राजनीति
बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) पर मनाया जाएगा जनजातीय गौरव दिवस

देश में स्वतंत्रता के बाद अनुसूचित जनजाति के लोगों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कुछ विशेष कार्य नहीं हुआ। इस बात का संज्ञान लेते हुए देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारतरत्न स्वर्गस्थ अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का विभाजन करके अलग से जनजातीय कार्य मंत्रालय बनाया ताकि भारतीय अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के एकीकृत सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सके।

हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में भी अपने कार्यकाल के दौरान जनजाति समाज को ध्यान में रखते हुए कई योजनाओं का आरंभ किया था जैसे कि वन बंधु कल्याण योजना, वन धन योजना, आदि। मोदी ने अपने कार्य को बरकरार रखते हुए प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद भी यह कार्य जारी रखा है।

इसी संदर्भ में भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में 15 नवंबर को बहादुर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को समर्पित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने को स्वीकृति दी है जिससे आने वाली पीढ़ियाँ देश के ऐसे कई वीरों के बलिदानों के बारे में जान सकें।

संथाल, तामार, कोल, भील, खासी और मिज़ो जैसे आदिवासी समुदायों द्वारा किए गए कई आंदोलनों द्वारा भारत के स्वतंत्रता संग्राम को मज़बूती मिली थी। आदिवासी समुदायों द्वारा आयोजित क्रांतिकारी आंदोलनों और संघर्षों को उनके अपार साहस और सर्वोच्च बलिदान से चिह्नित किया गया था।

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध देश के विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी आंदोलनों को राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा गया और पूरे देश में भारतीयों को प्रेरित किया। फिर भी, बड़े पैमाने पर जनता इन आदिवासी नायकों के प्रति अधिक जागरूक नहीं है। 15 अगस्त 2016 के प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के अनुसरण में, भारत सरकार ने देशभर में 10 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों को स्वीकृति दी है।

आगामी 15 नवंबर को सन्मानीय बिरसा मुंडा की जयंती है, जिन्हें देशभर के जनजातीय समुदायों द्वारा भगवान के रूप में सम्मानित किया जाता है। बिरसा मुंडा ब्रिटिश व्यवस्था के विरुद्ध बहादुरी से लड़ाई लड़े और उनके खिलाफ क्रांति का आह्वान करते हुए ब्रिटिश दमन के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया जो आदिवासी समुदायों के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को स्वीकृति देता है।

यह दिवस हर साल ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और वीरता, आतिथ्य और राष्ट्रीय गौरव के भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए आदिवासियों के प्रयासों को मान्यता भी देगा। राँची में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय, जहाँ बिरसा मुंडा ने अंतिम साँस ली, का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।

भारत सरकार ने आदिवासी लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने और मनाने के लिए 15 नवंबर से 22 नवंबर 2021 तक सप्ताह भर चलने वाले समारोहों की योजना बनाई है।

उत्सव के हिस्से के रूप में, राज्य सरकारों के साथ संयुक्त रूप से कई गतिविधियों की योजना बनाई गई है और प्रत्येक गतिविधि के पीछे का विषय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की उपलब्धियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे में भारत सरकार द्वारा किए गए विभिन्न कल्याणकारी उपायों को प्रदर्शित करना है। ये कार्यक्रम अद्वितीय आदिवासी सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान, प्रथाओं, अधिकारों, परंपराओं, व्यंजनों, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका को भी प्रदर्शित करेंगे।