रक्षा
चीन ने भारत के प्रत्युत्तर में 100 से अधिक पीसीएल-181 हॉवित्ज़रों को तैनात किया

पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने 100 से अधिक लंबी दूरी वाले पीसीएल-181 हल्के, ट्रक पर लगे हॉवित्ज़रों को भारत के साथ लगी सीमा के निकट तिब्बत में तैनात कर दिया है, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया।

पीएलए में स्रोतों का उद्धरण देते हुए रिपोर्ट कहती है कि भारत ने इस क्षेत्र में जो एम777 अत्यधिक हल्के हॉवित्ज़र के तीन रेजीमेन्टों की तैनाती की है, उसकी प्रतिक्रिया में चीन ने पीसीएल-181 हॉवित्ज़रों को तैनात किया है। दावा किया जा रहा है कि चीन की पीसीएल-181 भारत के एम777 से दोगुनी दूरी पर मार कर सकती है।

“भारत के साथ सीमाओं पर पीएलए ने 100 से अधिक पीसीएल-181 हल्के, ट्रक पर लगे हॉवित्ज़रों को तैनात किया है। चीन में विकसित इन लॉन्चरों की मारक दूरी क्षमता एम777 से दोगुनी है।”, स्रोत ने कहा। पीसीएल-181 चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज़ ग्रुप कॉरपोरेशन यानी नॉरिको द्वारा विकसित एक 155 मिमी व्हील्ड, स्वचालित हॉवित्ज़र है।

इस बंदूक का वज़न 25 टन है जिससे इसे लाना-ले जाना सरल हो जाता है। इससे पहले अगस्त में चीन के राजकीय प्रसारक सीसीटीवी ने रिपोर्ट किया था कि चीन ने सीमा पर पीसीएल-181 बंदूकों को तैनात किया है।

इससे पहले अप्रैल में सीसीटीवी ने दावा किया था कि पीसीएल-191 वाहन पर लगे हॉवित्ज़रों को शिनज़ियांग में समुद्र स्तर से 5,200 मीटर (17,000 फीट) की ऊँचाई पर तैनात किया गया है। चीनी सैन्य पत्रिका मॉडर्न शिप्स के अनुसार पीसीएल-191 की मारक दूरी क्षमता 500 किलोमीटर है।

पीसीएल-191

पिछले माह जब समाचार आया था किभारत ने वास्तविक नियंत्र रेखा (एलएसी) पर एम777 हॉवित्ज़रों को तैनात किया है तो चीन ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच पिछले वर्ष की मई से गतिरोध बना हुआ है।

रूस की टीएएसएस समाचार एजेंसी के एक प्रश्न के उत्तर में चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता हुआ चुनइंग ने भारत पर आरोप लगाया था कि वह आक्रामक नीति अपना रहा है और चीन किसी भी हथियार प्रतिस्पर्धा का विरोध करता है।

“भारतीय पक्ष लंबे समय से आक्रामक नीति अपनाता आ रहा है और अवैध रूप से एलएसी को पार करके उसने चीनी भूभाग पर अतिक्रमण का प्यास किया जिसके कारण ही भारत-चीन सीमा पर तनाव बना हुआ है।”, हुआ ने कहा।

“नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा में विवादास्पद सीमा क्षेत्रों में किसी भी हथियार प्रतिस्पर्धा का चीन विरोध करता है। राष्ट्रीय भूभागीय संप्रभुता की रक्षा के लिए हम दृढ़ रहे हैं और चीन-भारत सीमा क्षेत्रों में शांति व स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं।”, उन्होंने आगे कहा था।

पिछले वर्ष जैसी चीनी आक्रामकता देखी गई थी, जब उसने अभ्यास के बाद भारी संख्या में सैनिकों और हथियारों को भारतीय सीमा के निकच भेज दिया था, उसे हतोत्साहित करने के लिए भारत ने एलएसी पर एम777 हॉवित्ज़रों की तीन रेजीमेन्टों (एक रेजीमेन्ट में 18 बंदूकें होती हैं) को तैनात किया है।

27 सितंबर को एक प्रेस वार्ता में लेफ्टिनेंट जनरल टीके चावला ने कहा था, “जैसे बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) अग्रिम क्षेत्रोंं में सड़क संयोजकता को लेकर जाता है, वैसे हम अधिक स्थानों पर हमारी बंदूकों को तैनात कर सकते हैं।”

एम777 हॉवित्ज़र

हल्के वज़न के कारण 155 मिमी/52-कैलिबर वाले एम777 हॉवित्ज़रों को हेलिकॉप्टरों के माध्यम से हवाई मार्ग से अग्रिम स्थानों पर पहुँचाया जा सकता है। चावला ने यह भी बताया था कि चिनूक हेलिकॉप्टरों के माध्यम से बंदूकों (एम777 हॉवित्ज़रों) को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में ले जाने के लिए प्रशिक्षण जारी है।

भारत ने 2016 में यूएस के साथ 145 एम777 हॉवित्ज़रों के लिए समझौता किया था। 73.7 करोड़ डॉलर (5,000 करोड़ रुपये) के समझौते के तहत 20 बंदूकों को बीएई सिस्टम्स देगा और शेष हरियाणा के फरीदाबाद में इंडिया महिंद्रा डिफेन्स में जोड़ी जाएँगी। समझौते की लगभग आधी बंदूकें सौंपी जा चुकी हैं।

इस माह के आरंभ में सेना ने उजागर किया था कि भारत ने पूर्वी लद्दाख में के9 वज्र स्वचालित हॉवित्ज़रों की एक रेजीमेन्ट को तैनात किया है। “ये बंदूकें ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भी काम कर सकती हैं, मैदानी परीक्षण अत्यधिक सफल रहे थे। अब हमने एक पूरे रेजीमेन्ट को जोड़ दिया है, यह सच में सहायक होगा।”, सेना प्रमुख नरवाने ने कहा।

के9 की अधिकतम मारक दूरी क्षमता 28-38 किलोमीटर है और यह बर्स्ट मोड में 30 सेकंड में तीन गोले, इन्टेन्स मो में तीन मिनट में 15 गोले और सस्टेन्ड मोड में 60 मिनट में 60 गोले दाग सकता है। 155 मिमी/52-कैलिबर वाले के9 को दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनी हान्व्हा डिफेन्स की तकनीक से एल एंड टी ने गुजरात के हज़ीरा में बनाया था।

2017 में हस्ताक्षर किए गए समझौते के तहत एल एंड टी ने ऐसी 100 बंदूकें भारतीय सेना को दी हैं। समय सीमा से पहले ही बंदूकों को सौंप दिया गया था जिसमें अंतिम बंदूक फरवरी 2021 में सेना को सौंपी गई थी। एम777 और के9 के अलावा भारतीय सेना ने पुरानी 105 मिमी मैदानी बंदूकों को भी चीन के साथ एलएसी पर तैनात किया था।