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केंद्र सरकार दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया में तेज़ी लाएगी- रिपोर्ट

केंद्रीय वित्त मंत्रालय दो देश संचालित ऋणदाता बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए तैयार है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय शीघ्र ही बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन के लिए कैबिनेट की अनुमति लेगा।

प्रस्तावित परिवर्तनों के इन दो मामलों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश पर 20 प्रतिशत की सीमा को हटाना सम्मिलित हो सकता है।

अन्य परिवर्तन दो संबंधित ऋणदाताओं के कर्मचारियों के लिए अधिक आकर्षक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश कर सकता है।

ईटी को घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया, “हमने प्रासंगिक सुझावों को सम्मिलित किया है और शीघ्र अंतिम प्रस्ताव को अंतिम विचार और कैबिनेट के अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।”

रिपोर्टों ने अनुमान लगाया है कि निजीकरण के लिए चुने गए दो बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया हैं।

शुरुआती कुछ वर्षों के लिए केंद्र इन दोनों ऋणदाताओं में कम से कम 26 प्रतिशत भागेदारी रखेगा।

इसके अतिरिक्त, भागीदारी बिक्री की सीमा केवल निवेशकों से ब्याज का आकलन करने पर निश्चित की जाएगी। बाज़ार की वर्तमान स्थितियाँ भी इस निर्णय के पीछे एक प्रमुख कारक होंगी।