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होमी दा “बीट पैटर्न” क्या है जिसे आप पंचम के गीतों में सुनेंगे— जाने वो कैसे… भाग-17

कुछ पढ़ने से पहले आज शुरू करते हैं एक गीत से।

ये गीत पंचम को पसंद करने वाले और न पसंद करने वाले, सभी को पसंद होगा। जैसे ही गीत शुरू होता है, उसके साथ ही शुरू होती है एक लय, जो कि गीत का एक “मूड” बना देती है। 

पंचम को पसंद करने वाले जानते हैं कि धुन को बनाने और फिर उसे रिकॉर्ड तक ले जाने के सफर में पंचम के नवरत्न “मारुति राव कीर, मनोहारी सिंह, बासु चक्रवर्ती, भानु गुप्ता, भूपिंदर सिंह, होमी मुल्लन, देवीचंद, चंद्रकांत और अमृत राव उनका साथ देते थे। 

आनंद-मिलिंद के रचे गीत “मुझे नींद ना आए”  (दिल, 1990) में भी आप इसी शैली में एक वाद्य यंत्र को सुन सकते हैं जो इन्हीं नवरत्नों में से एक रत्न ने बजाया था।

इस लयबद्ध ध्वनि का नाम है “होमी दा बीट पैटर्न” जो कि डुग्गी पर बजाया जाता है। डुग्गी एक पर्क्यूशन वाद्य यंत्र है जिसे आप पंचम के कई गीतों में सुनेंगे और जब भी आप इस ध्वनि को सुनें तो पहचान लीजिएगा कि इस शख्स का नाम है होमी मुल्लन। 

आप अगर होमी दा के बजाए गए गीतों में से डुग्गी निकाल देंगे तो आप पाएँगे कि इन गीतों में कुछ नहीं बचता है। होमी दा को यूँही गाते रहो (सागर), आओ ना गले लगाओ ना (मेरे जीवन साथी) और बचना ऐ हसीनों (हम किसी से कम नहीं,) जैसे लोकप्रिय गीतों को अपना स्पेशल “टच” देने के लिए जाना जाता है। 

1965 के आसपास कोलकाता से मुंबई आ जाने के बाद, उन्होंने हिंदी फिल्म में अपना करियर वी बलसारा के सहायक के रूप में शुरू किया था जहाँ उन्होंने बलसारा साहब के लिए पियानो, अकॉर्डियन और कई अन्य वाद्य यंत्र बजाए थे। इसके बाद उन्होंने मुंबई में कई संगीतकारों के लिए अकॉर्डियन, ऑर्गन, और पियानो जैसे वाद्य यंत्र बजाये थे। सही मायनों में उनके काम को पहचान मिली जब उन्होंने पंचम के साथ अपना काम शुरू किया था।

संगीत हिंदी सिनेमा की आत्मा रही है। हिंदी फिल्म के गीतों को अमर बनाने में वाद्य यंत्रों की बहुत बड़ी हिस्सेदारी रही है। संगीत के पारखी हिंदी फिल्मी गीतों के उस हिस्से, बैक-स्टेज कलाकारों – सहायक संगीत निर्देशकों, अरेंजर्स, वाद्य यंत्र वादकों को गीतों की सफलता का काफी श्रेय देते हैं।

उत्तम कुमार अभिनीत बंगाली फिल्म दिया नेया के इस खूबसूरत गीत को, जहाँ संगीत दिया है श्यामल मित्रा ने, हम होमी दा को एक अकॉर्डियन बजाते हुए देख सकते हैं (वीडियो में 0.17 से 0.22 तक देखें)-

अपने ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री, “होमी मुल्लन- दि अनसंग हीरो”, के अंतिम दृश्य में पर्क्युशनिस्ट होमी दा वीरान-सी आँखों से कैमरे की तरफ मुड़कर एक सवाल करते हैं, “क्या आपने कभी अपने पसंदीदा गीतों में वाद्ययंत्र बजाने वाले कलाकारों के नामों का पता लगाने की जहमत उठाई है?” 

यह एक ऐसा सवाल है जो कई लोगों को हैरान कर सकता है और किंतु अगर आप हम से जुड़े हैं और इस लेख को पढ़ रहे हैं तो होमी दा के इस सवाल का जवाब मुस्कुरा कर दे सकते हैं।

आइए देखते हैं उनके द्वारा किए गए काम की एक झलक-