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लद्दाख में एक रेजिमेंट की तैनाती के बाद 200 और के9 वज्र हॉवित्जर मिलेंगे- रिपोर्ट

भारत शीघ्र ही के-9 वज्र 155एमएम/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्व-चालित हॉवित्जर के लिए पुनः ऑर्डर दे सकता है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, होवित्जर की 200 इकाइयों की खरीद के लिए रक्षा मंत्रालय ने दस्तावेज स्थानांतरित करने शुरू कर दिए हैं। डिफेंस एक्सपो 2022 में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के साथ एक सौदे पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं, जो कि 10 से 13 मार्च के मध्य गुजरात के गांधीनगर में होना है।

रिपोर्ट में कहा गया कि 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का यह ऑर्डर रक्षा क्षेत्र में किसी भारतीय कंपनी को दिया जाने वाला सबसे बड़ा ऑर्डर होगा।

2017 में हस्ताक्षरित एक सौदे के अंतर्गत एलएंडटी ने भारतीय सेना को 100 के-9एस की आपूर्ति की। हॉवित्जर को समय से पहले वितरित किया गया था। इसे आखिरी बार फरवरी 2021 में सेना को सौंपा गया था। बंदूकें एलएंडटी द्वारा गुजरात के हजीरा में दक्षिण कोरियाई रक्षा प्रमुख हनवा डिफेंस से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ बनाई गई थीं।

के9एस की अधिकतम सीमा 28-38 किमी (कुछ में 50 किमी तक) है। यह बर्स्ट मोड में 30 सेकेंड में तीन राउंड फायर, इंटेंस मोड में 3 मिनट में 15 राउंड और सस्टेन्ड मोड में 60 मिनट में 60 राउंड फायर कर सकती है।

भारतीय सेना के पास वर्तमान में के9 वज्र की 5 रेजिमेंट हैं। प्रत्येक रेजिमेंट में 18 बंदूकें और दो यूनिट रिज़र्व में हैं। पहले सौदे के तहत सेना को मिली बंदूकें पंजाब के मैदानी क्षेत्रों और पाकिस्तान की सीमा से लगे राजस्थान के अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में उपयोग के लिए थीं।

हालाँकि, गत वर्ष भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में के9 वज्र स्व-चालित हॉवित्जर की एक रेजिमेंट को तैनात किया था।

तोपखानों के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पी रविशंकर कहते हैं, “यदि आपके पास स्व-चालित तोपखाने की कम से कम 10 और रेजिमेंट नहीं हैं तो आप पूरी सीमा पर हल्के पड़ जाएँगे।”