व्यापार / संस्कृति
बाज़ार में छाया देसी दीयों का प्रकाश- चीनी उत्पादों से अधिक हुई बिक्री, 95 प्रतिशत पटाखे भी स्वदेशी

भारतीय त्योहारों में चीनी उत्पादों की घुसपैठ रोकने की जागरुकता पिछले कुछ सालों में आई है। इसके फलस्वरूप बंगाल में सरकारी एजेंसियों व ज़मीनी स्तर के उत्पादकों के प्रयासों के कारण इस वर्ष भारतीय पटाखों व दीयों ने चीनी उत्पादों से अधिक ध्यान आकृष्ट किया, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने रिपोर्ट किया।

हालाँकि लाइटिंग के क्षेत्र में अभी भी चीनी उत्पादों की ही बिक्री अधिक हुई। घरेलु उत्पादों को चीनी उत्पादों पर बढ़त दिलाने का श्रेय सरकारी एजेंसियों की कड़ी चौकसी, विक्रेताओं के प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य व उत्पादकों के नवाचारों को जाता है। इस वर्ष बाज़ार में 95 प्रतिशत पटाखे स्वदेशी हैं, जिनमें से अधिकांश तमिल नाडू से शिवकाशी से निर्मित हैं, पश्चिम बंगाल के फायर क्रैकर विकास संघ के अध्यक्ष बबला रॉय ने बताया।

पिछले कुछ सालों में चीनी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा में दीया विक्रेता भी संघर्ष कर रहे थे। “इस वर्ष दीयों की अच्छी बिक्री हुई है। हमने तो अपने दीयों को अधिक आकर्षक बनाया ही परंतु ग्राहकों ने भी फिरसे मिट्टी के दीयों की परंपरा की ओर रुख किया है। लोगों में यह जागरुकता आई है कि मिट्टी के दीयों के बिना त्योहार की विशेषता खो जाती है।”, एक दीया विक्रेता ने बताया जिसने पिछले कुछ दिनों में 15,000 दीये बेचे।