व्यापार
इंडिया आईएनसी के साथ फिर से जुडने का मोदी का प्रयास वही है जो उन्हें नसीहत दी गयी है

प्रसंग
  • मोदी ने अब फैसला किया है कि व्यापार से दूरी रखने से काम नहीं चलता है और यह अनुत्पादक भी हो सकता है।
  • वास्तव में, उन्हें मुख्यधारा के अच्छे व्यापार के अवसर का उपयोग करना चाहिए और उन अवसरों को भारत की अगली विकास कहानी की धुरी बनाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में 29 जुलाई को एक समारोह में  घोषित करते हुए कि, “हम … व्यवसायियों के साथ खड़े होने से नहीं डरते हैं”, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अंततः व्यापार के लिए अनुकूल के रूप में नहीं देखा जाने वाला स्वयं लगाया गया मानसिक बंधन तोड़ दिया है।

आश्चर्य यह नहीं है कि उन्होंने बयान दिया बल्कि आश्चर्य इस तथ्य में निहित है कि उन्हें लगा कि उन्हें खुलकर कहना था कि जब ज्यादातर लोग, जिन्होंने गुजरात के दिनों से उन्हें देखा है, उन्हें पता है कि वह आम तौर पर व्यापारियों के लिए सुलभ हैं, हालांकि विशेष पक्षों के लिए नहीं।

कॉर्पोरेट भारत से दूरी बनाए रखने का स्वयं लगाया हुआ अंकुश शायद 2014 के चुनवी अभियान से शुरू हुआ था, जब अरविंद केजरीवाल ने “अदानी और अंबानी” का राग अलापना शुरू किया था। इसके बाद 2015 में राहुल गांधी ने “सूट-बूट-की-सरकार” बताकर उपहास किया था। तब से, मोदी व्यवसायियों के अनुकूल होने के इच्छुक नहीं हैं, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को गरीबों की पार्टी के रूप में उभारने के अपने प्रयासों को देखते हुए।

उत्तर प्रदेश के एक समारोह में, ऐसा लगा था मानो मोदी ने फैसला कर लिया था कि अगर आप व्यापार से संबंध बनाने की नकारात्मक धारणाओं से नहीं उबर सकते हैं, तो कम से कम उसे मान के जो कुछ लाभ मिल रहा है उसे बटोर ले।

अन्य बातों के अलावा, मिंट ने उन्हें यह पूछते हुए उद्धृत किया: “क्या हमें उनका (व्यवसायियों का) अपमान करना चाहिए? क्या हमें उन्हें चोर और लुटेरे कहना चाहिए?”

यहां तक कि इस बात पर जोर देते हुए कि वह गलत काम करने वाले किसी भी व्यवसायी को कोई शरण नहीं देंगे (“उसे या तो देश से भागना होगा या जेल में अपना जीवन व्यतीत करना होगा”), उन्होंने कहा कि उनका विवेक स्पष्ट था और “आप किसी के साथ खड़े होकर भ्रष्ट नहीं होते।” कांग्रेस शैली की घनिष्ठता पर अप्रत्यक्ष हमले में, उन्होंने आगे कहा: ” उन लोगों को इतना डर होता है कि वह जनता के सामने मिलना नहीं चाहते, लेकिन पर्दे के पीछे सबकुछ करेंगे।”

यह सुनिश्चित करने के लिए, मोदी ने पिछले महीने बदलाव करना शुरू किया, जब उन्होंने मुंबई में कॉर्पोरेट भारत (इंडिया आईएनसी) के साथ अपना पहला खुला सत्र आयोजित किया। इस बार उन्होंने व्यापारियों को सीधे यह बताते हुए उनकी इस बात को रेखांकित किया कि उन्होंने (मोदी) उनका (व्यापारियों) बहिष्कार करने का विचार नहीं किया था।

किसी भी प्रधानमंत्री के लिए व्यापार को दूर रखकर खराब छवि को बनाने की तलाश करना हमेशा गलत साबित होता है। यह दिखाकर कि यह सब सरकार द्वारा ही किया जा सकता है, आप कुछ भी हासिल नहीं कर सकते- न विकास न नौकरियां। कोई भी देश एक मजबूत और नैतिक व्यापारिक वातावरण के बिना समृद्ध नहीं हो सकता है और इसके लिए व्यापारियों के साथ नियमित बातचीत करना आवश्यक है।

इस वार्ता की अत्यंत आवश्यकता थी, जब मोदी व्यापार से नई उम्मीदें करने की कोशिश कर रहे थे, जहाँ उन्हें अब सीधे और संकीर्ण होने, नैतिक रूप से बढ़ने, अपने करों का भुगतान करने और कम काले धन से काम चलाना है। इससे भी बदतर, उन्हें दिवालियापन अदालत में खड़ा कर पिछली गलतियों की कीमत चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

यदि आप चाहते हैं कि कॉर्पोरेट भारत खुद को सुधारे तो आपको इससे ज्यादा बात करने की ज़रूरत है। अब आशा है कि, इस छूटी हुई वार्ता को बहाल कर दिया गया है। उम्मीद है कि यह व्यापारियों के साथ मोदी के बिगड़ते रिश्तो को संभाल लेगा।

जैसा कि हमने जून में स्वराज्य में उल्लेख किया था, “कॉर्पोरेट भारत के साथ नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा शायद इससे ज्यादा कभी कम नहीं हुई है। ऑन रिकॉर्ड, ज्यादातर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सरकार और इसके सुधारों की भरपूर प्रशंसा करते है जबकि ऑफ रिकॉर्ड, वे अस्पष्ट रूप से बुदबुदाते हैं कि किस प्रकार सरकार को अर्थव्यवस्था की बड़ी समस्याओं को अभी ठीक करना है। यह कहना कि वे मोदी से निराश है, वास्तिविकता पर पर्दा डालने जैसा है।

28 सीईओ द्वारा पूर्ण किया हुआ, एक बिजनेस स्टैंडर्ड  पोल ने यह संकेत दिया है कि सरकार को पिछले साल किए गये अपने वादों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए और अधिक योजनाओं की घोषणा नहीं करना चाहिए। एक वरिष्ठ संपादक ने लिखा है कि, “चुनिंदा सीईओ के बीच नकारात्मक चर्चा बढ़ रही है।”

मोदी ने अब फैसला किया है कि व्यापार से दूरी बनाए रखने से काम नहीं चलता है और यहाँ तक कि यह अनुत्पादक भी हो सकता है। वास्तव में, उन्हें मुख्यधारा के अच्छे व्यापार के अवसर का उपयोग करना चाहिए और उन अवसरों को भारत की अगली विकास कहानी की धुरी बनाना चाहिए।

जगन्नाथ स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। वह @TheJaggi पर ट्वीट करते हैं।