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केरल में नन से दुष्कर्म के आरोपी बिशप फ्रेंको मुलक्कल साक्ष्यों के अभाव में बरी

केरल की एक न्यायालय ने शुक्रवार (14 जनवरी) को पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल को दक्षिणी राज्य के एक कॉन्वेंट में नन से बार-बार दुष्कर्म करने के आरोप से बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी गोपकुमार कोट्टायम ने यह निर्णय सुनाया।

चूँकि, अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध साक्ष्य प्रस्तुत पेश करने में विफल रहा। ऐसे में कोट्टायम के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय-2 ने बिशप को बरी कर दिया।

57 वर्षीय मुलक्कल पर इस जिले के एक कॉन्वेंट की यात्रा के दौरान नन से कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगा था, जब वह रोमन कैथोलिक चर्च के जालंधर सूबा के बिशप थे।

आरोप था कि इससे पूर्व 2018 में नन ने बिशप फ्रेंको मुलक्कल, जो उस समय एक वरिष्ठ पादरी के पद पर थे के विरुद्ध गंभीर आरोपों के साथ पहले उच्च अधिकारियों से संपर्क किया, जिसमें पोप का कार्यालय भी सम्मिलित था। हालाँकि, वहाँ से उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला।

बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2018 में जब मुलक्कल पंजाब में जालंधर सूबा के प्रमुख थे, उस वक्त नन ने कोट्टायम जिला पुलिस प्रमुख के समक्ष शिकायत दर्ज की थी। इसमें मुलक्कल पर 2014 और 2016 के मध्य 13 बार दुष्कर्म का आरोप लगाया था।

पुलिस ने जून 2018 में कोट्टायम जिले में बिशप के विरुद्ध दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था। विशेष जाँच दल ने सितंबर 2018 में बिशप को गिरफ्तार किया और उस पर गलत तरीके से कैद, दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौन संबंध और आपराधिक धमकी का आरोप लगाया।

नवंबर 2019 में शुरू हुए मामले की सुनवाई 10 जनवरी को समाप्त हुई थी। न्यायालय ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मुकदमे से संबंधित किसी भी मामले को उसकी अनुमति के बिना प्रकाशित करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।