व्यापार
जियो के आने से ड्युअल सिम का पतन, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया के ग्राहकों पर पड़ेगा प्रभाव

आशुचित्र- सरकार को दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को आसान शर्तोंं पर कार्य करने देने के लिए तैयार होना चाहिए जिससे इस उद्योग में प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

कुछ 18 महीनों पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने एक प्रेज़ेंटेशन दी थी जिसमें यह बताया गया था कि जब बाज़ार का रुझान वॉइस से डाटा की ओर बढ़ेगा तब ड्युअल सिम बाज़ार का पतन होगा।

इस प्रेज़ेंटेशन द्वारा 2020-21 तक रिलायंस जियो को आधे बाज़ार पर कब्ज़ा जमाने का लक्ष्य देने के साथ-साथ यह भी पूर्व-सूचित किया गया था कि उद्योग का वॉइस राजस्व 1.5 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 0.5 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। अन्य 3 लाख करोड़ रुपए का राजस्व उद्योग को डाटा से मिलेगा।

इसमें सिम कार्ड बेस में भी भारी गिरावट का पूर्वानुमान किया गया था, यहाँ तक कि 30 करोड़ सिम कार्ड त्यागे जाएँगे क्योंकि जब एक ही सेवा प्रदाता डाटा और वॉइस दोनों की सेवा देगा तब दूसरी सिम का कोई प्रयोजन नहीं रहेगा।

जैसा आज का दृश्य है, यह पूर्वानुमान जियो की प्रतिस्पर्धात्मक कंपनियों- एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के लिए घातक सिद्ध हुआ है। अब यह कंपनियाँ अपने नुकसान की भरपाई करने के लिए कम राजस्व देने वाले ग्राहकों को त्यागकर रिचार्ज प्रशुल्क बढ़ाने की तैयारी में हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 6 करोड़ 2जी वॉइस ग्राहकों और कई दो सिम वाले ग्राहकों को जल्द ही त्याग दिया जाएगा, इनमें से आधों को छः महीनों के भीतर ही।

वर्तमान में एयरटेल और वोडाफोन आइडिया दोनों ही 2जी वॉइस ग्राहकों पर आधारित हैं, जहाँ एयरटेल के 34.6 करोड़ ग्राहकों में से 25 करोड़ (72 प्रतिशत) 2जी सेवा के लाभार्थी हैं, वहीं वोडाफोन आइडिया के 44.2 करोड़ ग्राहकों में से 34.6 करोड़ (78 प्रतिशत) इस सेवा का उपभोग करते हैं। इसके विपरीत जियो की कोई 2जी सिम नहीं है और इसके 25 करोड़ ग्राहक 4जी सेवा का उपभोग करते हैं। इससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में किसकी बाज़ार में भागीदारी कम होगी जब आइडिया और वोडाफोन आइडिया दोनों ही अपने निम्न-राजस्व ग्राहकों को त्यागेंगे।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने 26 नवंबर को रिपोर्ट किया कि प्रति ग्राहक राजस्व जियो के लिए 132 रुपए का है, वहीं एयरटेल का 100 रुपए व वोडाफोन आइडिया का 88 रुपए है।

लेकिन यदि रिलायंस का पूर्वानुमान कि 2020-21 तक 30 करोड़ सिम कार्ड त्यागे जाएँगे, सही निकला तो एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ही अधिकांश ग्राहक खोएँगे जिससे जियो बाज़ार में खुद को शीर्ष स्थान पर जल्द ही स्थापित कर सकता है।

बाज़ार के इस परिवर्तन का असर फोन निर्माताओं पर भी पड़ेगा जिन्हें ड्युअल सिम फोनों का उत्पादन कम कर एकल सिम फोनों का उत्पादन बढ़ाना होगा।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 75 करोड़ ग्राहकों के पास एक सिम ही है और बचे 35-40 करोड़ ग्राहक दो सिमों का प्रयोग करते हैं।

इस परिवर्तन से ग्राहक बेस में भारी नुकसान होगा और भविष्य में प्रतिस्पर्धा इसपर होगी कि प्रति ग्राहक वे कितना राजस्व एकत्रित कर पाते हैं, न कि नए ग्राहकों के माध्यम से विस्तार के लिए। उद्योग को अपने शहरी बेस का विस्तार करना होगा। वर्तमान में भारतीय दूरसंचार विनियमक प्राधिकरण (ट्राई) के अनुसार शहरी ग्राहकों के पास 64.7 करोड़ सिम हैं और ग्रामीण ग्रहकों के पास 51.9 करो़ सिम जिससे कुल मिलाकर 116.6 करोड़ सिम हैं। अगर 30 करोड़ सिमें त्यागी जानें वाली हैं तो आने वाले समय में कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। इसके साथ ही रिलायंस अब केबल घरों में भी घुस रहा है, यह हैथवे और डेन नेटवर्क के अधिकांश स्टेक्स भी खरीद चुका है।

सरकार को दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को आसान शर्तोंं पर कार्य करने देने के लिए तैयार होना चाहिए जैसे कि स्पेक्ट्रम देय राशि जिससे इस उद्योग में प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

जगन्नाथन स्वराज्य में संपादकीय निदेशक हैं। वे @TheJaggi के द्वारा ट्वीट करते हैं।