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केंद्र ने आयुध निर्माणी बोर्ड किया भंग, संपत्ति, कर्मचारी व प्रबंधन सात पीएसयू को सौंपे

केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने 1 अक्टूबर से आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) को भंग कर दिया है। साथ ही उसकी संपत्ति, प्रबंधन और कर्मचारियों को लगभग सात सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) में स्थानांतरित कर दिया है।

मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, “भारत सरकार ने एक अक्टूबर-2021 से प्रभाव के साथ इन 41 उत्पादन इकाइयों और पहचाने गए गैर-उत्पादन इकाइयों का प्रबंधन, नियंत्रण, कामकाज और रखरखाव सात सरकारी कंपनियों (पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व वाली) को सौंपने का निर्णय किया है।”

यह गौर किया जाना चाहिए कि गत वर्ष 16 मई को केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि वह ओएफबी के निगमीकरण द्वारा आयुध आपूर्ति में स्वायत्तता, जवाबदेही और दक्षता में सुधार करेगी। यह घोषणा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में की गई थी।

आदेश के अनुसार, आयुध निर्माणी बोर्ड (समूह ए, बी और सी) के सभी कर्मचारी, जो उत्पादन इकाई से संबंधित हैं और मान्यता प्राप्त गैर-उत्पादन इकाइयों को विदेशी सेवा की शर्तों पर नई रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (डीपीएसयू) में एकसाथ स्थानांतरित किया जाएगा।

उन्हें शुरू में दो साल की अवधि के लिए कोई प्रतिनियुक्ति भत्ता नहीं दिया जाएगा। नए डीपीएसयू अब विशेष रूप से अपने अवशोषित कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित नियमों और विनियमों को डिज़ाइन करेंगे।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) एक समिति बना रहा, जो इस मामले पर नए डीपीएसयू का मार्गदर्शन करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रस्तावित अवशोषण पैकेज आकर्षक हैं।

नए सात डीपीएसयू में इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड, म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड, ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड और यंत्र इंडिया लिमिटेड सम्मिलित हैं।