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विदेशी मुद्रा भंडार 18 महीनों से अधिक के आयात को पोषित करने के लिए पर्याप्त- केंद्र

केंद्र सरकार ने बुधवार (27 जुलाई) को संसद को सूचित किया कि 18 महीने से अधिक के आयात को पोषित करने के लिए भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति पर्याप्त है और अप्रत्याशित बाहरी झटकों के विरुद्ध लचीली बनी हुई है।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने गत पाँच वर्षों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के आँकड़े प्रस्तुत किए।

इसके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016-17 में भारत का भंडार 371 अरब डॉलर, वित्त वर्ष 2018 में 424.5 अरब डॉलर, वित्त वर्ष 2019 में 412.9 अरब डॉलर, वित्त वर्ष 2015 में 477.8 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2021 में 577 बिलियन डॉलर था। आँकड़ों से जानकारी मिलती है कि चालू वित्त वर्ष में 9 जुलाई तक भंडार बढ़कर करीब 612 अरब डॉलर हो गया है।

वित्त मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, यह पूछे जाने पर कि क्या आरक्षित निधि अंतरराष्ट्रीय भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, को लेकर मंत्री ने कहा कि मार्च 2021 के अंत में विदेशी मुद्रा भंडार के कुल विदेशी ऋण का अनुपात 101.2 प्रतिशत और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए अल्पकालिक विदेशी ऋण 17.5 प्रतिशत था।

उन्होंने कहा कि अस्थिर पूंजी प्रवाह (संचयी पोर्टफोलियो प्रवाह और बकाया अल्पकालिक ऋण सहित) का अनुपात दिसंबर 2020 के अंत में भंडार में 67 प्रतिशत था।

विदेशी मुद्रा भंडार में अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर मंत्री ने कहा, “विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ, जो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के 90 प्रतिशत से अधिक है, एक बहु-मुद्रा पोर्टफोलियो के रूप में बनाए रखा जाता है, जिसमें प्रमुख मुद्राएँ जैसे डॉलर, यूरो, पाउंड स्टर्लिंग, जापानी येन आदि हैं।”