट की भारतीय प्रतिभाएँ इसकी वैश्विक सेवाओं को संचालित कर रही हैं

कोविड-पश्चात विश्व में बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे कई निगमों के साथ नौकरियों के क्षेत्र में चल रही मंदी के बीच एक तकनीकी खिलाड़ी ऐसा है जो इस ट्रेंड को तोड़ रहा है। यूएस स्थित मुख्यालय और भारतीय प्रतिभा से संचालित होने वाले कॉग्निज़ेंट ने पिछले माह कुछ घोषणा की थी।

उसकी योजना है कि नए अभियांत्रिकी स्नातकों से वह इस वर्ष लगभग 30,000 पद भरे और अगले वर्ष संभवतः 45,000 लोगों की नियुक्ति करे। विंडोज़ ऑफिस और अज़्यॉर जैसे माइक्रोसॉफ्ट टूल्स, आदि के अपने 56 लाख वैश्विक उपभोक्ताओं को सहायक सेवाएँ देने के लिए उसे इन प्रतिभाओं की आवश्यकता है।

साथ ही दूसरे स्तरों पर वह 1 लाख व्यवसायिकों की नियुक्ति की भी योजना बना रहा है। कॉग्निज़ेंट इसे अपनी ‘निन्जा’ नियुक्ति प्रक्रिया कहता है जिसके माध्यम से वह एक वर्ष में कई सप्ताहों तक प्रतिदिन 700 लोगों को नौकरियाँ देगा।

एक दूसरी घोषणा में कॉरपोरेट सोशल मीडिया मंच- लिंक्डइन ने इसे भारत में काम करने योग्य शीर्ष 25 कंपनियों में दूसरा स्थान दिया था। कॉग्निज़ेंट अपने कर्मचारियों को “सहयोगी” कहता है और भारत में उनकी संख्या लगभग 2 लाख है जो उसके वैश्विक कर्मचारी बल का 70 प्रतिशत भाग है।

कॉग्निज़ेंट एक रोचक उदाहरण है कि कैसे कुछ इंफोटेक कंपनियाँ विश्वव्यापी नाम और ख्याति की खोज में सच में वैश्विक इकाई बनने के लिए भारतीयता को जान-बूझकर त्याग देती हैं। और कुछ हद तक यह सफल भी हुआ है।

लेकिन आप अपने कपड़े बदल सकते हैं, अपना डीएनए नहीं। और जिस तरह से कॉग्निज़ेंट की भारतीय प्रतिभाएँ इसके वैश्विक व्यापार और महत्वाकांक्षाओं को बल दे रही हैं, वह इस देसी प्रौद्योगिकी प्रतिभा की अनकही कहानी रह जाती है।

बाएँ ऊपर- लक्ष्मी नारायणन, दाएँ ऊपर- फ्रांसिस्को डीसूज़ा, बाएँ नीचे- गणेश अय्यर, दाएँ नीचे- राजेश नाम्बियार

1994 में इस कंपनी की स्थापना डुन एंड ब्रैडस्ट्रीट इंडिया के नाम से हुई थी और सत्यम कंप्यूटर्स के साथ यह एक संयुक्त उद्यम था जिसके पहले सीईओ बने श्रीनि राजु। 1997 में इसका नाम कॉग्निज़ेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन्स रखा गया और मुख्यालय को तत्कालीन सीईओ कुमार महादेव ने चेन्नई से यूएस स्थानांतरित कर दिया।

भारत-आधारित अन्य आईटी कंपनियों की तरह कॉग्निज़ेंट ने भी वर्ष 2000 के व्यापार का लाभ उठाया लेकिन चतुराई से इसने अपनी सारी संपत्ति को एक ही जगह नहीं लगाया। इसने रख-रखाव परियोजनाएँ लीं जिससे डॉटकॉम की असफलता का न्यूनतम प्रभाव पड़ा, जबकि बड़ी आईटी कंपनियों ने इसकी चिंता नहीं की थी।

बढ़ता व्यापार

1998 से, पहले अध्यक्ष की तरह और फिर सीईओ के रूप में, लक्ष्मी नारायणन कॉग्निज़ेंट के खेवैया रहे जिन्होंने कंपनी को व्यापार प्रक्रिया परिचालनों और कन्सल्टेन्सी पर केंद्रित किया। यह कंपनी के लिए एक दुधारु गाय सिद्ध हुई।

अपने सह-संस्थापक और 2007 से सीईओ, केन्या में जन्मे भारतीय, फ्रैन्सिस्को डीसूज़ा के नेतृत्व में 12 वर्षों में कॉग्निज़ेंट का व्यापार और राजस्व काफी बढ़ा। 2019 में आयरलैंड में जन्मे ब्रायन हंफ्रीस को कंपनी का सीईओ बनाए जाने के बावजूद कई प्रमुख वर्गों में भारतीयों का दबदबा रहा।

हंफ्रीस वोडाफोन, डेल और एचपी से अनुभव प्राप्त वरिष्ठ हैं, वहीं डिजिटल व्यापार परिचालनों के प्रमुख एम्फसिस के सीईओ रहे गणेश अय्यर हैं। पूर्व आईबीएम वरिष्ठ राजेश नाम्बियार कॉग्निज़ेंट इंडिया के अध्यक्ष एवं डिजिटल व्यापार व तकनीक के प्रमुख हैं।

कंपनी के 12 वरिष्ठ कार्यकारियों में से चार भारतीय हैं और इसके नवोन्मेश का केंद्र यूएसए का न्यू जर्सी नहीं, बल्कि भारत में चेन्नई है। 25 वर्षों बाद एक गैर-भारतीय के सीईओ बन जाने से कई वरिष्ठ कार्यकारी कंपनी से अलग हो गए थे क्योंकि हंफ्रीस अपने साथ अपना एक दल लाए थे।

सीईओ ब्रायन हंफ्रीस

लेकिन मीडिया के कुछ वर्गों ने इसे सामूहिक बहिर्गमन कहा था, जो कि अतिशयोक्ति है। भारत में संप्रति नेतृत्व के लिए चिंताजनक यह विरोधाभास है- कॉग्निज़ेंट भारतीय प्रतिभा का एक बड़ा समर्थक है परंतु इसे छोड़कर जाने वालों की दर 18 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

अब अपने मानव संसाधन पद्धतियों का निरीक्षण करना आने वाले महीनों में इसकी प्राथमिकता है ताकि 2 लाख भारतीयों का इसका कार्यबल कंपनी से जुड़े रहने के लिए प्रेरित महसूस करे।

जब भी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी का इतिहास कहा जाता है, टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल के साथ शीर्ष पाँच कंपनियों में कॉग्निज़ेंट का नाम आता है जो युग परिवर्तक सिद्ध हुए और ‘भारतीय आईटी’ को विश्व में एक सम्मानजनक ब्रांड बनाया।

आज कॉग्निज़ेंट भारत में शीर्ष 10 तकनीकी खिलाड़ियों की सूची से बाहर हो गया है लेकिन एक तथ्य जो लोग प्रायः लोग भूल जाते हैं, वह यह कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राजस्व के अनुसार कंपनी अभी भी शीर्ष 10 या शीर्ष 15 (किसकी वरीयता सूची है, उसपर निर्भर करता है) इन्फोटेक कंपनियों में है।

16.5 अरब डॉलर की हाल की वार्षिक कमाई के साथ कॉग्निज़ेंट उस वैश्विक स्थान पर है जहाँ सिर्फ एक और भारतीय कंपनी- टीसीएस है।

स्वास्थ्य, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, खुदरा और संचार जैसे कई क्षेत्रों में कॉग्निज़ेंट की हर सेवा में ‘डिजिटल’ शब्द मिलता है। कोविड के बाद उभरने में कंपनी कैसे अपने ग्राहकों को डिजिटल तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का लाभ पहुँचाएगी, यह एक चुनौती होगी।

यह कैसा होगा, इसे अभी बताना जल्दबाज़ी होगी परंतु एक बात निश्चित है- जो प्रतिभाएँ कॉग्निज़ेंट को सफल बनाएँगी, वे मुख्य रूप से भारतीय होंगी।

आनंद ऑनलाइन इंडिया टेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन निदेशक व वरिष्ठ आईटी पत्रकार हैं।