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केंद्र ने बांध से संबंधित आपदाओं को रोकने हेतु राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण गठित किया

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण शुक्रवार से लागू हो गया। यह बांध सुरक्षा से संबंधित मानकों को बनाए रखने, बांध से संबंधित आपदाओं को रोकने और इस संबंध में अंतर-राज्यीय मुद्दों को हल करने का प्रयास करता है।

गत वर्ष दिसंबर को संसद द्वारा पारित बांध सुरक्षा अधिनियम में कहा गया है कि एक राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण राज्य-स्तरीय बांध सुरक्षा संगठनों और बांधों के मालिकों के साथ सुरक्षा से संबंधित डाटा और कार्यप्रणाली के मानकीकरण के लिए संपर्क करेगा।

जल शक्ति मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जानकारी दी गई, “केंद्र सरकार इसके माध्यम से उक्त अधिनियम के तहत राष्ट्रीय प्राधिकरण की शक्तियों और कार्यों का निर्वहन करने हेतु राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के रूप में जाना जाने वाला एक प्राधिकरण स्थापित करती है। इसे 18 फरवरी 2022 को उस तिथि के रूप में निश्चित करता है, जिस दिन उक्त प्राधिकरण लागू होगा।”

इसमें कहा गया कि प्राधिकरण का नेतृत्व एक अध्यक्ष करेगा और पाँच सदस्यों द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी। प्राधिकरण का मुख्यालय दिल्ली में होगा और चार क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा समर्थित होगा।

केंद्र ने बांध सुरक्षा पर 22 सदस्यीय राष्ट्रीय समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष करेंगे।

बांधों की सुरक्षा या उनके संचालन से संबंधित मुद्दे अक्सर राज्यों के बीच विवाद का कारण रहे हैं। मुल्लापेरियार बांध को लेकर केरल और तमिलनाडु के बीच चल रहा विवाद इसका उदाहरण है।

बड़े बांधों के राष्ट्रीय रजिस्टर के अनुसार, देश में कुल 5,264 बड़े बांध हैं, जबकि 437 निर्माणाधीन हैं। बांध सुरक्षा अधिनियम देश में बांध सुरक्षा के लिए एक संस्थागत संरचना प्रदान करना चाहता है।