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जयराम आचार्य गायक बनने आए लेकिन सितार वादन से गीतों को सजाया— जाने वो… (19)

4 जुलाई 1928  को तमिलनाडु में जन्मे, जयराम आचार्य के परिवार में सितार और वायलिन का बोलबाला था। लेकिन उनका 1939 में मुंबई आने का कारण हिंदी फिल्मों में गायक बनना था। इसी के चलते उन्होंने “नया ज़माना आया लोगों” (मेरा संसार, 1941) गीत के लिए कोरस में भी कोशिश की थी।

वर्ष 1946  में जयराम को मौका मिला म्यूज़िक कंपनी एचएमवी में शामिल होने का जहाँ उन्होंने, पंडित रविशंकर जैसे सितार वादकों को देखकर सीखा और अपनी वादन शैली में काफी परिवर्तन किया। कुछ समय बाद वह प्रसिद्ध राजकमल कला मंदिर में शामिल हो गए जहाँ उन्हें “तीन बत्ती चार रास्ता” के गीत “अपनी अदा पर हूँ फ़िदा” में परदे पर आने का मौका मिला। 

जयराम आचार्य हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया के एक ऐसे चमकते सितारे थे जिनको हर संगीतकार अपने गानों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता था।

 हिंदी फिल्म संगीत जगत के नामचीन सितारे जयराम आचार्य ने हज़ारों गीतों और फिल्मों की पृष्ठभूमि में सितार का कमाल सुनाया था। जयराम आचार्य वह व्यक्ति थे जिन्होंने सलिल चौधरी की ऑल टाइम क्लासिक “परख” के “ओ सजना, बरखा बहार आई” में अद्भुत परिचयात्मक सितार की भूमिका निभाई थी।

आचार्य, जो बाद में पंचम दा की टीम के स्थाई सदस्यों में से एक थे, ने “छोटे नवाब” (1961) में आरडी बर्मन के पहले गीत “घर आजा घिर आए” में भी सितार वादन किया था।

जयराम आचार्य के सैकड़ों यादगार गीतों में “अजी बस शुक्रिया” (1958), फिल्म शारदा (1957) से “ओ चाँद जहाँ वो जाए”, फिल्म गुड्डी (1971) से बोले रे पपिहरा और आंधी (1975) से “तेरे बिना ज़िन्दगी से” आपको अब सितार का संगीत अपने याद आने लगेगा। 

उनको अपने प्रसिद्ध निजी एल्बमों जैसे सितार गोज़ लैटिन (एनोक डेनियल के साथ), जिंगल बेल्स आदि के लिए काफी सराहना मिली थी। 1968 में उन्होंने बोसा नोवा संगीत का एक एल्बम जारी किया था जिससे प्रेरणा लेकर एंटोनियो जोबिम क्लासिक को निकाला गया था।

मुंबई का यशवंतराव नाट्य मंदिर, माटुंगा में 15 फरवरी 2009 को एक विशेष संगीत कार्यक्रम में जिन दो महान वाद्ययंत्र वादकों का उत्सव मनाया गया उनमें से एक थे सितार वादक जयराम आचार्य और बहुमुखी प्रतिभावान बुर्जोर लॉर्ड। फिल्म संगीतकारों के लिए स्वर आलाप के प्रोत्साहन और समर्थन का दावा करने के लिए यह एक और शाम थी। आचार्य सिने संगीतकारों की एसोसिएशन, मुंबई के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।

हिंदी फिल्म संगीत उद्योग के प्रख्यात और शानदार सितार वादक जयराम आचार्य का  बुधवार 5 अप्रैल 2017 को निधन हो गया।