समाचार
भाजपा ने संसद में उठाया कृष्ण जन्मभूमि मामला, पूजा स्थल कानून निरस्त करने की मांग

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के एक सदस्य ने गुरुवार को राज्यसभा में मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार के पूजा स्थल कानून, 1991 को अतार्किक एवं असंवैधानिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, शून्यकाल में भाजपा के हरनाथ सिंह यादव ने कहा, “यह कानून भगवान् राम और भगवान् कृष्ण में भेदभाव उत्पन्न करता है।”

उन्होंने कहा, “पूजा स्थल कानून, 1991 में प्रावधान किया गया कि पूजा स्थलों की जो स्थिति 15 अगस्त 1947 को थी, उसमें परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसमें श्रीराम जन्मभूमि को अलग रखा है। ये प्रावधान संविधान में प्रदत्त समानता और जीवन के अधिकार का ना सिर्फ उल्लंघन करते बल्कि धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करते हैं।”

हरनाथ सिंह यादव ने कहा, “आश्चर्य की बात है कि कानून में प्रावधान किया गया कि इसके विरुद्ध कोई नागरिक न्यायालय में भी नहीं जा सकता है। इसका अर्थ है कि विदेशी अक्रांताओं द्वारा तलवार की नोंक पर श्रीकृष्ण की जन्मभूमि सहित अन्य स्थलों पर जो बलात कब्जा हुआ, उसे तत्कालीन सरकार ने कानूनी रूप दे दिया।”

उन्होंने कहा, “यह राम और कृष्ण के मध्य भेदभाव उत्पन्न करता है, जबकि दोनों भगवान् विष्णु के अवतार हैं। समान कृत्य और समान परिस्थितियों के लिए दो कानून नहीं हो सकते हैं। कोई भी सरकार न्यायालयों के दरवाजे नागरिकों के लिए बंद नहीं कर सकती है।

कुछ विपक्षी दलों ने इस मामले पर आपत्ति जताई। बता दें कि श्रीराम जन्मभूमि विवाद सुलझने के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद गहराने लगा है। इसको लेकर मथुरा की न्यायालय में कई मामले दर्ज हैं।

बीते दिनों उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है और मथुरा में मंदिर निर्माण की तैयारी की जा रही है।