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अस्त्र एमके-1 मिसाइल हेतु रक्षा मंत्रालय का बीडीएल संग ₹2,971 करोड़ का समझौता

2,971 करोड़ रुपये की लागत से भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना के लिए हवा से हवा में मार करने वाले अस्त्र एमके-1 की आपूर्ति के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के साथ रक्षा मंत्रालय ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

अस्त्र एमके-1 भारत की पहली स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुष्टि की कि मिसाइल के निर्माण के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से बीडीएल को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का कार्य पूरा हो गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि बीडीएल में मिसाइल का उत्पादन अब प्रगति पर है।

रक्षा मंत्री ने बताया, “अब तक स्वदेशी रूप से इस श्रेणी की मिसाइल बनाने की तकनीक उपलब्ध नहीं थी। अस्त्र एमके-1 मिसाइल और सभी संबद्ध प्रणालियों के उत्पादन के लिए डीआरडीओ से बीडीएल को प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण पूरा हो चुका है और बीडीएल में उत्पादन प्रगति पर है।”

उन्होंने कहा, “यह परियोजना अनिवार्य रूप से आत्मनिर्भर भारत की भावना का प्रतीक है और हवा से हवा में मिसाइलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारे देश की यात्रा को साकार करने में सहायता करेगी।”

पहले ही रक्षा मंत्रालय 248 अस्त्र एमके-1 मिसाइलों का ऑर्डर दे चुका है। इसमें 200 भारतीय वायुसेना के लिए और 48 भारतीय नौसेना के लिए हैं।

डीआरडीओ द्वारा विकसित 100 किलोमीटर की दूरी वाली अस्त्र एमके-1 का पहली बार मई 2003 में परीक्षण किया गया था। तब से कई बार परीक्षण किया गया और उसे सुखोई-30 मार्क1 लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत किया गया। अगले कुछ वर्षों में मिसाइल को तेजस मार्क-1ए और उन्नत मिग-29 के साथ भी एकीकृत किया जाएगा।