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बिहार देश में पहली बार ग्रामीण चुनावों में बायोमेट्रिक तकनीक का उपयोग करने हेतु तैयार

बिहार आगामी ग्रामीण चुनावों में जाली मतदान और अन्य चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का उपयोग करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

पंचायती राज विभाग द्वारा अक्टूबर और नवंबर में दस चरणों में होने वाले चुनावों में इस तकनीक का उपयोग करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव को स्वीकृति देने की अपेक्षा की जा रही है।

मतदाताओं की पहचान बायोमेट्रिक उपकरणों के माध्यम से प्रमाणित की जाएगी। प्रत्येक मतदाता की मतदान की अनुमति देने से पूर्व एक तस्वीर ली जाएगी। मतदाता के अंगूठे के निशान सहित उसकी तस्वीर और अन्य बायोमेट्रिक विवरण क्लाउड में संग्रहीत किए जाएँगे।

बिहार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (पंचायती राज) अमृत लाल मीणा ने कहा, “इससे जाली या कई जगह दिए जा रहे मतदान का तुरंत पता चल जाएगा। उदाहरण के लिए यदि कोई मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद दूसरे मतदान केंद्र पर वोट डालने जाता है तो तत्काल चेतावनी दर्शा दी जाएगी।”

यदि कोई मतदान एजेंट या कोई अन्य व्यक्ति जाली मतदान या वेष बदलकर मतदान करने का आरोप लगाता है तो संदिग्ध मतदाता (जिसके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं) को अपना आधार कार्ड या अन्य पहचान दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे। उसे तत्काल प्रमाणीकरण के लिए मतदाता डाटाबेस से जाँचा जाएगा।

कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे लागू करने के इच्छुक हैं। इस माह के अंत तक पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी। राज्य चुनाव आयोग एक चरण में प्रत्येक जिले में दो से तीन ब्लॉक में चुनाव करवाएगा और नवंबर तक मतदान पूरा हो जाएगा।