व्यापार
नेस्ले पर ग्राहकों तक जी.एस.टी. का फायदा न पहुँचाने और 100 करोड़ से अधिक की मुनाफ़ाखोरी का आरोप

प्रधान खाद्य ब्रांड नेस्ले घोर मुसीबत में है। नेस्ले इंडिया के विरुद्ध मुनाफ़ाखोरी के लिए की गई शिकायत की जाँच में मुनाफ़ाखोरी-रोधी महानिदेशालय ने पाया कि कंपनी 100 करोड़ से अधिक की मुनाफ़ाखोरी में लिप्त है, न्यूज़ 18 ने रिपोर्ट किया।

जी.एस.टी. परिषद 175 उत्पादों पर जी.एस.टी. दर में कटौती को 15 नवंबर 2017 से प्रभाव में ले आई थी और सरकार ने कंपनियों से उत्पादों के मूल्यों में कटौती करने के लिए कहा था जिससे इस नियम का फायदा ग्राहकों तक पहुँच सके। इसके फलस्वरूप सरकार ने राष्ट्रीय मुनाफ़ाखोरी-रोधी प्राधिकरण (एन.ए.ए.) की स्थापना की जो कंपनियों द्वारा अत्यधिक मुनाफ़ा कमाने के मामलों की जाँच करे।

मुनाफ़ाखोरी-रोधी महानिदेशालय को कार्य मिला था, मुनाफ़ाखोरी की शिकायतों पर प्रारंभिक जाँच कर, अपने निष्कर्षों की एक रिपोर्ट बनाकर एन.ए.ए. के सामने प्रस्तुत करने का। मुनाफ़ाखोरी-रोधी महानिदेशालय की रिपोर्ट पर समीक्षा और आरोपी के पक्ष की सुनवाई के बाद शीर्ष समिति एक निष्कर्ष पर पहुँचती है।

नेस्ले इंडिया, जिसके अधीन मैगी और नेस्कैफ़े जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड हैं, ने शिकायत पर प्रतिक्रिया दी है। इसके प्रवक्ता ने द हिंदू बिज़नेस लाइन  से कहा कि कंपनी ने एक ‘ज़िम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिक’ की तरह जी.एस.टी. के फायदों को ग्राहकों तक पहुँचाया है। “मैं फिर से दोहराना चाहूँगा कि कई बार ऐसी परिस्थिति होती है कि हम मूल्य घटाकर या उत्पाद का वज़न बढ़ाकर ग्राहकों तक फायदा नहीं पहुँचा पाते, ऐसी स्थिति में बची हुई राशि को हम आगे के समय में ग्राहकों को फायदा पहुँचाने के लिए अलग रख देते हैं, इसे ना बिक्री में गिनते हैं और न मुनाफ़े में।”

कंपनी ने यह भी उल्लेखित किया कि इसने ग्राहक कल्याण कोष में 16.58 करोड़ रुपए की प्रोविज़नल राशि जमा की है। अगर कंपनी यह नहीं चिह्नित कर पाती कि किन ग्राहकों तक जी.एस.टी का फायदा पहुँचाना है, तो उस राशि के भी इस कोष में जमा कर देती है। “अगर कंपनी द्वारा बिना कर लाभों को पहुँचाए पैसा कमाया जाता है, तो यह ग्राहकों तक जाएगा और अगर यह संभव नहीं हुआ तो ग्राहक कल्याण कोष में जमा किया जाएगा।”, पार्टनर व अप्रत्यक्ष कर के प्रमुख जो के.पी.एम.जी में ऑडिटर हैं, सचिन मेनन ने एक साक्षात्कार में मिंट  को कहा। “हालाँकि इससे संबंधित निर्देश अभी जारी किए जाने हैं।”