इन्फ्रास्ट्रक्चर
बिजली कटौती से विदेशी कंपनियों के चीन स्थित आपूर्तिकर्ता नहीं कर पा रहे हैं उत्पादन

हाल के कुछ दिनों में बिजली जाने और बत्ती गुल हो जाने के कारण चीन में कई उद्योग मंद पड़ गए हैं या बंद हो गए हैं जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए तो खतरा है ही, साथ ही पश्चिम में धूमधाम से मनाए जाने वाले क्रिसमस से पहले यह वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान भी खड़ा कर सकता है।

ऐप्पल, टेस्ला एवं अन्य कंपनियों के कई आपूर्तिकारों ने अस्थाई रूप से अपने चीनी संयंत्रों में उत्पादन को रोक दिया है क्योंकि ऊर्जा कुशलता की आवश्यकताएँ पूरी करना कठिन हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री के शिखर समय पर ऐसा होने से आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित हो रही हैं।

देश में ऊर्जा उपयोग पर चीनी सरकार द्वारा नई सीमाएँ तय किए जाने से यह सब हो रहा है। ऐप्पल के लिए यह समय और महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसने हाल ही में अपनी आईफोन 13 शृंखला के उपकरण जारी किए हैं और जैसे-जैसे बकाया ऑर्डरों का भार बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे नए आईफोन मॉडल की आपूर्ति में विलंब होता रहेगा।

भले ही, ऐप्पल के सभी आपूर्तिकर्ता प्रभावित नहीं हो रहे हैं, लेकिन मदरबोर्ड और स्पीकर जैसे पुर्जों की विनिर्माण प्रक्रिया कुछ दिनों से बंद है। विश्लेषकों का कहना है कि बिजली जाने के कारण उत्पादन में हो रही कमी से चीन की आर्थिक वृद्धि बाधित हो रही है।

वहीं, रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया है कि दो प्रमुख ताइवानी चिप निर्माता- चिपमेकर्स यूनाइटेड माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्प और ताइवान सेमीकन्डक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लिमिटेड- का कहना है कि उनकी चीनी सुविधाएँ सामान्य रूप से चल रही हैं।

चीन विश्व में सर्वाधिक ऊर्जा का उपयोग करने वाला व सर्वाधिक कार्बन डायोक्साइड का उत्सर्जन करने वाला देश है। ऊर्जा वहन मूल्य में वृद्धि को रोकने एवं उत्सर्जन को कम करने के लिए चीनी सरकार ने अस्थाई रूप से कई प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रो में बिजली आपूर्ति बंद कर दी है।

हाल में आई रिपोर्टें बताती हैं कि ऐप्पल के आपूर्तिकर्ता यूनिमाइक्रॉन टेक्नोलॉजी कॉर्प ने 26 सितंबर को घोषणा की थी कि स्थानीय सरकारों की सीमित बिजली नीतियों के कारण 26 सितंबर की दोपहर से 30 सितंबर की मध्यरात्रि तक उसके चीन स्थित उपक्रमों में उत्पादन बंद है।

यूनिमाइक्रॉन के चीन स्थित कार्यालय

इसी प्रकार ऐप्पल आईफोन के स्पीकर के आपूर्तिकर्ता एवं सूज़ो में विनिर्माण संयंत्रों के स्वामी कॉन्क्राफ्ट होल्डिंग को लिमिटेड ने घोषणा की थी कि 30 सितंबर की दोपहर तक पाँच दिनों के लिए उत्पादन रुका रहेगा और माँग को पूरा करने के लिए वस्तुसूची का उपयोग किया जाएगा।

ताइवान के होन हाइ प्रीसीज़न इंडस्ट्री को लिमिटेड (फॉक्सकॉन) के सहायक इसॉन प्रीसीज़न इंड को लिमिटेड ने एक बयान में कहा था कि कुन्शान स्थित सुविधा में उत्पादन 1 अक्टूबर तक रुका रहेगा। हालाँकि, रॉयटर्स के सूत्रों का कहना है कि इसका कुन्शान सुविधा के उत्पादन पर बहुत कम प्रभाव पड़ा।

एक सूत्र का कहना है कि फॉक्सकॉन को वहाँ की क्षमता के साथ थोड़ा समझौता करना पड़ा जिसमें गैर-ऐप्पल लैपटॉप कम्प्यूटर आते हैं लेकिन चीन में स्थित अन्य विनिर्माण केंद्रों के व्यापार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा। हालाँकि, एक और सूत्र का कहना है कि कंपनी को कुन्शान के कुछ कर्मचारियों की शिफ्ट सितंबर अंत से अक्टूबर आरंभ में लगानी पड़ी।

चीन की ऊर्जा आपूर्ति की समस्या

2011 से विश्व के सभी देशों ने मिलाकर जितना कोयला जलाया है, चीन ने उससे अधिक जलाया है। तेल निगम बीपी के अनुसार 2018 में विश्व के कुल ऊर्जा उपयोग का 24 प्रतिशत चीन में हुआ था। अपेक्षा है कि 2040 तक चीन शीर्ष पर बना रहेगा और विश्वभर के उपयोग में 22 प्रतिशत की भागीदारी रखेगा।

दिसंबर 2016 में चीनी सरकार ने एक अक्षय ऊर्जा विकास योजना जारी की। 2016-20 में सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए जारी इसकी पंचवर्षीय योजना का भाग थी यह योजना। इस योजना में प्रतिज्ञा थी कि 2030 तक अक्षय ऊर्जा एवं हैर-जीवाश्म ऊर्जा की भागीदारी को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है।

2017 में उत्तर-पश्चिमी चीन के शिनज़ियांग एवं गानसू प्रांतों में बनाई गई 30 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा का उपयोग ही नहीं हो पाया था। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ आवश्यकता थी, वहाँ बिजली को पहुँचाया नहीं जा सका जैसे पूर्वी चीन में शंघाई और बीजिंग जैसे कई घनी आबादी वाले बड़े शहरे हैं लेकिन वे सहस्रों किलोमीटर दूर स्थित हैं।

शिनज़ियांग में स्थित पवन ऊर्जा फार्म

चीन की बढ़ती व्यवस्था का केंद्र अभी भी कोयला ही है। 2019 में देश के कुल ऊर्जा उपयोग का 58 प्रतिशत भाग कोयले से आया था। 2020 में चीन ने 38.4 गीगावाट के नए कोयला बिजली संयंत्र स्थापित किए थे जो कि विश्व भर में स्थापित किए गए कोयला संयंत्रों का तीन गुना है।

हालाँकि, हाल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि विदेशों में अब चीन कोई नए कोयला बिजली संयंत्र स्थापित नहीं करेगा। देश ने निर्णय लिया है कि अन्य ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई जाएगी और 2060 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का संकल्प किया।

रॉयटर्स के अनुसार, कोयला आपूर्ति में कमी, कड़े उत्सर्जन मानक और संयंत्रों व उद्योगों से कोयले की माँग के कारण कोयला मूल्य रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं जिससे चीन भर में कम कोयला उपयोग के प्रयास हो रहे हैं।

जब से मार्च 2021 में इनर मंगोलिया में प्रांतीय प्राधिकारियों ने पहली तिमाही में प्रांत के ऊर्जा उपयोग को सीमित करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एलूमिनियम स्मेल्टर समेत कुछ भारी उद्योगों को कहा, तब से इस औद्योगिक क्षेत्र में बिजली मूल्य और उपयोग पांबिदियों में भारी वृद्धि देखने को मिली है।

चीन के ग्वांदोंग में एक प्रमुख निर्यातक को मई में इसी प्रकार के निर्देश मिले थे कि वह उपयोग कम करे क्योंकि गर्मी और सामान्य से कम पनबिजली के उत्पादन के कारण ग्रिड पर भार था। 2021 के पहले छह महीनों में मुख्य चीनी क्षेत्रों में से 30 में से मात्र 10 ही ऊर्जा उपयोग कम करने का लक्ष्य पूरा कर पाए थे।

यह डाटा देश की मूख्य नियोजन एजेंसी- राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (एनडीआरसी) से प्राप्त हुआ है। एजेंसी ने मध्य-सितंबर में यह भी घोषणा की थी कि जो क्षेत्र लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएँगे, उनपर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा और अपने क्षेत्र में ऊर्जा माँग को नियंत्रित करने का दायित्व स्थानीय अधिकारियों का होगा।

इसके फलस्वरूप, ज़ेजियांग, जियांग्सु, युनान और ग्वानदोंग के प्रांतों में स्थानीय सरकारों ने कंपनियों को ऊर्जा उपयोग या उत्पादन कम करने के लिए कहा है। कुछ बिजली आपूर्तिकर्ताओं ने अधिक उपयोग करने वालों को नोटिस जारी कर कहा है कि शिखर समय में वे अपना उत्पादन रोकें जो सुबह 7 से रात 11 बजे तक होता है।

कुछ को सप्ताह में दो या तीन दिन उत्पादन बंद रखने के लिए कहा गया है, वहीं कुछ से अगले नोटिस तक या किसी तय दिनांक तक बंद ही रहने को कहा गया है, जैसे पूर्वी चीन के तियान्जिन में सोयाबीन प्रसंस्करण संयंत्र 22 सितंबर से बंद हैं।

उद्योगों पर पड़ने वाला प्रभाव भारी है क्योंकि एलूमिनियम स्मेल्टिंग, इस्पात विनिर्माण, सीमेन्ट उत्पादन और ऊर्वरक उत्पादन जैसे उद्योग भारी ऊर्जा की माँग करते हैं। रिपोर्ट किया गया है कि कम-से-कम 15 सार्वजनिक रूप से व्यापार करने वाली चीनी कंपनियों ने दावा किया है कि बिजली अभाव के कारण उत्पादन रुका हुआ है।