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पंचम के शेष चार रत्न जिनके बिना “म्यूज़िक सिटिंग” पूरी नहीं होती थी— जाने वो भाग-8

जाने वो कैसे लोग थे शृंखला में पिछले सप्ताह हम पंचम का 81वाँ जन्मदिन सप्ताह मना चुके हैं जिसमें पंचम के नवरत्नों की तिकड़ी के बारे में हम यहाँ और स्ट्रिंग सेक्शन के दो महारथियों के बारे में यहाँ पढ़ चुके हैं। बाकी चार रत्न हैं- होमी मुल्लन, देवीचंद, चंद्रकांत और अमृत राव जो रिदम सेक्शन में मारुति राव साहब के साथ काम किया करते थे। ये सर्वविदित सत्य है कि इन नवरत्नों के बिना पंचम दा की “म्युज़िक सिटिंग” नहीं पूरी होती थी

अमृत राव काटकर जो सबके काका थे, ने “बिहाइंड द कर्टेन” पुस्तक में कहा, “मुझे पंचम की टीम में 1962 में मारुति राव, मेरे दोस्त की वजह से शामिल किया गया था। मैं सुबह-शाम पंचम के बंगले पर जाया करता था जहाँ किसी नए गीत की तैयारी के लिए उनकी टीम इकट्ठी हुआ करती थी” 

शुरुआत में अमृत तबला और हारमोनियम बजाया करते थे। और फिर आने वाले 30 सालों में अमृतराव काका ने रेसो रेसो जैसे एक छोटे से वाद्य यंत्र को पंचम की सोच और मारुति राव की रिदम से जोड़कर हमेशा के लिए अमर बना दिया।

पंचम दा के संगीत से रेसो रेसो यानि अमृतराव काका को हटा दे तो यकीन मानिए पंचम दा के संगीत की रिदम अपनी आत्मा खो देगी। फिल्म पड़ोसन से लेकर पंचम की आखिरी फिल्म तक, अमृतराव काका और उनका रेसो रेसो अपरिहार्य है

ज्वेल थीफ के गाने “होठों पे ऐसी बात” के इंट्रो में जो गोंग की आवाज़ 0.03 सेकंड पर आप सुनेंगे वह हथोड़े से नहीं अमृत काका के हाथ का कमाल है। हाथ से क्यों बजाना पड़ा था वह कहानी किसी और दिन पर पहले सुनिए यह शानदार गीत जिसमें आप गोंग के साथ भूपी दा की आवाज़ भी सुन सकते हैं जो शालू कहकर पुकारते हैं।

“चुरा लिया है” गीत का ज़िक्र इस शृंखला में कई बार हो चुका है और आज हम दोबारा करने वाले हैं। जिस आवाज़ को सुनकर सब चौंक गए थे वह काँच के गिलास पर चंद्रकांत सतनाक ने ही एक छोटी धातु की छड़ी का इस्तेमाल कर निकाली थी। आपको आश्चर्य होगा कि इस में गीत वायलिन पर थे उत्तम सिंह।

(बाएं से दाएँ) होमी मुल्लन, रंजित गजमेर, कावस लॉर्ड, चंद्रकांत सतनाक, देवीचंद, रवि गुर्टू, चरण जीत सिंह (साभार- ह्यूमन फैक्टर का फेसबुक पृष्ठ)

देवीचंद चौहान ढोलक के मास्टर थे जो आवश्यकता पड़ने पर तबला भी बजाते थे। उनकी बजाई गई ढोलक कुछ समय पहले उनके ही एक साथी उदय दुबे जी ने प्रस्तुत की थी-

कुछ समय बाद तुम्बा देवी चंद जी का ख़ास हो गया था जिसके बिना पंचम अपना कोई भी गीत तैयार नहीं करते थे। यादों की बारात, आपकी कसम, हीरा पन्ना आदि के गीतों में आप उनको सुन सकते हैं। उनकी ताल, लय और टाइमिंग का एक उदहारण नितिन शंकर द्वारा देखते हैं।

होमी मुल्लन पंचम गैंग के ख़ास सदस्य थे जिन्हें यूँ ही गाते रहो (सागर), आओ ना गले लगाओ ना (मेरे जीवन साथी) और बचना ऐ हसीनों (हम किसी से कम नहीं) जैसे लोकप्रिय गीतों को अपना स्पेशल “टच” देने के लिए जाना जाता है। 1965 के आसपास कोलकाता से मुंबई आ जाने के बाद, उन्होंने हिंदी फिल्म के लिए अकॉर्डियन, ऑर्गन, और पियानो जैसे वाद्य यंत्र कई संगीतकारों के लिए बजाए।

अपने ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री “होमी मुल्लन- दि अनसंग हीरो” के अंतिम दृश्य में पर्क्युशनिस्ट होमी दा वीरान-सी आँखों से कैमरे की तरफ मुड़कर एक सवाल करते हैं, “क्या आपने कभी अपने पसंदीदा गीतों में वाद्ययंत्र बजाने वाले कलाकारों के नामों का पता लगाने की जहमत उठाई है?” 

यह एक ऐसा सवाल है जो कई लोगों को हैरान कर सकता है और किंतु अगर आपने इस शृंखला के सभी भाग पढ़े हैं तो होमी दा के इस सवाल का जवाब मुस्कुरा कर दे सकते हैं।