समाचार
दिल्ली के ओखला में एशिया का सबसे बड़ा सीवरेज ट्रीटमेंट संयंत्र दिसंबर में शुरू होगा

जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को निर्माणाधीन 564 एमएलडी ओखला सीवरेज ट्रीटमेंट संयंत्र का निरीक्षण किया। इसकी यमुना सफाई प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाने की अपेक्षा है।

यह संयंत्र एशिया में सबसे विशाल होगा। इसका उद्देश्य सीवेज से दूषित पदार्थों को निकालना है, ताकि ऐसा प्रवाह उत्पन्न किया जा सके, जो आसपास के वातावरण या एक इच्छित पुन: उपयोग के लिए उपयुक्त हो, जिससे जल प्रदूषण को रोका जा सके।

पीटीआई-भाषा को स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय अभियान (एनएमसीजी) के महानिदेशक जी अशोक कुमार ने बताया कि ओखला संयंत्र चालू होने के बाद यमुना की सफाई प्रक्रिया में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “केंद्रीय मंत्री ने पहले आईटीओ के छत घाट का दौरा किया और वहाँ से नाव लेकर 12 किमी दूर ओखला बोट क्लब पहुँचे। फिर वहाँ से शेखावत सड़क मार्ग से ओखला एसटीपी स्थल पहुँचे। लागत बँटवारे की व्यवस्था के अंतर्गत नमामि गंगे कार्यक्रम में 85 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 15 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है। ओखला एसटीपी परियोजना की कुल स्वीकृति लागत 665.78 करोड़ रुपये है।”

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “दिल्ली के हालात को देखते हुए दिसंबर 2022 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए एसटीपी के काम में तेज़ी लाने का निर्देश दिया गया है। दिसंबर 2022 के बाद निश्चित रूप से दिल्ली में यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता में अंतर महसूस होगा क्योंकि ओखला एसटीपी एशिया का सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र है।”

इस 564 मिनिमल लिक्विड डिस्चार्ज (एमएलडी) संयंत्र के निर्माण के बाद यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार होगा। एक एकीकृत परियोजना होने के नाते, कीचड़ प्रबंधन को भी कार्य के दायरे में शामिल किया गया है, जिसके अनुसार पर्यावरण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक तरीके से कीचड़ का उचित तरीके से निपटान किया जाएगा।