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खिलौनों का आयात तीन वर्षों में 71% घटा व निर्यात 61% बढ़कर 32.6 करोड़ डॉलर हुआ

केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने हेतु खिलौनों के आयात में 71 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि गत तीन वर्षों में निर्यात में 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

एचएस कोड 9503, 9504 और 9505 के लिए भारत में खिलौने का आयात वित्त वर्ष 2018-19 में 37.1 करोड़ डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 11 करोड़ डॉलर रहा, जो 70.35 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।

वाणिज्य मंत्रालय की एक विज्ञप्ति ने मंगलवार (5 जुलाई) को कहा गया कि इस बीच, उपरोक्त खिलौनों का निर्यात वित्त वर्ष 2018-19 में 20.2 करोड़ डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 32.6 करोड़ डॉलर हो गया है, जो 61.39 प्रतिशत अधिक है।

डीपीआईआईटी के अतिरिक्त सचिव अनिल अग्रवाल ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 2 से 5 जुलाई-2022 तक आयोजित टॉय बिज़ बी2बी (बिज़नेस टु बिज़नेस) अंतर-राष्ट्रीय प्रदर्शनी के 13वें संस्करण के दौरान संवाददाताओं से कहा, “अगस्त 2020 में मन की बात के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय खिलौनों की रिब्राडिंग की अपील की थी।”

उन्होंने आगे कहा, “इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री घरेलू डिजाइनिंग को और सुदृढ़ बनाने व भारत को खिलौनों के लिए एक वैश्विक विनिर्माता हब के रूप में बनाने के लिए बच्चों के लिए सही प्रकार के खिलौनों की उपलब्धता, खिलौनों का उपयोग सीखने के संसाधन के रूप में करने, भारतीय मूल्य प्रणाली, भारतीय इतिहास व संस्कृति पर आधारित खिलौनों की डिजाइनिंग करने पर जोर दिया था।”

अनिल अग्रवाल ने कहा, “उद्योग को सरकार की कई सारी युक्तियों से लाभ पहुँचा है और इसके परिणाम मेक इन इंडिया प्रोग्राम की सफलता प्रदर्शित करती है। अब आयात मुख्य रूप से खिलौनों के कुछ पुर्जों तक सीमित रह गए हैं।”