व्यापार
चीन को भाया हरियाणा का स्वाद- पड़ोसी देश में राज्य के चावल की सर्वाधिक माँग

बीजिंग से व्यापार का द्वार खुलने के बाद भारत ने चीन को 100 टन गैर-बासमती चावल का निर्यात किया है जिसमें सभी राज्यों में से हरियाणा का योगदान सर्वाधिक है, द ट्रिब्युन  ने रिपोर्ट किया।

भारत के निर्यातक निकट भविष्य में 500 टन और अधिक चावल की आपूर्ति की तैयारी में हैं, जिसमें भी अधिकांश भाग हरियाणा के चावल का होगा। चीन द्वारा स्वीकृत गैर-बासमती चावल के उत्पादकों में से उत्तरीय राज्यों में हरियाणा के उत्पादक अव्वल हैं। चीन ने 20 मीलों को स्वीकृत किया है जिसमें से 12 हरियाणा में है। अन्य राज्यों में से पंजाब की चार, उत्तर प्रदेश की दो व दिल्ली एवं जम्मू-कश्मीर की एक-एक मील को स्वीकृत किया गया है।

प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) से भंडारण तक अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग के कारण हरियाणा और पंजाब चीनी विक्रेताओं की पहली पसंद है। अखिल भारत चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष विजय सेतिया ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर भारत, विशेषकर कि हरियाणा और पंजाब ही चावल के मुख्य पूर्तिकार रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब की मीलों को अन्य राज्यों की मीलों पर बढ़त हासिल है क्योंकि सुविधाओं के आधुनिकीकरण पर उन्होंने खासा निवेश किया है जिससे आयातक देशों के मानदंडों पर खरा उतरा जा सके।

गैर-बासमती चावल का पहला प्रेषण इस वर्ष सितंबर में नागपुर से भेजा गया था।