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मनोहारी दादा के सेक्साफोन ने कैसे अमर किया सैकड़ों गानों को— जाने वो कैसे भाग-15

आप किसी पुराने गाने को याद करते हैं तो कई बार उस गाने की शुरुआत में या उसके इंटरल्यूड में बजे किसी साज की धुन सबसे पहले आपके मन में गूँजती है। पुराने जमाने की राजेंद्र कुमार, साधना की सुपरहिट फिल्म ‘आरजू’ की याद है आपको? पर गीत तो याद होंगे ही।

उनमें भी एक गाना जो इतने बरसों के बाद आज भी लोगों के सिर पर चढ़ा हुआ है। ‘बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता है ’की याद आती है तो हमारे ज़ेहन में उस वाद्य की आवाज गूंज उठती है जो पतझड़ के मौसम में सूनी वादियों के विस्तार में नायिका की तड़प साकार होकर देती है। 

1.08 पर आप सुनिए इस सेक्सोफोन को जो मनोहारी दादा का ही कमाल था।

यह वाद्य है सेक्सोफोन जिसने ऐसे ही सैकड़ों गानों को अमर कर दिया और इसके मास्टर थे मनोहारी दादा। जैसे देवानंद की क्लासिक फिल्म ‘गाईड’ का किशोर कुमार और लता मंगेशकर का गाया गाना ‘गाता रहे मेरा दिल’ और उन्हीं की अभिनीत ‘माया’ का संगीतकार सलिल चौधरी के निर्देशन में बना लता का गाया गाना ‘जा रे जारे उड जा रे पंछी’।

शंकर जयकिशन, एसडी बर्मन, ओपी नैय्यर, मदन मोहन, कल्याणजी-आनंदजी, सलिल चौधरी और आरडी बर्मन के वे पसंदीदा साजिंदे थे। आरडी बर्मन की तो संगीत मंडली के वे प्रमुख सदस्य थे। वे उनके साजिंदे भी रहे, अरेंजर भी रहे और सहायक निर्देशक भी रहे।

पंचम की पहली फिल्म ‘छोटे नवाब’ से लेकर उनकी आखरी फिल्म ‘1942 – अ लव स्टोरी’ तक दोनों का साथ रहा। पंचम के असामयिक निधन के बाद इस फिल्म के अधूरे रह गए पार्श्व संगीत को मनोहारी दा ने ही पूरा किया था। 

दादा मानते थे कि ओपी नैय्यर की ‘कश्मीर की कली’ फिल्म का जबर्दस्त हिट गाना ‘ये दुनिया उसी की” उनके और महान गायक मोहम्मद रफी के बीच जुगलबंदी जैसा है। कभी फिर से सुनिए इस गाने को कि कैसे मनोहरी दा का सेक्सोफोन जहाँ छोड़ता है, वहाँ से रफी साहब पकड़ते हैं।

 

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी संगीतकार बनने से पहले जोड़ीदार साजिंदो के रूप में काम करते थे। एक गीत की तैयारी के समय लक्ष्मीकांत को इंटरल्यूड में सेक्सोफोन की ज़रूरत महसूस हुई तो उन्होंने दादा को खबर पहुँचवाई कि वे अपना सेक्सोफोन लेकर स्टूडियो पहुँच जाएँ। गाने के इंटरल्यूड में सेक्सोफोन का सोलो पीस था जिसे वह मनोहारी दादा से बजवाना चाहते थे।

रिहर्सल में जिस शिद्दत से दादा ने वाद्य बजाया उसे सुनकर उसे फाइनल टेक में रखने का फैसला हुआ और वह रिकॉर्ड हुआ। ‘तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे’ गाने के इंटरल्यूड में मनोहरी दा के सेक्सोफोन का जादू कुछ ऐसा छाया कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी धाक जाम गई।  उसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। हेमंत कुमार का गाया वह गीत आज भी हम सुनते हैं तो उसकी गिरफ्त से आसानी से नहीं छूट पाते।

 

कुछ और गीतों की याद लेकर अगले सप्ताह हम फिर हाज़िर होंगे, तब तक के लिए अलविदा…