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पुतिन ने भारत को रूस से जोड़ने वाले गलियारे को महत्वाकांक्षी परियोजना बताया

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के रास्ते भारत को रूस से जोड़ने वाले प्रस्तावित अंतर-राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) को ‘असलियत में महत्वाकांक्षी परियोजना’ के रूप में वर्णित किया।

मध्य एशिया और ईरान के नेताओं की उपस्थिति में बुधवार को छठे कैस्पियन सागर शिखर सम्मेलन को संबोधित कर पुतिन ने आईएनएसटीसी का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग से ईरान और भारत में बंदरगाहों तक परिवहन धमनी के रूप में इस परियोजना का वर्णन किया, जो 7,200 किलोमीटर लंबी है।

आईएनएसटीसी का उद्देश्य कज़ाकिस्तान सहित कैस्पियन सागर क्षेत्र के देशों को जोड़ना है।

पुतिन ने शिखर सम्मेलन में कहा, “हमें लगता है कि कैस्पियन सागर क्षेत्र के परिवहन और रसद वास्तुकला में सुधार के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। सबसे पहले हम अंतर-राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर बनाने के बारे में बात कर रहे हैं, जिसके बारे में हमारे सहयोगियों ने वार्ता की है। मैं इन दृष्टिकोणों से पूरी तरह सहमत हैं। यह असलियत में एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।”

उन्होंने कहा, “कैस्पियन तटवर्ती राज्यों के बीच परिवहन सहयोग पर एक समझौता गत वर्ष लागू हुआ था। इसका उद्देश्य कैस्पियन सागर क्षेत्र को एक प्रमुख अंतर-राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स हब में बदलना है, जिसे इस गलियारे के जल्दी से लॉन्च करने की सुविधा के लिए डिज़ाइन किया गया है।”

लंबे समय में यह परियोजना ना केवल स्वेज नहर का बल्कि चीन के विवादास्पद बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का भी विकल्प होगी।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूरेशियन क्षेत्र में बीआरआई संयोजकता परियोजनाएँ मध्य एशियाई राज्यों और रूस के माध्यम से यूरोप को चीन से जोड़ती हैं और बीजिंग को यूरेशियन क्षेत्र के संसाधनों तक पहुँच प्रदान करती हैं।

भारत बीआरआई का विरोध कर रहा है क्योंकि चीनी परियोजना इसकी संप्रभुता का उल्लंघन करती है।