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मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ₹98,000 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त हुईं- केंद्र ने न्यायालय को बताया

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को शुक्रवार (25 फरवरी) को जानकारी दी कि मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के अंतर्गत अब तक 98,000 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ जब्त की जा चुकी हैं।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी माहेश्वरी और न्यायमूर्ति रवि कुमार की पीठ को सरकार ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सक्रियता के चलते बैंकों को बड़े पैमाने पर उनकी डूबी हुई राशि वापस मिल पाई है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया, “धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत अब तक 98 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इसमें से 55,899 करोड़ रुपये की राशि की प्राधिकारी की तरफ से पुष्टी की जा चुकी है कि इन्हें गलत तरीके से अर्जित किया गया था। कुछ बड़ी राशि ऐसी भी है, जिसके बारे में जाँच की जा रही है।”

ईडी ने बताया कि अब तक मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत कुल 930 मामले दर्ज किए गए लेकिन अब तक 21 लोगों को ही दोषी बताया गया है।

अब तक मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के विरुद्ध 242 याचिकाएँ दाखिल की जा चुकी हैं। इन लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने के लिए कानून का उपयोग किया गया।

इस पर तुषार मेहता ने कहा कि यह कानून 2005 में आया था लेकिन इसके अंतर्गत शिकायतें दर्ज होने की शुरुआत 2012-13 में हुई थीं।