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बीपीसीएल का हरित हाइड्रोजन उत्पादन में आयात निर्भरता घटाने हेतु बार्क संग सहयोग

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए क्षारीय इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक को बढ़ाने हेतु भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) के साथ सहयोग किया।

वर्तमान में इलेक्ट्रोलाइजर संयंत्रों का आयात किया जाता है। यह सहयोग अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने हेतु देश की प्रतिबद्धता का समर्थन करने के लिए अपनी तरह की पहली पहल है।

रिफाइनरियाँ पेट्रोल, डीजल और अन्य रसायनों को बनाने के लिए डीसल्फराइजेशन के लिए बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन का उपयोग करती हैं। वर्तमान में, प्राकृतिक गैस के भाप सुधार के माध्यम से रिफाइनरी में हाइड्रोजन बनाया जाता है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप उच्च कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इस वजह से रिफाइनर पानी से ग्रीन हाइड्रोजन और डीकार्बोनाइज़ हाइड्रोजन उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोलाइज़र स्थापित कर रहे हैं।

बीपीसीएल के सीएमडी अरुण कुमार सिंह ने कहा, “बीपीसीएल पर्यावरण संरक्षण और एक हरित ग्रह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम अपनी सभी गतिविधियों में व्यापक रूप से प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहे हैं। आज बीएआरसी के सहयोग से हम स्वदेशी क्षारीय इलेक्ट्रोलाइजर प्रौद्योगिकी को बढ़ाने की इच्छा रखते हैं और बड़े उपयोग विशेषकर रिफाइनरियों के लिए इसका व्यावसायीकरण करने की आशा करते हैं। यह 2040 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की हमारी यात्रा में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम होगा।”

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा, “भारत पेट्रोलियम की सौर, पवन और जैव ईंधन के साथ अक्षय ऊर्जा के अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, कंपनी अपनी रिफाइनरियों में नई परियोजनाओं के लिए बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करने का मुख्य रूप से अक्षय स्रोतों से इरादा रखती हैं।