व्यापार
अमेरिका-भारत के बीच होने वाले व्यापार समझौतों से क्या लाभ होगा भारत को

अमेरिका के ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिकी व्यापार समझौते को फिर से शुरू करने का संकेत दिया गया था, जिसके बाद अब दोनों देशों ने इसपर अमल करना शुरू कर दिया है।

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ मिलकर समझौते को अंतिम रूप देने में लगे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही समझौते पर मुहर लग जाएगी।

दोनों देशों के बीच होने वाले इस व्यापार समझौते से जहाँ भारत को व्यापार में विशेषाधिकार प्रणाली का दर्जा वापस मिलने के आसार हैं। वहीं अमेरिका भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्रों के नियमों में छूट पाने को लेकर आशान्वित है।

अमेरिका ने भारत से इसी साल जून में व्यापार विशेषाधिकार प्रणाली (जीएसपी) को वापस ले लिया था। जीएसपी का दर्जा मिलने से भारत को निर्णय क्षेत्र में 5.7 अरब डॉलर तक की कर में छूट मिल सकती है।

वहीं भारत ने अपने ई-कॉमर्स के नियमों में बदलाव करते हुए अमेरिका की कई ई-कॉमर्स कंपनियों पर शिकंजा कसा था। अमेरिका को लगता है कि ई-कॉमर्स के नियमों में आए बदलाव से उसका व्यापार क्षेत्र घटता जा रहा है।

इसके अलावा दोनों देश व्यापार मात्रा को भी बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इससे भारत में रोजगार सृजन की संभावनाएँ बढ़ेंगी और उत्पाद शुल्क में कमी आएगी।

भारत ने अपने व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र को भी जोड़ा है। वाणिज्य उद्योग मंत्री गोयल ने बैठक में कृषि क्षेत्र के आयात-निर्यात पर भी चर्चा की। माना जा रहा है कि इससे भारत के फलों की निर्यात में बढ़ोतरी होगी। अमेरिका अनार और आम जैसे फलों को अपने बाज़ार में उतारने की अनुमति देगा, वहीं भारत भी अमेरिका में उत्पन्न होने वाला अल्फाल्फा घास को आयात करेगा।

दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्रों में होने वाले इस समझौते से भारतीय किसानों के फसल खरीदी का मूल्य बढ़ने के संभावनाएँ हैं। साथ ही किसानों के बीच इन फसलों के प्रति आकर्षण भी बढ़ेगा।

भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते में पुरानी कई वस्तुओं और समस्याओं पर ध्यान दिया गया है। पहले के टूटे हुए समझौते को फिर से पटरी पर लाने के लिए भी बातचीत चल रही है।

अमेरिका ने भारत के साथ चिकित्सा सामानों को लेकर किए गए सभी समझौतों के कुछ दिन पहले ही तोड़ दिया था। उम्मीद जताई जा रही है कि इस समझौते से दोनों देश फिर से उन समझौतों पर काम करेंगे ‌।

अमेरिका चिकित्सा क्षेत्र में हृदय इनोवेशन स्टंट सहित घुटना प्रत्यारोपण जैसे समझौते को लेकर भी झुकने को तैयार है, जिसके तहत अमेरिका द्वारा किए गए मूल्य नियंत्रण को हटाया जा सकता है। इससे भारत के चिकित्सा क्षेत्र की विस्तार होने उम्मीद जताई जा रही है।

व्यापार समझौते के अतिरिक्त माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में गंभीर मुद्दों पर भी अमेरिका भारत के साथ रहेगा और उन मुद्दों पर हस्ताक्षर करेगा जो बहुत पहले से अटका है। माना जा रहा है कि भारत जल्द ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल हो सकता है।

इन सबके अलावा जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका भारत का साथ देगा। साथ ही आतंकवाद के खात्मा करने में भी सहयोग करेगा।